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कुलदीप बिश्नोई आखिर क्या करेंगे ,राहुल राहुल करते कहीं  ना घर के ना रहे घाट के,हरियाणा कांग्रेस में मचा “बवाल” थमने का नाम नहीं ले रहा,

कुलदीप बिश्नोई आखिर क्या करेंगे ,राहुल राहुल करते कहीं  ना घर के ना रहे घाट के =,हरियाणा कांग्रेस में मचा “बवाल” थमने का नाम नहीं ले रहा,
  आसान नहीं होगा कुलदीप बिश्नोई के लिए कोई फैसला लेना

======अटल हिन्द ब्यूरो ===
चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस में मचा “बवाल” थमने का नाम नहीं ले रहा है। कुमारी शैलजा को अध्यक्ष पद से हटाए जाने और उदयभान को नया अध्यक्ष बनाए जाने के बाद भी कांग्रेस में अंदरूनी “घमासान” मचा हुआ है।
अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार कुलदीप बिश्नोई उदय भान को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद नाराज हो गए हैं और उन्होंने यह ऐलान कर दिया कि जब तक राहुल गांधी के साथ उनकी बात नहीं होगी तब तक वह कांग्रेस के किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।
कुलदीप विश्नोई का नाराज होना जहां कांग्रेस के लिए बड़ी “समस्या” बन गया है वहीं खुद कुलदीप बिश्नोई की सियासत चौराहे पर आ खड़ी हुई है।
कुलदीप बिश्नोई के लिए सामने नजर आ रहे चारों रास्ते में से किसी एक को चुनना आसान नहीं होगा।

रास्ता नंबर -1
कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस में बने रहें
अगर कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस में बने रहेंगे तो उन्हें भूपेंद्र हुड्डा के नीचे काम करना होगा जो उन्हें मंजूर नहीं है। भूपेंद्र हुड्डा के साथ उनके रिश्तों की खटास उनके स्वाभिमान को बार-बार चोट करती रहेगी।
कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद भी भूपेंद्र हुड्डा कुलदीप बिश्नोई को कोई बड़ा पद सरकार में आसानी से नहीं लेने देंगे। उन हालात में कुलदीप सिंह को फिर हाईकमान की दहलीज पर जाना होगा।
लेकिन अगर हाईकमान कुलदीप के साथ रहा तो वह सीएम से लेकर डिप्टी सीएम और दूसरे नंबर के मंत्री की रेस में शामिल रहेंगे।

रास्ता नंबर-2
अगर कुलदीप बिश्नोई भाजपा ज्वाइन करें
कुलदीप बिश्नोई के शामिल होने से भाजपा को बंपर फायदा होगा। कुलदीप के आने के बाद वह तीसरी बार सत्ता की प्रबल दावेदार बन जाएगी। कुलदीप बिश्नोई के आने से गैर जाट वोटर और भी ज्यादा संख्या में भाजपा के साथ जुड़ जाएंगे जिसके कारण वह तीसरी बार सत्ता पर काबिज रहेगी ।कुलदीप बिश्नोई के लिए भाजपा में जाना भी ज्यादा खुशनुमा नहीं है। भाजपा में जाकर कुलदीप बिश्नोई बेशक बेटे भव्य को सांसद बनवा सकते हैं और खुद डिप्टी सीएम या वरिष्ठ मंत्री बन सकते हैं लेकिन कुलदीप भाजपा पर आंख मूंदकर विश्वास नहीं कर सकते हैं क्योंकि जिस तरह से 2014 में भाजपा ने कुलदीप के साथ विश्वासघात किया था, वही कहानी आगे भी भाजपा दोहरा सकती है। यानी उन्हें इस्तेमाल करके फिर हाशिए पर डाल सकती है

रास्ता नंबर- 3
कुलदीप बिश्नोई आम आदमी पार्टी में चले जाएं
कुलदीप बिश्नोई का आम आदमी पार्टी में जाना कुलदीप बिश्नोई के लिए कम फायदेमंद लेकिन आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा मददगार साबित होगा। कुलदीप बिश्नोई के पार्टी में आने के बाद आप पार्टी हरियाणा में सत्ता की प्रबल दावेदार बन जाएगी। कुलदीप बिश्नोई आम आदमी पार्टी को शिखर पर ले जाकर भी “रिस्क” में रहेंगे क्योंकि आम आदमी पार्टी में उसी नेता को सीएम बनाया जाएगा जिसे केजरीवाल चाहेंगे और केजरीवाल के मूड के बारे में कोई गारंटी नहीं ले सकता ।

रास्ता नंबर -4
कुलदीप बिश्नोई हरियाणा जनहित कांग्रेस को फिर खड़ा करें
अगर कुलदीप बिश्नोई हरियाणा जनहित कांग्रेस को फिर से खड़ा करेंगे तो उनके लिए पहाड़ जैसी चुनौती होगी क्योंकि 2008 से लेकर 2016 तक का सफर उनके लिए बेहद कड़वा रहा है। ऐसे में वे न तो दोबारा से HJC को खड़ा कर सकते हैं और न ही एचजेसी को सत्ता का पहला विकल्प बनाने का अनुकूल माहौल इस समय हरियाणा में है। बात यह है कि कुलदीप बिश्नोई के लिए इस समय बेहद “दुविधा” का दौर चल रहा है। जहां कांग्रेस में उन्हें जनाधार के हिसाब से सम्मान नहीं मिल रहा है वहीं दूसरी तरफ भाजपा और आम आदमी पार्टी में जाने पर उनके बड़े भविष्य की कोई “गारंटी” नहीं है। ऐसे में उनके लिए अंतिम फैसला लेना आसान नहीं होगा।
कुलदीप बिश्नोई के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस को हरियाणा के अलावा राजस्थान में भी नुकसान होगा जहां अगले साल चुनाव होने हैं। पिछली बार राजस्थान में कांग्रेस सरकार बनाने में कुलदीप बिश्नोई का अहम योगदान रहा था क्योंकि राजस्थान में 37 सीटों पर बिश्नोई वोटर हार-जीत का फैसला करते हैं। बिश्नोई समाज का मुखिया होने के कारण कुलदीप बिश्नोई का राजस्थान में बड़ा असर है। 2018 में कुलदीप बिश्नोई ने 26 सीटों पर कांग्रेस का प्रचार किया था जिनमें से दो तिहाई सीटों पर कांग्रेस की जीत हुई थी। अगर कुलदीप बिश्नोई ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर ली तो राजस्थान में कांग्रेस सत्ता से बेदखल हो जाएगी और भाजपा आसानी से सत्ता हासिल कर लेगी। इसके अलावा कुलदीप बिश्नोई के पार्टी छोड़ने पर हरियाणा में भी कांग्रेस सत्ता में वापसी नहीं कर पाएगी क्योंकि हालात में गैरजाट वोटर कांग्रेस या भाजपा आम आदमी पार्टी को ही वोट देने को प्राथमिकता देंगे।अब देखने की बात यही है कि राहुल गांधी कुलदीप बिश्नोई को किस तरह से संतुष्ट रहते हैं और कुलदीप बिश्नोई राहुल गांधी के मुलाकात के बाद क्या फाइनल फैसला लेते हैं?
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