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कुलदीप शर्मा को पता भी नहीं चला की उनका राजनीतिक जीवन और हजकां से  लड़ाई में सिर्फ मोहरा थे ,चाल तो हुड्डा चल रहे थे 

कुलदीप शर्मा को पता भी नहीं चला की उनका राजनीतिक जीवन और हजकां से  लड़ाई में सिर्फ मोहरा थे ,चाल तो हुड्डा चल रहे थे

चंडीगढ़। कांग्रेस की राजनीति में “रावण” के नाम से जाने जाते पूर्व विधानसभा स्पीकर कुलदीप शर्मा ने जिस भूपेंद्र हुड्डा के गुणगान में 15 साल तक कोई कोर कसर नहीं रखी, उन्हीं भूपेंद्र हुड्डा की की सरपरस्ती में एक “समोसा मैंन” को सबसे बड़े ब्राह्मण नेता का रुतबा दे दिया गया है।
भूपेंद्र हुड्डा और कुलदीप शर्मा का 15 साल तक बेहद करीबी रिश्ता रहा।
2004 में कांग्रेस से बगावत करके करनाल लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने पर कुलदीप शर्मा को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
भूपेंद्र हुड्डा ने मुख्यमंत्री बनने के बाद बिना माफी मांगे भी कुलदीप शर्मा की 2006 में न केवल कांग्रेस में एंट्री करवा दी बल्कि इसके साथ-साथ उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष भी बना दिया।
कुलदीप शर्मा को उसके बाद भूपेंद्र हुड्डा ने 2009 में गन्नौर विधानसभा सीट से विधायक भी बनवा दिया।
कुलदीप शर्मा की भक्ति से भूपेंद्र हुड्डा इतना प्रसन्न हुए की पहली बार विधायक बनने के बावजूद उन्हें विधान सभा का स्पीकर बना दिया।
भूपेंद्र हुड्डा ने इसके बाद 2014 में भी कुलदीप शर्मा को गन्नौर से विधायक बनवाया।
कुलदीप शर्मा पर भूपेंद्र हुड्डा इतना “लट्टू” हो गए थे कि 2019 के लोकसभा चुनाव में करनाल से टिकट मांग रहे अरविंद शर्मा की दावेदारी को “खारिज” करके कुलदीप शर्मा को टिकट थमा दी।
यह अलग बात है कि अरविंद शर्मा को टिकट नहीं देने का भारी “खामियाजा” भूपेंद्र हुड्डा को भुगतना पड़ा क्योंकि अरविंद शर्मा कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और भूपेंद्र हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा को 15 दिन में रोहतक लोकसभा सीट पर “चित्त” कर दिया।
भूपेंद्र हुड्डा को “खुश” करने के लिए 15 साल के दौरान कुलदीप शर्मा ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।
एक तरह से कुलदीप शर्मा भूपेंद्र हुड्डा के “भौंपू” के तौर पर काम करते रहे। तरक्की पर तरक्की मिलने के कारण कुलदीप शर्मा को यह “गुमान” हो गया कि ब्राह्मण नेता के तौर पर सिर्फ भूपेंद्र हुड्डा सिर्फ उन्हीं को “तरजीह” देते हैं।
विनोद शर्मा के साथ रिश्तेदारी और भूपेंद्र हुड्डा के साथ यारी के चक्कर में कुलदीप शर्मा ने खुद को सबसे बड़ा ब्राह्मण नेता होने का “गुमान” पाल लिया लेकिन कुलदीप शर्मा को यह नहीं मालूम था कि भूपेंद्र हुड्डा ने हमेशा उनको सिर्फ “इस्तेमाल” किया है।
भूपेंद्र हुड्डा ने चार कारणों से कुलदीप शर्मा पर कृपा बरसाई…
1-भूपेंद्र हुड्डा ने कुलदीप शर्मा को कांग्रेस में कार्यकारी अध्यक्ष इसलिए बनाया ताकि वे भजनलाल के खिलाफ खुलकर अंट-शंट बोल सकें।
2-भूपेंद्र हुड्डा ने कुलदीप शर्मा को गन्नौर से इसलिए चुनाव लड़ वाया ताकि जितेंद्र मलिक का सियासी “खात्मा” कर सकें।
3-भूपेंद्र हुड्डा ने कुलदीप शर्मा को विधानसभा स्पीकर इसलिए बनाया ताकि कुलदीप बिश्नोई के विधायकों के “पाला-बदल” के मामले को लंबा खींच सकें।
4-भूपेंद्र हुड्डा ने कुलदीप शर्मा को करनाल से चुनाव लोकसभा चुनाव इसलिए लड़वाया ताकि अरविंद शर्मा को “ठिकाने” लगा सकें।
यह सारे काम होने के बाद भूपेंद्र हुड्डा ने चुपचाप से कुलदीप शर्मा को भी “ठिकाने” लगा दिया और उन्हें गन्नौर सीट पर विधानसभा चुनाव “हरवा” दिया।
कुलदीप शर्मा को इस बात का एहसास भी नहीं हुआ कि भूपेंद्र हुड्डा ने उनको “निपटा” दिया है।
वह पूरी “शिद्दत” के साथ भूपेंद्र हुड्डा का गुणगान करते रहे लेकिन कुलदीप शर्मा को सबसे बड़ा झटका 3 दिन पहले उस समय लगा जब पार्टी के संगठन में ब्राह्मणों के चेहरे के तौर पर उनकी बजाय भूपेंद्र हुड्डा ने जितेंद्र भारद्वाज को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया।
सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि भूपेंद्र हुड्डा ने कार्यकारी अध्यक्ष के लिए कुलदीप शर्मा का नाम भी नहीं भेजा।
कुलदीप शर्मा एक तरफ दो बार विधायक होने के अलावा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और स्पीकर के तौर पर ब्राह्मणों में खुद के हेविवेट नेता होने की गलतफहमी पाले रहे और दूसरी तरफ भूपेंद्र हुड्डा ने जितेंद्र भारद्वाज को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की हरी झंडी दिखा दी।
जितेंद्र भारद्वाज की सबसे बड़ी उपलब्धि भूपेंद्र हुड्डा की कोठी पर समोसे, सब्जियां और दूसरा सामान पहुंचाने की रही है।
भूपेंद्र हुड्डा के राज में जितेंद्र भारद्वाज गुड़गांव के रियल स्टेट मालिकों के साथ एजेंट के तौर पर काम करके भरोसे के लोगों में शामिल हो गए।
भूपेंद्र हुड्डा की रसोई से बेडरूम तक पैठ बनाने के बाद सियासत की बारीकी को समझ गए जितेंद्र भारद्वाज ने प्रियंका गांधी के किचन में भी एंट्री मार ली और उनके बलबूते पर कार्यकारी अध्यक्ष पद का चौका मार दिया।
भूपेंद्र हुड्डा के घर में समोसे की “सेवा” के जरिए एंट्री मारकर जितेंद्र भारद्वाज तो कार्यकारी अध्यक्ष का “मेवा” पा गए हैं लेकिन भूपेंद्र हुड्डा के लिए सब कुछ करने वाले कुलदीप शर्मा “सड़क” पर आ गए हैं।
ब्राह्मण नेता के तौर पर जितेंद्र भारद्वाज को चेहरा बनने से ब्राह्मण राजनीति में कुलदीप शर्मा का “वजूद” एक झटके में खत्म हो गया है।
अब देखना यह है कि कुलदीप शर्मा क्या अब भी भूपेंद्र हुड्डा के लिए भौंपू के तौर पर कार्य करते रहेंगे या नहीं….!
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