पंचकूला सेक्टर-5 में बीते पांच महीने से धरना प्रदर्शन जारी है. लेकिन आज, बुधवार को ओबीसी ब्रिगेड के नेतृत्व में युवाओं द्वारा आयोग कार्यालय का घेराव करने के कार्यक्रम के चलते पुलिस-प्रशासन ने कड़े प्रबंध किए थे. पहले से ही पुलिस के कई उच्च पदस्थ अधिकारियों के नेतृत्व में अतिरिक्त महिला और पुरुष पुलिसकर्मी पूरी तैयारी के साथ मौजूद थे.
पंचकूला/ 20 मई / अटल हिन्द ब्यूरो
पंचकूला में HPSC घेराव: 35% क्राइटेरिया के विरोध में उबाल, पुलिस कार्रवाई से गरमाई राजनीति, विपक्ष और युवाओं ने सरकार को घेरा
पंचकूला से उठी बेरोजगार युवाओं की आवाज
हरियाणा की सरकारी भर्तियों में लागू किए गए 35 प्रतिशत न्यूनतम पात्रता नियम के खिलाफ पंचकूला में बुधवार को अभ्यर्थियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) के सेक्टर-4 स्थित कार्यालय के घेराव के लिए हजारों युवा पंचकूला के सेक्टर-5 में एकत्र हुए। जब प्रदर्शनकारी आयोग कार्यालय की ओर बढ़े तो पुलिस ने उन्हें बैरिकेड लगाकर रोक दिया। स्थिति तनावपूर्ण होने पर कई युवाओं को हिरासत में लिया गया और कुछ युवतियों को भी पुलिस वाहनों में बैठाकर ले जाया गया।
यह प्रदर्शन केवल एक भर्ती नियम के विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने हरियाणा में सरकारी नौकरियों, स्थानीय युवाओं के अधिकार, भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे मुद्दों को फिर से राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया।
पांच महीने से जारी है आंदोलन
पंचकूला के सेक्टर-5 में ओबीसी ब्रिगेड के नेतृत्व में पिछले पांच महीनों से धरना जारी है। संगठन के अध्यक्ष राजेंद्र तंवर के नेतृत्व में युवा लगातार यह मांग उठा रहे हैं कि HPSC की भर्तियों में लागू 35 प्रतिशत पात्रता नियम को समाप्त किया जाए।
युवाओं का कहना है कि यह नियम योग्य अभ्यर्थियों के अवसर सीमित करता है और बड़ी संख्या में पद खाली रह जाते हैं। बुधवार को आयोजित घेराव कार्यक्रम इसी आंदोलन का अब तक का सबसे बड़ा चरण माना गया।
पुलिस की कार्रवाई और बढ़ा तनाव
सुबह 11 बजे से ही युवा धरना स्थल पर जुटने लगे थे। दोपहर बाद जब भीड़ HPSC कार्यालय की ओर बढ़ी तो पुलिस ने पहले समझाने की कोशिश की, लेकिन आगे बढ़ने की कोशिश पर कई प्रदर्शनकारियों को जबरन उठाकर बसों और पुलिस वाहनों में बैठाया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ युवाओं को हाथ-पैर पकड़कर वाहन तक ले जाया गया। इस कार्रवाई के बाद मौके पर मौजूद युवाओं में रोष और बढ़ गया तथा सरकार विरोधी नारे तेज हो गए।
दिग्विजय चौटाला ने संभाला मोर्चा
दिग्विजय चौटाला लंबे समय तक धरना स्थल पर युवाओं के बीच बैठे रहे। उन्होंने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने वाले युवाओं के साथ इस प्रकार का व्यवहार लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।
उन्होंने प्रशासन से स्पष्ट कहा कि जब तक हिरासत में लिए गए सभी युवाओं को वापस नहीं छोड़ा जाएगा, तब तक कोई ज्ञापन नहीं दिया जाएगा और न ही प्रशासन से कोई वार्ता होगी।
उनके हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने हिरासत में लिए गए युवाओं को वापस धरना स्थल पर पहुंचाया। बाद में निर्णय लिया गया कि 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री कार्यालय के ओएसडी से मुलाकात कराई जाएगी।
कांग्रेस ने भी दिया आंदोलन को समर्थन
प्रदर्शन में कांग्रेस की ओर से सुधा भारद्वाज तथा अन्य स्थानीय नेता शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि हरियाणा के युवाओं को रोजगार से वंचित किया जा रहा है और भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
उनका कहना था कि यदि हजारों शिक्षित युवा सड़क पर उतरने को मजबूर हैं, तो यह राज्य सरकार की नीतियों पर बड़ा सवाल है।
क्या है 35 प्रतिशत क्राइटेरिया?
