भारत निर्वाचन आयोग की ओर से शुरू किए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) अभियान ने प्रदेश की सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है।
चंडीगढ़/ 22 मई / अटल हिन्द ब्यूरो/राजकुमार अग्रवाल
हरियाणा की राजनीति में अब चुनावी रैलियों और बड़े मंचों से आगे बढ़कर ‘हर वोट’ और ‘हर वोटर’ तक पहुंच बनाने की जंग शुरू हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से शुरू किए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) अभियान ने प्रदेश की सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है। मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण को भाजपा और कांग्रेस आने वाले चुनावों की रणनीति से जोड़कर देख रही हैं। यही वजह है कि दोनों प्रमुख दलों ने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की कवायद तेज कर दी है।
पंचकमल में भाजपा की बड़ी रणनीतिक बैठक
सत्तारूढ़ भाजपा ने 25 मई को पंचकूला स्थित प्रदेश मुख्यालय ‘पंचकमल’ में एसआईआर को लेकर अहम बैठक बुलाई है। संगठनात्मक रूप से इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हरियाणा मामलों के प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया और प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली समेत सांसद, मंत्री, विधायक, जिलाध्यक्ष, जिला प्रभारी, पूर्व सांसद, मेयर और एसआईआर से जुड़ी प्रदेश स्तरीय टीमें शामिल होंगी।
भाजपा का फोकस बूथ स्तर तक अपने नेटवर्क को मजबूत करने पर है, ताकि नए मतदाताओं को जोड़ने और समर्थक वोटरों के नाम सुरक्षित रखने में कोई चूक न हो। पार्टी इसे आगामी चुनावों के लिहाज से सबसे अहम ‘माइक्रो मैनेजमेंट’ चरण मान रही है।
कांग्रेस भी एक्टिव मोड में
भाजपा की सक्रियता के बीच कांग्रेस ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में 26 और 27 मई को दो महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जाएंगी। पहले दिन एसआईआर समिति की बैठक होगी, जबकि दूसरे दिन बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) के साथ रणनीति बनाई जाएगी।
इन बैठकों में पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। कांग्रेस की कोशिश है कि उसके समर्थक वोटरों का नाम सूची से न कटे और बूथ स्तर पर निगरानी मजबूत बनी रहे।
क्या है एसआईआर और क्यों बढ़ गई इसकी अहमियत
एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन निर्वाचन आयोग द्वारा चलाया जाने वाला विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट और शुद्ध बनाना होता है।
इस प्रक्रिया के तहत:
नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं
मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं
डुप्लीकेट वोट खत्म किए जाते हैं
पते और अन्य विवरणों का सत्यापन होता है
बीएलओ घर-घर जाकर जांच करते हैं
राजनीतिक दलों के लिए यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील मानी जाती है, क्योंकि कई सीटों पर हार-जीत का अंतर कुछ सौ वोटों का ही होता है।
हरियाणा में एसआईआर का पूरा कार्यक्रम
प्रदेश में 5 जून से 14 जून तक प्रशिक्षण, तैयारी और प्रिंटिंग का कार्य होगा। इसके बाद 15 जून से 14 जुलाई तक बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। 14 जुलाई को पोलिंग स्टेशनों का रेशनलाइजेशन किया जाएगा और 21 जुलाई को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होगी।
इसके बाद 21 जुलाई से 20 अगस्त तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। 18 सितंबर को क्लेम और ऑब्जेक्शन का निपटारा होगा, जबकि 22 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। निर्वाचन आयोग ने पहली जुलाई 2026 को योग्यता तिथि निर्धारित किया है।
किसे मिलेगा राजनीतिक फायदा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एसआईआर का सबसे बड़ा लाभ उसी दल को मिलेगा जिसकी बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत होगी। सत्ता में होने के कारण भाजपा फिलहाल संगठनात्मक रूप से ज्यादा सक्रिय दिखाई दे रही है, जबकि कांग्रेस इसे अपने पारंपरिक वोट बैंक को सुरक्षित रखने का अवसर मान रही है।
ग्रामीण इलाकों, शहरी माइग्रेशन वाले क्षेत्रों और पहली बार वोट डालने वाले युवा मतदाताओं के बीच इस बार वोटर लिस्ट का गणित कई सीटों की दिशा बदल सकता है। यदि किसी दल के समर्थक मतदाता सूची से बाहर रह जाते हैं या नए वोटर समय पर नहीं जुड़ते, तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।
यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों इस प्रक्रिया को केवल प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई के रूप में देख रही हैं। आने वाले महीनों में हरियाणा की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र अब बूथ मैनेजमेंट, डेटा और वोटर नेटवर्क बनने जा रहा है।


