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करनाल का तहसीलदार गिरफ्तार,वहीं करनाल बीजेपी विधायक मनोहर लाल को करोड़ों रुपए के रिश्वत और भ्रष्टाचार के अंजाम की खबर भी नहीं ?

करनाल का तहसीलदार गिरफ्तार,वहीं करनाल बीजेपी विधायक मनोहर लाल को करोड़ों रुपए के रिश्वत और भ्रष्टाचार के अंजाम की खबर भी नहीं ?


करनाल (अटल हिन्द ब्यूरो ) पांच लाख रुपये की रिश्वत के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार डीटीपी विक्रम सिंह के मामले में सोमवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब स्टेट विजिलेंस की टीम ने करनाल के तहसीलदार राजबख्श को तहसील कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया। विजिलेंस से जुड़े अधिकारी ने दावा किया कि तहसीलदार पर आरोप है कि डीटीपी-तहसीलदार मिलजुल कर एक दूसरे के लिए रिश्वत की राशि एकत्रित करते थे, और जो राशि पहले ही गिरफ्तार  डीटीपी विक्रम सिंह से मिली हैं, उस राशि में करीब 14 लाख रुपए तहसीलदार ने डीटीपी को चहेतों की एनओसी के लिए दिए थे।

वहीं तहसीलदार के घर से विजिलेंस टीम को जो कागजात मिले हैं, जिनकी छानबीन चल रही है। विजिलेंस अधिकारी ने बताया कि तहसीलदार जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, उन्हें कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा ताकि हर मामले की तह तक जाया जा सके। तहसीलदार के विजिलेंस की टीम द्वारा हिरासत में लेने से प्रशासनिक अधिकारियों में हडक़ंप मच गया। देर शाम स्टेट विजिलेंस के इंस्पेक्टर सचिन ने तहसीलदार राजबख्श की गिरफ्तारी की पुष्टि कर दी।

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 हाई प्रोफाइल मामला
मामला इतना हाई प्रोफाइल है कि मामले की गूंज विधानसभा में भी उठ चुकी है। उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने भी मामले की जांच के आदेश दिए हुए हैं। जिसमें करनाल राजस्व विभाग के तहसीलदार सहित अन्य कई बड़े अधिकारियों के शामिल होने के गंभीर आरोप हैं। विजिलेंस की टीम हर मामले की गहनता के साथ जांच में जुटी हैं, कोई भी अधिकारी सामने आकर हिरासत या गिरफ्तारी के बारे में कुछ नहीं बता रहा हैं। जांच में जुटे अधिकारी जांच में क्या मिला, इसकी जानकारी देने से बचते नजर आ रहे हैं।
डीटीपी की गिरफ्तारी के बाद कई लोग आने लगे सामने
डीटीपी की गिरफ्तारी के बाद डीटीपी के सताए हुए कई लोग सामने आने लगे हैं, जिन्होंने डीटीपी को प्रत्यक्ष-प्रत्यक्ष रूप से रिश्वत दी हो। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद तरह-तरह की बाते सुनने को मिल रही हैं। वहीं दूसरी ओर स्टेट विजिलेंस की टीम आरोपियों से कई कई राज उगलवा चुके हैं। दावा है कि जांच पूरी होने के बाद स्टेट विजिलेस की टीम के स्टेट अधिकारी विस्तार से जानकारी देंगे।

क्या तहसीलदार व  डीटीपी के  लाखों रुपए चक्कर 
  तहसीलदार और डीटीपी मिलकर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे थे, भ्रष्टाचार के रूप में एकत्रित किए गए लाखों रुपए को ठिकाने लगाने के लिए पैसों को इनवेस्टमेंट किया जाता था। जांच में खुलासा हुआ कि तहसीलदार द्वारा लाखों रुपए इन्वेस्टमेंट के लिए डीटीपी को दिए गए थे। अब जांच टीम पता लगाने में जुटी है कि भ्रष्टाचार कर जो करोड़ों रुपए कमाए गए हैं, उन पैसों को कहां पर ठिकाने लगाया गया हैं। बेमानी संपत्ति की बाते भी सामने आ रही है, लेकिन विजिलेंस अधिकारी सचिन ने कहा कि हर मामले की जांच चल रही है।

भ्रष्टाचार के खेल में कई बड़े अधिकारी-बीजेपी नेतागण शामिल?
 जिस प्रकार से डीटीपी विक्रम सिंह को रिश्वत के साथ पकड़ा गया है, उनके पकड़े जाने से मामला प्रदेश में हाई प्रोफाइल हो गया। सवाल उठ रहा है कि अगर डीटीपी को रिश्वत के साथ गिरफ्तार न किया जाता तो क्या भ्रष्टाचार का खेल बदस्तूर जारी रहता? सरकार की नजर पहले क्यों डीटीपी पर नहीं गई, वह भी तब जब करनाल के शहरवासी चीख-चीख कर डीटीपी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे थे? सवाल उठना भी लाजमी है कि कौन लोग है, जो डीटीपी को संरक्षण दिए हुए थे। ऐसे राजनेताओं को सरकार को बेनकाब करना चाहिए। क्या अवैध कॉलोनियों के धंधे में बड़े अधिकारियों के साथ राजनेता भी शामिल हैं?

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Karnal’s Tehsildar arrested, Karnal BJP MLA Manohar Lal Kot Tehsildar and DTP together not even news of the result of corruption worth crores of rupees?

