राह ग्रुप फाउंडेशन के चेयरमैन ने मुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री को पत्र लिखकर उठाया बस संचालकों का मुद्दा
प्राईवेट बसों के संचालकों का रोजगार सुरक्षित रखना भी सरकार की जिम्मेदारी : नरेश सेलपाड़
हिंसार /17 मई /अटल हिन्द ब्यूरो
हिसार। हरियाणा में परिवहन सेवाओं का बड़ा हिस्सा संभाल रहे निजी बस ऑपरेटरों के लिए आर्थिक सहायता की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। सामाजिक संस्था Raah Group Foundation के चेयरमैन Naresh Selpad ने मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini और परिवहन मंत्री को पत्र लिखकर निजी बस संचालकों को राहत देने की मांग उठाई है।
नरेश सेलपाड़ ने अपने पत्र में कहा कि जिस प्रकार निजी स्कूलों को चिराग योजना और 134-ए योजना के तहत सरकारी स्कूलों के बच्चों को शिक्षा देने के बदले आर्थिक सहायता दी जाती है, उसी तरह निजी बस ऑपरेटरों को भी सरकार की मुफ्त और रियायती यात्रा योजनाओं का भार उठाने के बदले आर्थिक सहयोग मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में वर्षों से निजी स्टेज कैरिज बसें विद्यार्थियों, दिव्यांगजनों, बुजुर्गों, पुलिस कर्मियों, पत्रकारों और अन्य पात्र श्रेणियों के यात्रियों को मुफ्त या रियायती यात्रा सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। लेकिन योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या लगातार बढ़ने से निजी बस संचालकों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ता जा रहा है।
सेलपाड़ के अनुसार प्रदेश में करीब 2400 निजी और सहकारी बसें विभिन्न रूटों पर संचालित हो रही हैं, जो रोजाना लाखों यात्रियों को परिवहन सुविधा देती हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे यात्रियों की होती है जिन्हें सरकार द्वारा रियायती या मुफ्त यात्रा सुविधा प्रदान की गई है। ऐसे में बस ऑपरेटरों के लिए संचालन लागत निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा रोडवेज का मौजूदा बस बेड़ा करीब 5260 बसों का है, जबकि निजी और सहकारी बसें भी परिवहन व्यवस्था में लगभग एक तिहाई योगदान दे रही हैं। प्रदेश में करीब 3700 रूट संचालित हैं, जिनमें 2500 लोकल और 1200 अंतरराज्यीय रूट शामिल हैं। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में निजी बसें आम लोगों की जीवनरेखा बनी हुई हैं।
नरेश सेलपाड़ ने कहा कि एक निजी बस से सीधे तौर पर 7 से 10 लोगों को रोजगार मिलता है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 15 लोगों की आजीविका इससे जुड़ी होती है। यदि सरकार राहत देती है तो हजारों परिवारों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और रोजगार भी सुरक्षित रहेंगे।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में परिवहन समितियों की बसों से औसतन 12 हजार रुपये मासिक फीस और करीब 3300 रुपये अड्डा शुल्क वसूला जाता है। इसके अलावा डीजल, बीमा, टैक्स, फिटनेस, परमिट और कर्मचारियों के वेतन जैसे खर्च लगातार बढ़ रहे हैं।
सेलपाड़ ने यह भी सवाल उठाया कि निजी बसों में यात्रा करने वाले विद्यार्थियों के रियायती पासों का भुगतान हरियाणा रोडवेज को किया जाता है, जबकि वास्तविक परिवहन सुविधा निजी बसें उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने कहा कि जब निजी बस संचालक टैक्स भी भरते हैं और संचालन का पूरा खर्च स्वयं उठाते हैं, तो रियायती यात्रियों का भुगतान उन्हें क्यों नहीं दिया जाता।
उन्होंने सरकार से मांग की कि निजी बसों पर लगने वाली मासिक फीस और अड्डा शुल्क में राहत दी जाए। साथ ही जिन योजनाओं के तहत हरियाणा रोडवेज को आर्थिक सहायता मिलती है, उन्हीं मानकों के आधार पर निजी बस ऑपरेटरों को भी सहयोग दिया जाए।
नरेश सेलपाड़ ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित परिवहन सुविधा देना है, जिसका निजी बस संचालक स्वागत करते हैं। लेकिन यदि सामाजिक योजनाओं का पूरा वित्तीय भार निजी ऑपरेटरों पर डाला जाता रहा, तो भविष्य में कई बस संचालकों के लिए संचालन जारी रखना मुश्किल हो सकता है।


