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सरकारों के खिलाफ लिखा तो कुछ भी झूठा-गंदा ,या गंभीर केस लगा के जेल भेज दिए जाओगे ,जैसे इन्हे भेज दिया

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सरकार के ख़िलाफ़ व्यंग्य लिखने पर गिरफ़्तार पत्रकार पर वेश्यावृत्ति के आरोप लगाए गए

रायपुर: व्यंग्य लिखकर छत्तीसगढ़ सरकार की आलोचना करने के आरोप में गिरफ्तार पत्रकार नीलेश शर्मा के खिलाफ रायपुर पुलिस ने सोमवार को आईटी अधिनियम और अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम से संबंधित तीन नई धाराओं में मामले दर्ज किए हैं.

बता दें कि शर्मा के खिलाफ शिकायत सत्तारूढ़ कांग्रेस के सदस्य खिलावन निषाद ने दर्ज कराई थी, जिन्हें शर्मा के वेब पोर्टल इंडिया राइटर्स पर उनके द्वारा लिखे कॉलम ‘घुरवा की माटी’ से आपत्ति थी.

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उन्होंने शर्मा को ‘गोदी मीडिया का हिस्सा’ बताते हुए आरोप लगाया था कि वे एक एजेंडा के तहत सरकार के भीतर मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं.

शर्मा के लेख कांग्रेस सरकार को निशाना बनाते थे, जिनमें सरकार के मंत्रियों और नौकरशाहों समेत इसके सदस्यों की आलोचना उनके नाम या काल्पनिक नामों के सहारे की जाती थी. छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के दौरान भी शर्मा ‘चोखेलाल’ नाम से राजनीतिक व्यंग्यों की श्रृंखला लिखते रहे हैं.

वहीं, कांग्रेस नेता की शिकायत के बाद इंडिया राइटर्स पोर्टल को बंद कर दिया गया था.

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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, शर्मा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दावा किया कि उसे शर्मा के फोन से आपत्तिजनक सामग्री मिली है, जो मूल गिरफ्तारी से संबंधित नहीं है. सोमवार को शर्मा को बिलासपुर जेल में स्थानांतरित कर दिया गया.

If anything is written against the governments, false-dirty, or serious case will be sent to jail, as if they were sent.

उनके परिवार का कहना है कि उन्हें मीडिया से बात न करने के लिए धमकाया जा रहा है और शर्मा से मिलने नहीं दिया जा रहा है.

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शर्मा के भाई रितेश इंडिया राइटर्स के लिए विज्ञापन का काम देखते हैं, उन्होंने द क्विंट से बात करते हुए कहा कि पोर्टल में कभी भी झूठ प्रकाशित नहीं हुआ और राजनीतिक व्यंग्य का वह कॉलम भाजपा की रमन सिंह सरकार के समय भी प्रकाशित होता था, तब यह मुखिया के मुखारी नाम से प्रकाशित होता था.

वहीं, रायपुर पुलिस ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा है कि शर्मा को वेश्यावृत्ति, ब्लैकमेलिंग और दोनों ही लिंग के लोगों के साथ अश्लील चैट करने में लिप्त पाया गया है. पुलिस ने यह भी दावा किया है कि उनके पास गोपनीय प्रकृति के दस्तावेज और फोन रिकॉर्डिंग्स थे और वे पत्रकारों और पत्रकारिता के नाम पर धब्बा लगा रहे हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि कॉल रिकॉर्ड संवेदनशील गोपनीय दस्तावेज होते हैं, जिन्हें केवल पुलिस या अन्य एजेंसियों द्वारा ही आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत उपयोग में लाया जा सकता है. उस उद्देश्य की जांच करना जरूरी है जिसके लिए कॉल रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया.

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बता दें कि इससे पहले कांग्रेस नेता खिलावन निषाद की शिकायत पर शर्मा के खिलाफ आईपीसी की धारा 505, 505(1) और 505(2) के तहत अफवाह फैलाने, द्वेष और नफरत फैलाने व अशांति पैदा करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था.

