डीसी ऑफिस का क्लर्क 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार एसीबी ने बिछाया था जाल
क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी करने के नाम पर मांगे थे 50 हजार रुपये, शिकायत पर हुई कार्रवाई
रणबीर सिंह/सोनीपत/23 जून 2026
भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने सोनीपत जिला प्रशासनिक कार्यालय में तैनात सेल्स ब्रांच के एक क्लर्क को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी क्लर्क को तहसीलदार कार्यालय के पास बने कमरे में ट्रैप लगाकर पकड़ा गया। एसीबी की कार्रवाई के बाद प्रशासनिक कार्यालय परिसर में हड़कंप मच गया।एसीबी टीम ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। टीम ने रिश्वत की राशि बरामद करने के साथ ही मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आरोपी को अदालत में पेश कर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
शिकायतकर्ता विमल किशोर ने एसीबी को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी करने के नाम पर सेल्स ब्रांच में तैनात क्लर्क सचेत ने उससे 50 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायत के आधार पर एसीबी ने योजना बनाकर ट्रैप लगाया और जैसे ही आरोपी ने 30 हजार रुपये की रिश्वत राशि ली, टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सरकारी कार्यालयों में आम लोगों के कार्यों को कराने के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं और कई बार रिश्वत की मांग की जाती है।
विमल किशोर का कहना है कि उनका परिवार देश विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आकर सोनीपत में पुनर्वासित हुआ था। उस समय विभागों की ओर से आवंटन और क्लीयरेंस से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध करवाए गए थे। अब संपत्ति की रजिस्ट्री करवाने के लिए क्लीयरेंस सर्टिफिकेट की आवश्यकता पड़ रही है, लेकिन पुराने रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुराने दस्तावेजों की जानकारी के लिए कई बार रोहतक और पंजाब के लुधियाना तक संपर्क करना पड़ता है। इसके बावजूद रिकॉर्ड मिलने में काफी परेशानी आती है।
शिकायतकर्ता ने नगर निगम और तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि कई मामलों में लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रिकॉर्ड अपडेट करवाने और दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी कराने में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई बार जरूरी दस्तावेज होने के बावजूद फाइलों को आगे नहीं बढ़ाया जाता और लोगों पर दबाव बनाया जाता है। विमल किशोर ने आरोप लगाया कि कई मामलों में नगर निगम की ओर से पुराने अलॉटमेंट लेटर की मांग की जाती है, जबकि ऐसे दस्तावेज वर्षों पुराने रिकॉर्ड में आसानी से उपलब्ध नहीं होते। उनका आरोप है कि आम लोगों को रिकॉर्ड के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार एसीबी टीम ने तहसीलदार कार्यालय के पास स्थित कमरा नंबर-11 में कार्रवाई की। यहां सेल्स ब्रांच में तैनात कस्टोडियन क्लर्क को रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। कार्रवाई के दौरान टीम ने कमरे का दरवाजा बंद कर जांच की और आवश्यक साक्ष्य जुटाए। एसीबी अधिकारियों ने गिरफ्तारी के बाद पूछताछ की और रिश्वत लेने से जुड़े साक्ष्य एकत्र किए। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। शिकायत मिलने पर जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। गिरफ्तार क्लर्क को अदालत में पेश कर मामले में आगे जांच की जाएगी।