हरियाणा लोक सेवा आयोग ने ग्रुप-ए और ग्रुप-बी भर्तियों में यह नियम लागू किया है कि लिखित परीक्षा में कम से कम 35 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार ही साक्षात्कार के लिए पात्र होंगे।
अभ्यर्थियों के अनुसार यह नियम कई बार अनुचित सिद्ध होता है। उनका तर्क है कि यदि प्रश्नपत्र कठिन हो तो बड़ी संख्या में उम्मीदवार इस सीमा तक नहीं पहुंच पाते, जिससे कई पद रिक्त रह जाते हैं।
उम्मीदवारों की मांग है कि आयोग न्यूनतम अंक की बाध्यता हटाकर पदों के अनुपात में अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाए।
युवाओं की प्रमुख मांगें
35 प्रतिशत पात्रता नियम समाप्त किया जाए।
रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए।
हरियाणा के युवाओं को प्राथमिकता दी जाए।
भर्ती प्रक्रिया का श्वेत पत्र जारी किया जाए।
हरियाणा सामान्य ज्ञान को परीक्षा में पर्याप्त स्थान दिया जाए।
स्थानीय अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की जाए।
छात्रों के बयान: “हम योग्य हैं, लेकिन अवसर नहीं मिल रहे”
प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों ने अपनी पीड़ा साझा की।
एक अभ्यर्थी ने कहा कि उसने NET और PhD जैसी कठिन परीक्षाएं पास की हैं, लेकिन HPSC की भर्ती प्रणाली के कारण उसे अवसर नहीं मिल पा रहा। दूसरे छात्र ने कहा कि प्रश्नपत्र कठिन होने पर 35 प्रतिशत की सीमा पार करना मुश्किल हो जाता है और दर्जनों पद खाली रह जाते हैं।
गुरमेल डाबी ने आरोप लगाया कि हरियाणा के युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है और राज्य के उच्च पदों पर बाहरी उम्मीदवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
विपक्ष के आरोप: “हरियाणा के युवाओं का हक छीना जा रहा है”
भूपेंद्र सिंह हुड्डा
हुड्डा ने आरोप लगाया कि राज्य के प्रतिष्ठित पदों पर योजनाबद्ध तरीके से बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को नियुक्त किया जा रहा है। उनके अनुसार, इससे हरियाणा के युवा दूसरे राज्यों और विदेशों में रोजगार खोजने को मजबूर हो रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पेपर लीक, भर्ती रद्द होने और लंबी चयन प्रक्रिया ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है।
रणदीप सिंह सुरजेवाला
सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा की संस्कृति, भूगोल और सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़े प्रश्न परीक्षा में पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किए जाते। उन्होंने सरकार से मांग की कि यह सार्वजनिक किया जाए कि राज्य के बाहर से कितने उम्मीदवार चयनित हुए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि डोमिसाइल नियमों में बदलाव का असर स्थानीय युवाओं पर पड़ सकता है।
दीपेंद्र सिंह हुड्डा
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि यदि राज्य की उच्च सेवाओं में स्थानीय युवाओं का प्रतिनिधित्व लगातार घटता गया, तो यह गंभीर चिंता का विषय होगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा के छात्र UPSC जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं में सफल हो रहे हैं, इसलिए राज्य स्तर पर अवसरों की कमी समझ से परे है।
अभय सिंह चौटाला
अभय चौटाला ने आरोप लगाया कि ग्रुप-बी की नौकरियों में बड़ी संख्या में बाहरी उम्मीदवारों का चयन किया जा रहा है। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
करन दलाल
करन दलाल ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पर बढ़ते विवाद राज्य के शैक्षणिक और प्रशासनिक संस्थानों के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि योग्य स्थानीय युवाओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का जवाब
नायब सिंह सैनी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह मेरिट आधारित और पारदर्शी है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के युवा देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं और राज्य सरकार निष्पक्ष भर्ती के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी प्रक्रिया को राजनीतिक आरोपों के आधार पर नहीं परखा जाना चाहिए।
बेरोजगारी के आंकड़े और युवाओं की चिंता
सरकारी आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में 4,04,950 से अधिक पंजीकृत बेरोजगार हैं। शिक्षित युवा भत्ता योजना के तहत:
पोस्ट ग्रेजुएट युवाओं को ₹3,000 प्रतिमाह,स्नातक युवाओं को ₹1,500 प्रतिमाह,12वीं पास युवाओं को ₹900 प्रतिमाह सहायता दी जाती है
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य में रोजगार का मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है।
हरियाणा में 4 लाख से ज्यादा युवा पा रहे हैं बेरोजगारी भत्ताः 2025 में झज्जर से कांग्रेस विधायक भुक्कल के प्रश्न के जवाब में सरकार की ओर से राज्य में बेरोजगारों की संख्या के बारे में जानकारी दी गई. सरकार के अनुसार राज्य में 404950 बेरोजगार पंजीकृत हैं. पंजीकृत बेरोजगारों को राज्य सरकार की ओर से शिक्षित युवा भत्ता मानदेय का लाभ दिया जा रहा है. गुरुग्राम जिले में सबसे कम 2984 युवाओं को लाभ मिल रहा है. वहीं जींद में सबसे अधिक 40595 युवाओं को लाभ मिल रहा है.