अब उनके ऊपर आईटी अधिनियम की धारा 67(A) (इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करना) और अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम (पीटा) की धारा 4 (वेश्यावृत्ति की कमाई पर जीना) व धारा 5 (वेश्यावृत्ति के लिए व्यक्ति की खरीद-फरोख्त, उसे वेश्यावृत्ति में धकेलना या वेश्यावृत्ति के लिए ले जाना) के तहत भी मामला दर्ज कर लिया गया है.

प्रेस विज्ञप्ति में पुलिस का कहना है कि शर्मा के फोन में पोर्नोग्राफिक सामग्री मिली है जो आईटी कानून के तहत दंडनीय अपराध है.

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पुलिस का आरोप है, ‘फोन में मिली चैट से स्पष्ट है कि शर्मा नैतिक तौर पर गलत काम करने वाली महिलाओं के संपर्क में थे. चैट आपत्तिजनक है.’

साथ ही पुलिस का कहना है कि शर्मा जिन लोगों के साथ फर्जी खबरें और एजेंडा फैलाने के संबंध में निरंतर संपर्क में थे, उनसे भी पूछताछ की जाएगी.

पुलिस का आरोप है कि शर्मा पत्रकारिता की आड़ में ब्लैकमेलिंग करते थे. उनके द्वारा पीड़ित लोगों से भी पूछताछ की जाएगी. साथ ही, पुलिस का कहना है कि शर्मा के फोन में पाए गये गोपनीय दस्तावेजों तक सरकारी कर्मचारियों की मदद की बिना नहीं पहुंचा जा सकता था, इसकी भी जांच की जा रही है.
गिरफ्तारी से पहले जो आखिरी कॉलम शर्मा ने लिखा था, उसमें कांग्रेस के उस चर्चित फॉर्मूले का जिक्र था जिसके तहत छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके प्रतिद्वंदी टीएस सिंहदेव के बीच ढाई-ढाई साल तक मुख्यमंत्री बनने का समझौता हुआ था.

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वहीं, शिकायतकर्ता निषाद का कहना है कि शर्मा के लेखों की भाषा आपत्तिजनक है. निषाद की शिकायत विशेष तौर पर एक मार्च को ‘वाह वाह खेल शुरू हो गया’ नामक लेख से जुड़ी थी. इसकी अगली शाम ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

इससे पहले, शर्मा के लिखे छद्म नामों का उपयोग करने वाले लेखों को बघेल के करीबी माने जाने वाले लोगों की आलोचना के रूप में देखा जाता था.

भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कांग्रेस सरकार की कार्रवाई पर निशाना साधते हुए कहा है, ‘जिन लोगों ने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून लाने का वादा किया था, वे ही अब उन्हें व्यंग्यात्मक लेख लिखने पर निशाना बना रहे हैं.’

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गौरतलब है कि 2018 में सरकार बनाने के बाद कांग्रेस ने वादा किया था कि पत्रकारों को उत्पीड़न से बचाने के लिए क़ानून लाया जाएगा. पिछले साल इस संबंध में एक विधेयक भी सामने आया था.

नीलेश शर्मा ने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत 2006 में एक स्थानीय हिंदी अखबार से की थी. बाद में उन्होंने इंडिया राइटर्स के नाम से एक मैगज़ीन शुरू की और उसके बाद चार साल पहले इसी नाम से एक वेब पोर्टल की शुरुआत की.

हिंदुस्तान टाइम्स का कहना है कि अक्टूबर 2021 में छत्तीसगढ़ पुलिस ने अन्य वेब पोर्टल के दो पत्रकारों को कांग्रेस विधायकों के खिलाफ भ्रामक और आधारहीन रिपोर्ट प्रकाशित करने व धन उगाही के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था.

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एडल्ट मैगजीन सेंसर करने की जरूरत नहीं है. बस मैगजीन में पॉलिटिक्स नहीं होनी चाहिए.

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