एक ही दिन में दस हज़ार स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात शिशु देखरेख का प्रशिक्षण
10 मई को राष्ट्रव्यापी एनआरपी प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत दिया जाएगा प्रशिक्षण
स्वास्थ्य पेशेवरों को बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम (एनआरपी ) कौशल का प्रशिक्षण
नवजात शिशु मृत्यु दर में सुधार लाने की दिशा में सकारात्मक पहल
गुरुग्राम/ 9 मई /फतह सिंह उजाला
रविवार को एक ही दिन में देशभर के दस हज़ार से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सा पेशेवरों को नवजात शिशु देखभाल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह विशाल अभियान नेशनल नियो नेटल फोरम (एनएनएफ) इंडिया की प्रेसिडेंशियल एक्शन प्लान 2026 का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देशभर में नवजात के जीवन की रक्षा करने का व्यापक प्रशिक्षण देकर नवजात शिशुओं की जीवन रक्षा प्रणाली को मजबूत करना है।
इस उद्देश्य से एनएनएफ इंडिया 10 मई 2026 को “राष्ट्रव्यापी एनआरपी प्रशिक्षण दिवस ” का आयोजन कर रहा है। इस अनूठी राष्ट्रव्यापी पहल को भारत सरकार, इंडियन एकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स, भारतीय फेडरेशन ऑफ़ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनीकॉलॉजिस्ट्स , ट्रेंड नर्सिज एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन तथा यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
एनएनएफ इंडिया के कोर्स समन्वयक डॉ बलराज सिंह यादव ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत रविवार को एक ही दिन में देश के दस हज़ार से अधिक स्वास्थ्य पेशेवरों को बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम (एनआरपी ) कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य देश में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर ) को कम करना है।
अभियान देश के 18 से अधिक राज्यों में संचालित होगा
आयोजकों के अनुसार, यह कार्यक्रम स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को जन्म के तुरंत बाद “गोल्डन मिनट” के दौरान नवजात शिशु की जान बचाने हेतु आवश्यक व्यावहारिक कौशल प्रदान करने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में जन्म लेने वाले प्रत्येक 10 में से एक शिशु को जन्म के समय सांस लेने में दिक्कत होती है और उसे स्वास्थ्य कर्मियों की सहायता की आवश्यकता होती है।
डॉ बलराज सिंह यादव के अनुसार यह अभियान देश के 18 से अधिक राज्यों में संचालित किया जाएगा, जहां अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। गुरुग्राम में यह कार्यक्रम कृष्णा मेडिकेयर के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जो इस पहल में ज्ञान एवं क्रियान्वयन साझेदार के रूप में सहयोग कर रहा है।
इस पहल का नेतृत्व एन एनएफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ ललन के भारती कर रहे हैं । उनके साथ महासचिव डॉ अमित उपाध्याय, नेशनल चेयर पर्सन डॉ एस निम्बालकर, नेशनल कॉर्डिनेटर डॉ विकास गोयल तथा कन्वीनर डॉ शरण्या मैनिकराज सहयोग कर रहे हैं । गुरुग्राम कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. बलराज सिंह यादव द्वारा किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण पहल से डॉ जे पी दधीचि, डॉ गोपाल अग्रवाल तथा डॉ विनीता यादव भी जुड़े हुए हैं।
नवजात देखभाल से जुड़ा प्रत्येक व्यक्ति प्रशिक्षित हो
डॉ. बलराज सिंह यादव ने कहा कि प्रसव एवं नवजात देखभाल से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का प्रशिक्षित होना आवश्यक है, क्योंकि जन्म के समय त्वरित एवं सही जीवन रक्षा प्रक्रिया से नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार होता है तथा नवजात मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है ।
उन्होंने कहा कि यह पहल सुनिश्चित करेगी कि स्वास्थ्यकर्मी जन्म के बाद के सबसे महत्वपूर्ण पहले ‘ गोल्डन मिनट’ में नवजात शिशु के जीवन से जुड़ी आपात स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
यह निःशुल्क बेसिक एनआरपी कोर्स बाल रोग विशेषज्ञों एवं नियोनेटोलॉजिस्ट, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों, चिकित्सकों, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, मेडिकल अधिकारियों, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सों, दाइयों तथा प्रसव कक्ष एवं नवजात देखभाल सेवाओं से जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों के लिए तैयार किया गया है।
सैद्धांतिक ज्ञान की बजाय व्यावहारिक कौशल पर जोर
कार्यक्रम में भारत सरकार के एनएनएसके मॉड्यूल के अनुरूप पाठ्यक्रम, मैनिकिन पर व्यावहारिक सिमुलेशन प्रशिक्षण, छोटे समूहों में एक-से-एक प्रशिक्षक संवाद, प्रारंभिक नवजात जीवन रक्षा तथा बैग-एंड-मास्क वेंटिलेशन का प्रशिक्षण शामिल होगा। सफल प्रतिभागियों को नेशनल न्रोनैटोलॉजिकल फोरम का बेसिक एनआरपी प्रोवाइडर प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा,
जिसकी वैधता दो वर्ष तक रहेगी। इससे प्रतिभागी राष्ट्रीय स्तर के नवजात देखभाल मिशन एवं अभिलेख का हिस्सा बन सकेंगे। आयोजकों ने बताया कि यह पाठ्यक्रम साक्ष्य-आधारित एवं राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें केवल सैद्धांतिक ज्ञान की बजाय व्यावहारिक कौशल विकास पर विशेष जोर दिया गया है।
सफल होने पर प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे
प्रतिभागियों को सत्यापन हेतु वैध पहचान पत्र प्रस्तुत करना होगा। प्रशिक्षण से पूर्व उन्हें पाठ्य सामग्री का अध्ययन तथा ऑनलाइन परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। प्रदर्शन मूल्यांकन में सफल होने पर प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे।
आयोजकों ने यह भी घोषणा की कि उत्कृष्ट प्रतिभागियों एवं कोर्स समन्वयकों को नियोकॉन-2026 के दौरान आयोजित बेसिक एनआरपी ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिलेगा। नवजात शिशुओं के जीवन बचाने के लिए इस अभियान को एक राष्ट्रीय मिशन बताते हुए डॉ. बलराज सिंह यादव ने कहा कि यह अभियान इस संदेश के साथ आगे बढ़ेगा—“एक दिन- एक राष्ट्र-एक मिशन-हर सांस के साथ नवजात जीवन की रक्षा।”
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