महिलाओं के सशक्तिकरण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है केयू का विधि संकायः प्रो. सोमनाथ सचदेवा
विधिक शिक्षा के माध्यम से महिलाओं के प्रबोधन एवं प्रगति को मिल रही नई दिशा
कुरुक्षेत्रा / 21 मई / अटल हिन्द ब्यूरो /शशि अरोड़ा
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का विधि संकाय महिलाओं के प्रबोधन, सशक्तिकरण एवं व्यावसायिक उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। गुणवत्तापूर्ण विधिक शिक्षा, समावेशी शैक्षणिक वातावरण तथा नेतृत्व विकास के अवसरों के माध्यम से विश्वविद्यालय महिला विद्यार्थियों को न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूक बना रहा है।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि महिलाओं का सशक्तिकरण शिक्षा के माध्यम से ही संभव है और विधिक शिक्षा उन्हें अधिकारों, न्याय एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक बनाती है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का विधि संकाय छात्राओं को न केवल उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि उन्हें न्यायपालिका, प्रशासन, शोध एवं सामाजिक नेतृत्व के लिए भी तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि कि संकाय का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर, जागरूक और सक्षम बनाना है ताकि वे समाज में न्याय और समानता की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
विधि संकाय की डीन प्रो. प्रीति जैन ने बताया कि विधि संकाय में छात्राओं को एलएलबी., एलएलएम., बी.ए. एलएलबी. (ऑनर्स), साइबर लॉ एवं बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे विविध पाठ्यक्रमों के माध्यम से पारंपरिक और आधुनिक विधिक क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त करने का अवसर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विधि संकाय में छात्राओं को मूट कोर्ट, वाद-विवाद, शोध परियोजनाओं, केस स्टडी, इंटर्नशिप तथा न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी जैसे व्यावहारिक अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। हाल के वर्षों में लगभग 10 से 12 महिला छात्राओं एवं पूर्व छात्राओं का न्यायिक सेवाओं में चयन होना संकाय की शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण है।
प्रो. प्रीति जैन ने बताया कि कि विधि संकाय की लगभग 65 प्रतिशत महिला संकाय सदस्य छात्राओं के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में कार्य कर रही हैं। वे शोध, न्यायिक प्रशिक्षण, करियर मार्गदर्शन तथा नेतृत्व विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि विधिक शिक्षा महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों, घरेलू हिंसा कानून, कार्यस्थल अधिकार, साइबर सुरक्षा, पारिवारिक कानून तथा आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रति जागरूक बनाती है। विधि संकाय द्वारा आयोजित विधिक साक्षरता शिविर, जागरूकता अभियान एवं आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में भी कानूनी जागरूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रो. पूनिया ने बताया कि विधि संकाय की महिला पूर्व छात्राएँ न्यायपालिका, प्रशासन, कॉर्पाेरेट क्षेत्र एवं अकादमिक जगत में उत्कृष्ट सेवाएं दे रही हैं। इनमें न्यायमूर्ति आशा मेनन, न्यायमूर्ति अलका सारिन, न्यायमूर्ति मीनाक्षी आई. मेहता, जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र कौर तथा न्यायमूर्ति विमलेश तंवर जैसी प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में छात्रवृत्ति, न्यायिक कोचिंग, एलुमनी मेंटरशिप, कॅरियर मार्गदर्शन एवं महिला नेतृत्व कार्यक्रमों को और अधिक सशक्त किया जाएगा ताकि छात्राओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर प्राप्त हो सकें।


