ए.सी.बी द्वारा गठित एसआईटी द्वारा जल जीवन मिशन में हुए हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में संजय बडाया को गिरफ्तार किया
जयपुर/ 11 मई/अटल हिन्द /दिनेश कुमार जांगिड़
जयपुर, 11 मई। जल जीवन मिशन में हुए व्यापक भ्रष्टाचार के संबंध में एसीबी ब्यूरो में दर्ज प्रकरण संख्या 245/2024 में आरोपी संजय
बड़ाया को थाईलैंड यात्रा से लौटने पर पूर्व में जारी लुकआउट सर्कुलर के क्रम में दिल्ली एयरपोर्ट पर डिटेन किया गया था
जिसको विशेष टीम द्वारा ब्यूरो मुख्यालय लाया जाकर सोमवार को गिरफ्तार किया गया एवं माननीय न्यायालय में पेश कर 13 मई 2026 तक का पुलिस रिमांड अनुसंधान हेतु प्राप्त किया गया। साथ ही सोमवार को माननीय न्यायालय में महेश जोशी को ब्यूरो द्वारा पेश किया गया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। प्रकरण में अनुसंधान जारी है।
प्रकरण संख्या 245/2024 के अनुसंधान से फर्म मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी प्रोपराइटर श्री महेश मित्तल व फर्म मैसर्स श्री श्याम ट्यूबेल कंपनी प्रोपराइटर श्री पदम चंद जैन द्वारा इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के तत्कालीन मंत्री, महेश जोशी द्वारा सुबोध अग्रवाल तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव पीएचईडी, आरोपीगण मुख्य अभियन्ता / अतिरिक्त मुख्य अभियंता, संवेदको व अन्य प्राइवेट व्यक्ति मुख्यतः संजय बड़ाया के साथ मिलीभगत कर राज्य में उपरोक्त दोनों फर्मों के नाम जारी विभिन्न टेण्डरों में इरकॉन इंटरनेशनल लि. के फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र लगाकर करीब 960 करोड़ रुपये के टेंडर प्राप्त कर करोड़ों रूपयों का भ्रष्टाचार करना प्रकट हुआ।
अनुसंधान से यह भी प्रकट हुआ कि तत्कालीन मंत्री, महेश जोशी द्वारा सुबोध अग्रवाल तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव पीएचईडी, आरोपीगण मुख्य अभियन्ता / अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता, संवेदको व अन्य प्राइवेट व्यक्ति मुख्यत संजय बडाया के साथ मिलीभगत कर आपराधिक मंशा से मेजर प्रोजेक्टस (50 करोड़ रुपये से ऊपर) की निविदाओं में साइट विजिट प्रमाण-पत्र की बाध्यता को नियमो के विरूद्ध निविदा में शामिल कर बोली दाताओं की पहचान को उजागर कर टेण्डर पुलिंग करने के फलस्वरूप 30 से 40 प्रतिशत तक अप्रत्याशित उंचे टेण्डर प्रीमियम प्राप्त हुए, जिनका पीएचईडी के अधिकारियों द्वारा अनुमोदन कर व्यापक स्तर पर पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार करना प्रमाणित पाया गया है, इन टेंडर की कुल राशि लगभग 20 हजार करोड़ रुपये है।
अनुसंधान से यह तथ्य प्रकट हुआ कि आरोपी संजय बडाया तत्कालीन पीएचईडी मंत्री महेश जोशी के करीबी रहा है तथा विभागीय कार्यों में हस्तक्षेप रखता था। प्रकरण में आरोपी ठेकेदारों से नजदीकी संबंध होने एवं उनके साथ रिश्वत राशि के लेनदेन के तथ्य भी सामने आये है। जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पीएचईडी के अधिकारियों पर तबादले एवं विभागीय कार्यवाही का दबाव बनाये जाने एवं ट्रांसफर पोस्टिंग करवाने के एवज में मोटी रिश्वत राशि के लेनदेन के तथ्य भी सामने आये है।
प्रकरण में 12 आरोपीगण पूर्व मंत्री महेश जोशी, सुबोध अग्रवाल (सेवानिवृत्त आईएएस), दिनेश गोयल हाल मुख्य अभियंता प्रशासन, के. डी. गुप्ता हाल मुख्य अभियन्ता ग्रामीण, सुभांशु दीक्षित, तत्कालीन सचिव आरडब्लयूएसएसएमची हाल अति. मुख्य अभियंता, जयपुर क्षेत्र-द्वितीय, सुशील शर्मा हाल वित्तीय सलाहकार अक्षय ऊर्जा, निरिल कुमार हाल मुख्य अभियन्ता चूरू, विशाल सक्सेना अधिशासी अभियन्ता हाल निलम्बित, अरुण श्रीवास्तव अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता हाल सेवानिवृत, डी. के. गौड तत्कालीन मुख्य अभियन्ता व तकनीकी सदस्य हाल सेवानिवृत, महेन्द्र प्रकाश सोनी तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता हाल सेवानिवृत्त एवं मुकेश पाठक प्राइवेट व्यक्ति को पूर्व में गिरफ्तार किया गया था।
प्रकरण में तीन फरार आरोपीगण मुकेश गोयल तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, जितेंद्र शर्मा तत्कालीन अधिशासी अभियन्ता एवं संजीव गुप्ता प्राइवेट व्यक्ति के खिलाफ माननीय न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी हेतु स्थायी वारण्ट जारी किये है तथा उक्त तीनों आरोपी गणों को उद्घोषित अपराधी घोषित करवाये जाने आदि की कार्यवाही की जा रही है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रकरण में पांच अन्य आरोपीगण को गिरफ्तारी से राहत प्रदान की गई है।
प्रकरण में त्वरित प्रभावी अनुसंधान हेतु उप महानिरीक्षक पुलिस डॉ. रामेश्वर सिंह के निर्देशन में गठित एसआईटी के सदस्य श्री हिमांशु अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, महावीर प्रसाद शर्मा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं भूपेन्द्र अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रकरण में तकनीकी एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का गहनता से विश्लेषण किया गया।अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव के सुपरविजन में गठित एसआईटी द्वारा आरोपी से विस्तृत पूछताछ, साक्ष्य संकलन एवं अग्रिम अनुसंधान जारी है।
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