करनाल बीजेपी विधायक मनोहर लाल को बीते  7 सालों में  भ्रष्टाचार की भनक नहीं ऐसा कैसे हो सकता है !
दूसरी तरफ करनाल में जब इतने बड़े स्तर पर रिश्वत खोरी का खेल चल रहा था तो करनाल के विधायक मनोहर लाल चुप क्यों थे ,क्या एक विधायक को उसके विधानसभा क्षेत्र में क्या हो रहा है मामूली सा भी पता नहीं चला या फिर आँखे जान-बुझ कर बंद की हुई थी। यही नहीं हरियाणा की जनता को याद दिला  करनाल के बीजेपी विधायक मनोहर लाल हरियाणा प्रदेश के सक्रिय चौकीदार और मुख्यमंत्री पद पर पिछले सात सालों से आसीन है। बहुत से लोग विधायक मनोहर से मिलने भी आते होंगे अपनी समस्याएं लेकर जिसमे जमीन  जुड़े लोग और बिल्ड़र भी होंगे जैसा की राज्य के हर विधायक के पास उसके क्षेत्र के लोग मिलने जाते है उन्हें अपनी समस्याएं भी बताते है। क्या बीते इतने सालों में ऐसा कोई भी  शिकायत कर्ता परेशान होकर   विधायक मनोहर लाल के पास  करनाल तहसीलदार राजबख्श और डीटीपी विक्रम सिंह के खिलाफ करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार की शिकायत लेकर कभी पहुंचा ही नहीं या फिर राम -राज्य के नाम पर विधायक मनोहर लाल अपने हल्के के आम लोगों मिलते ही नहीं थे। ऐसा हो ही नहीं सकता क्योंकि एक तो मनोहर लाल विधायक दूसरी तरफ हरियाणा के मुख्यमंत्री भी है जब मनोहर लाल को अपने विधानसभा हल्के  रहें इस करोड़ों के रिश्वत लेन-देन  की जानकारी नहीं तो प्रदेश स्तर पर क्या ख़ाक जानकारी रहती होगी उनके पास ? करनाल रिश्वत काण्ड को देखते और समझते हुए तो ऐसा लग रहा है की हरियाणा के सरकार है ही नहीं जो लोग सरकार के नाम सत्ता में बैठे है उनका असली मकसद हरियाणा की जनता की समस्याएं हल करना नहीं बल्कि दूसरे राज्यों की गैर बीजेपी सरकारों को कोसना मात्र कार्य है। 

शहर में बिछा है अवैध कॉलोनियों का जाल
बता दें कि करनाल शहर के आसपास अवैध कॉलोनियों का जाल बिछा हुआ हैं, क्योंकि संबंधित विभागों के अधिकारी अवैध कॉलोनियां काटकर करोड़ों रुपए कमाने वाले कॉलोनाइजरों के साथ मिले हुए हैं। जिनके चलते अवैध कॉलोनियों का कारोबार लगातार पनप रहा हैं। अवैध कॉलोनियों के कटने के बाद प्लाट धारकों के नव नर्मिति मकानों को धराशाही कर दिया जाता हैं। गरीबों के आसियानों पर तोडफ़ोड़ करने के आरोप डीटीपी विक्रम सिंह पर पहले भी कई बार लगते रहे हैं, लेकिन हर बार नियमों का हवाला देकर डीटीपी साफ तौर पर बच निकलते रहे।

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अवैध कॉलोनियां : फल फूल रहा अरबों का कारोबार
रिमांड के दौरान गिरफ्तार डीटीपी ने क्या खुलासा किए हैं, इस बात की पूरी जानकारी फिलहाल नहीं मिल पाई हैं। लेकिन माना जा रहा है कि करनाल में अवैध कॉलोनियां काटने का धंधा कोई लाखों रुपए का न होकर, अरबों रुपए का हैं। अरबों रुपए के कारोबार पर कई राजनेताओं की नजर लगी हुई हैं। सूत्रों की मानें तो अवैध कॉलोनियां काटने में कई नेता भी शामिल हैं, जो अब भूमिगत हो गए हैं, कहीं जांच में उनके नाम का खुलासा न हो जाए।


विक्रम सिंह और उसका ड्राइवर बलबीर अभी विजिलेंस की रिमांड पर
हरियाणा के करनाल (Karnal) जिले के घूसखोर डीटीपी (District Town Planner) विक्रम सिंह और उसका ड्राइवर बलबीर अभी विजिलेंस की रिमांड पर है. इस रिमांड के दौरान कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है. कोर्ट ने दोनों को तीन दिन के लिए विजिलेंस के रिमांड (Vigilance Remand) पर भेजा है. आरोपी डीटीपी को शुक्रवार को 5 लाख रु. की रिश्वत (Bribe) लेते गिरफ्तार किया गया था. वहीं ड्राइवर को 5 हजार रुपए के साथ पकड़ा था.

विजिलेंस के अनुसार, डीटीपी विक्रम ने पूछताछ में कबूल किया है कि उसके करनाल स्थित आवास से मिली 78,34,630 रुपए की राशि रिश्वत की है. उसने एक फ्लैट, 12 प्लॉट और गाड़ियां आदि घूस की राशि से कैश में खरीदे हैं. वह रिश्वत के तौर पर एक सप्ताह में एक करोड़ रुपए की वसूली करता था. यह वसूली कॉलोनाइजर्स से उनकी कॉलोनियों में तोड़फोड़ न करने के एवज में करता था. आरोपी एक सप्ताह पहले ही तोड़फोड़ करने वाली जगहों की लिस्ट तैयार कर लेता था. यह लिस्ट कॉलोनाइजर्स तक पहुंचा दी जाती थी. इसके बाद जिन कॉलोनाइजर्स से सेटिंग बैठ जाती, उसके यहां तोड़फोड़ नहीं होती थी.

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