रोजगारपरक शिक्षा की दिशा में केयू की ऐतिहासिक पहलः प्रो. सोमनाथ सचदेवा
एईडीपी से विद्यार्थियों को डिग्री के साथ मिलेगा इंडस्ट्री अनुभव और स्टाइपेंड
कुरुक्षेत्र / 14 मई / अटल हिन्द ब्यूरो /शशि अरोड़ा
बदलते वैश्विक परिदृश्य में उच्च शिक्षा को उद्योगों की आवश्यकताओं से जोड़ने की दिशा में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने एक अभिनव एवं दूरदर्शी पहल करते हुए अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम्स (एईडीपी) शुरू किए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप आरंभ किए गए ये कार्यक्रम विद्यार्थियों को केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव, तकनीकी दक्षता तथा रोजगारपरक कौशल भी प्रदान करेंगे।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि विश्वविद्यालय लगातार विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में शुरू किए गए अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम्स शिक्षा और उद्योग जगत के बीच मजबूत सेतु का कार्य करेंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थी कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को उद्योगों में व्यावहारिक रूप से लागू करना सीखेंगे।
प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि यह पहल विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने, उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने तथा उच्च शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और परिणामोन्मुख बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किए गए ये कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा देंगे, बल्कि प्रदेश में कौशल आधारित शिक्षा के नए मॉडल के रूप में भी स्थापित होंगे।
दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र (सीडीओई) की निदेशिका प्रो. मंजूला चौधरी ने बताया कि इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है। आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है।
उद्योगों को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जिनके पास तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी हो। एईडीपी प्रोग्राम्स इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। प्रो. मंजूला चौधरी ने बताया कि इन कार्यक्रमों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ उद्योगों में अप्रेंटिसशिप का अवसर मिलेगा।
पहले चार सेमेस्टर में विद्यार्थियों को कैंपस में अकादमिक एवं प्रायोगिक शिक्षा दी जाएगी, जबकि अंतिम दो सेमेस्टर में उन्हें उद्योगों, कॉरपोरेट संस्थानों एवं विभिन्न संगठनों में अप्रेंटिसशिप करवाई जाएगी। इस दौरान विद्यार्थियों को प्रतिमाह लगभग 12 हजार रुपये या उससे अधिक का स्टाइपेंड भी मिलेगा। हरियाणा प्रदेश में इस प्रकार के स्टाइपेंड आधारित डिग्री कार्यक्रमों की शुरुआत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
प्रो. मंजूला चौधरी ने बताया कि कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय ने इन कार्यक्रमों के संचालन के लिए विभिन्न उद्योगों, कॉरपोरेट एवं सरकारी संस्थानों के साथ साझेदारी भी की है ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण एवं रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो सकें। पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय उच्च शिक्षा योग्यता ढांचा तथा एनईपी-2020 के अनुरूप डिज़ाइन किया गया है। अप्रेंटिसशिप के दौरान किए गए कार्य को अकादमिक क्रेडिट के रूप में भी मान्यता दी जाएगी।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि वर्ष 2025 में शुरू किए गए प्रथम चरण के कार्यक्रमों में बीसीए (इंडस्ट्री लिंक्ड), बी.कॉम (प्रोफेशनल), बीएमएस (इवेंट मैनेजमेंट) तथा बी.एससी. मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी शामिल हैं। बीसीए कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पायथन, वेब टेक्नोलॉजी, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे आधुनिक विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बी.कॉम प्रोफेशनल कोर्स को आधुनिक अकाउंटिंग, जीएसटी, टैक्सेशन एवं कॉरपोरेट फाइनेंस की मांग के अनुरूप तैयार किया गया है। इसी प्रकार बीएमएस इवेंट मैनेजमेंट कार्यक्रम विद्यार्थियों को हॉस्पिटैलिटी, इवेंट प्लानिंग एवं मनोरंजन उद्योग में करियर के अवसर उपलब्ध कराएगा, जबकि मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अस्पतालों एवं डायग्नोस्टिक लैब्स में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कई नए एवं आधुनिक रोजगारपरक कार्यक्रम भी शुरू कर रहा है। इनमें बी.वोक (एनवायरमेंटल साइंस), बी.एससी. सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, बी.एससी. जियोलॉजी प्रोफेशनल, बी.वोक इंडस्ट्रियल बायोकैमिस्ट्री, बी.ए. बिजनेस एंड इकोनॉमिक एनालिटिक्स तथा बी.एससी. डेटा साइंस जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। ये सभी पाठ्यक्रम भविष्य की उभरती हुई इंडस्ट्रीज और रोजगार बाजार की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।