हरियाणा में बेरोजगार युवाओं के लिए राज्य सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही है. राज्य के शिक्षित युवा भत्ता और मानदेय योजना के माध्यम से योग्य पोस्ट ग्रेजुएट बेरोजगारों को 3000 रुपये मासिक बेरोजगारी भत्ता का प्रावधान है. वहीं ग्रेजुएट बेरोजगारों को 1500 रुपये मासिर सहायता राशि का प्रावधान है. दूसरी ओर 10+2 पास बेरोजगार युवाओं को 900 रुपये मासिक बेरोजगारी भत्ता और 100 घंटे काम करने के एवज में 600 रुपये हर माह सरकार मानदेय रही है.
HPSC के आंकड़े भी उठाते हैं सवाल
वर्ष 2023-24 में HPSC ने 5,932 पदों के लिए विज्ञापन जारी किए और 2,26,226 आवेदन प्राप्त हुए। इसके बावजूद चयन केवल 1,831 पदों पर हो सका। यह तथ्य प्रदर्शनकारियों के उस तर्क को बल देता है कि भर्ती प्रक्रिया में कई पद रिक्त रह जाते हैं।
2023-24 में 5932 पदों का निकला विज्ञापन, भर्तियां महज 1831: एचपीएससी 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष के दौरान विभिन्न सेवाओं में भर्ती के लिए 5932 पदों का विज्ञापन जारी किया गया. जारी विज्ञापनों के आलोक में 226226 आवेदन प्राप्त हुए. वहीं इस साल कुल 1831 पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन किया गया. वहीं वर्ष 2023-24 के दौरान आयोग का कुल व्यय 23,98,56,763 रुपये रहा. जबकि स्वीकृत बजट 36,42,71,987 रहा. परीक्षा शुल्क और अन्य विविध प्राप्तियों के रूप में कुल 11,07,57,942 रुपये की राशि प्राप्त हुई.
न्यायिक सेवा भर्ती का उदाहरण
HCS (न्यायिक शाखा) भर्ती में 256 पदों के लिए प्रक्रिया चलाई गई, लेकिन केवल 118 उम्मीदवारों को उपयुक्त पाया गया। परिणामस्वरूप 138 पद खाली रह गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि ऐसे उदाहरण बताते हैं कि कठोर पात्रता नियमों के कारण योग्य उम्मीदवारों की संख्या सीमित हो जाती है।
हरियाणा की राजनीति और रोजगार का बड़ा सवाल
पंचकूला में हुआ यह प्रदर्शन केवल एक दिन का विरोध नहीं है। यह हरियाणा के लाखों युवाओं की चिंता, निराशा और उम्मीदों का प्रतीक बन चुका है। विपक्ष इसे स्थानीय युवाओं के अधिकारों की लड़ाई बता रहा है, जबकि सरकार भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष और मेरिट आधारित बता रही है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार 35 प्रतिशत पात्रता नियम पर पुनर्विचार करती है या नहीं, और क्या HPSC भर्ती प्रणाली में ऐसे बदलाव किए जाते हैं जो युवाओं के विश्वास को मजबूत कर सकें।


