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‘हाई रिस्क’ पर भारत के कई बड़े शहर


‘हाई रिस्क’ पर भारत के कई बड़े शहर

अंतर्राज्यीय यात्रा कोरोना संक्रमण के प्रसार की वजह? ‘हाई रिस्क’ पर भारत के कई बड़े शहर

new delhi(atal hind)पुणे के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) के शोधकर्ताओं ने एक लाख से अधिक आबादी वाले 446 शहरों का अध्ययन किया और इसको इन्फेक्शन के प्रसार को समझने के लिए परिवहन के साधनों और इसके इस्तेमाल की आवृत्ति से जोड़ा. अमरेली, गंगटोक, शिमला, कन्नूर, तेजपुर, उस्मानाबाद, जोरहाट और जूनागढ़ उन शहरों में शामिल हैं जहां कोरोना संक्रमण के प्रकोप के दौरान सबसे कम खतरा रहा.

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हालांकि इस स्टडी में यह भी पाया गया कि भारत के कुछ अन्य शहर जैसे- दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद, लखनऊ, झांसी, पुणे और जयपुर हाई रिस्क स्टेट्स में शीर्ष पर हैं. शोधकर्ताओं ने खतरनाक शहरों का मैप तैयार करने के लिए इन शहरों के बीच हवाई, रेल और सड़क परिवहन का इस्तेमाल किया और मार्च और जुलाई 2020 के बीच दर्ज किए गए कोरोना मामलों के साथ उनकी तुलना की.IISER में फिजिक्स डिपार्टमेंट के प्रोफेसर एमएस संथानम ने कहा, ‘मान लीजिए कि किसी खास शहर में एक संक्रामक रोग का प्रसार है, तो ऐसे में यह नक्शा इस बात की जानकारी देने के लिए समय प्रदान करता है कि देश के अन्य हिस्सों में संक्रमण को ट्रांसमिट होने में कितना समय लगेगा. इस जानकारी के साथ सरकारी एजेंसियां ​​​​तैयार रह सकती हैं और उसके अनुसार यात्रा प्रतिबंधों को लेकर योजना बना सकती हैं’.

पूर्व तैयारी से रोका जा सकता है संक्रमण का प्रसार

देश भर में रोजाना ट्रेन से लगभग 88 लाख लोग सफर करते हैं. इसके बाद सड़क मार्ग से 25 लाख और हवाई मार्ग से 7.5 लाख लोग सफर करते हैं. शोधकर्ताओं ने कहा कि इसका साफ मतलब है कि ट्रेनें संक्रमण का वाहक हैं. क्योंकि इससे रोजाना बड़ी संख्या में लोग ट्रैवल करते हैं. संथानम ने कहा कि संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए ट्रेनों को उन शहरों के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है, जहां से संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं.

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पिछले साल कोरोना के प्रसार की वजह से भारत सहित दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को बंद कर दिया गया था और कई महीनों तक कोई परिवहन सेवा प्रदान नहीं की गई थी. शोधकर्ताओं ने तर्क दिया कि भारत में सभी मार्गों और स्थानों पर सभी परिवहन सेवाओं को बंद करने के बजाय अगर संक्रमण के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए उपायों को समय पर शुरू किए जाएं तो कोरोना संक्रमण के ट्रांसमिशन को काफी हद तक प्रसार होने से रोका जा सकता है.

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