भगवंत सिंह मान ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि पंजाब न कभी झुका है और न भविष्य में झुकेगा। उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया और कहा कि ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार की तरह किया जा रहा है।
चंडीगढ़ /10 मई/ अटल हिन्द ब्यूरो
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज आम आदमी पार्टी के नेताओं पर ईडी (इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट) की लगातार छापेमारी को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर कड़ा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों के जरिए विपक्षी नेताओं को डराने और दबाव में लेने की राजनीति अब खुलकर सामने आ चुकी है, लेकिन पंजाब इस तरह की किसी भी राजनीति के आगे झुकने वाला नहीं है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के आवास पर एक साल में तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार ईडी की रेड हुई, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी एजेंसियों के हाथ कुछ नहीं लगा। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी कार्रवाई सिर्फ उन राज्यों में क्यों हो रही है जहां भाजपा की सरकार नहीं है।
भगवंत मान ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का मकसद केवल काला धन पकड़ना नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाकर उन्हें भाजपा में शामिल करना है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में यह भी देखा गया है कि जिन नेताओं पर पहले जांचें चल रही थीं, बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए और फिर उन पर कार्रवाई भी रुक गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार की तरह कर रही है। उन्होंने ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स और यहां तक कि चुनाव आयोग तक पर निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “या तो भाजपा में शामिल हो जाओ या फिर जांच और छापेमारी झेलो”—यह एक तरह का दबाव तंत्र बन चुका है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया।
उन्होंने राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके संस्थानों और आवास पर छापेमारी हुई, लेकिन जैसे ही राजनीतिक स्थिति बदली, कार्रवाई भी शांत हो गई और सुरक्षा तक दे दी गई।
भगवंत मान ने कहा कि पंजाब की धरती गुरुओं, शहीदों और संघर्ष की भूमि है, जिसने कभी भी तानाशाही के आगे सिर नहीं झुकाया। उन्होंने दावा किया कि पंजाब न पहले झुका है और न आगे झुकेगा।
कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बार-बार की गई छापेमारी का उद्देश्य केवल डर पैदा करना और राजनीतिक दबाव बनाना है, लेकिन इससे कुछ हासिल नहीं हुआ।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार पंजाब के साथ लगातार भेदभाव कर रही है—चाहे चंडीगढ़ का मुद्दा हो, भाखड़ा का पानी हो या आरडीएफ फंड की रोक हो। इसके बावजूद पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा में अहम योगदान देता है और सीमाओं की रक्षा में भी आगे रहता है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह पूरी रणनीति पंजाब और विपक्षी राज्यों को निशाना बनाने के लिए अपनाई जा रही है, जबकि भाजपा शासित राज्यों में ऐसी कार्रवाई कम देखने को मिलती है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि पंजाब में बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून लागू किया गया है और सरकार धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस कानून को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
भगवंत मान ने कहा कि कुछ राजनीतिक ताकतें इस कानून का विरोध कर रही हैं, लेकिन यह कानून लंबे समय से जनता की मांग के बाद बनाया गया है और इसे संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मंजूरी मिल चुकी है।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब न डरने वाला राज्य है और न दबाव में आने वाला। उन्होंने चेतावनी दी कि केंद्र की इस तरह की राजनीति का जवाब पंजाब एकजुट होकर देगा और लोकतांत्रिक तरीके से देगा।


