जनभागीदारी ही परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति: खट्टर के आह्वान पर हरियाणा के 72 गांवों में मानसून पौधारोपण अभियान
जनभागीदारी ही किसी भी सामाजिक परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति : केन्द्रीय मंत्री खट्टर
हरियाणा के 72 गांवों में एक साथ चला मानसून अभिनन्दन पौधारोपण अभियान 2026
रणबीर सिंह रोहिल्ला/04 जुलाई 2026 /सोनीपत।
विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के उपलक्ष्य में तथा केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर के जन्मदिवस से प्रारंभ किए गए पर्यावरण संरक्षण अभियान के अंतर्गत आज हरियाणा के 72 गांवों में एक साथ मानसून अभिनन्दन पौधारोपण अभियान पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अभियान से प्रदेशभर के 200 से अधिक स्थानों से लोग ऑनलाइन एवं प्रत्यक्ष रूप से जुड़े। अभियान के दौरान हजारों की संख्या में पौधे लगाए गए तथा सैकड़ों नागरिकों, युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संगठनों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम में मनोहर लाल खट्टर अपने नई दिल्ली स्थित आवास से ऑनलाइन जुड़े और सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के सामने अनेक ऐसी चुनौतियां हैं, जिनका स्थायी समाधान केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी ही किसी भी सामाजिक परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में आवश्यक ऑक्सीजन की पूर्ति के लिए कम से कम 15 से 20 पौधे अवश्य लगाने चाहिए। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि केवल पौधारोपण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों के वृक्ष बनने तक उनका संरक्षण और नियमित देखभाल करना भी प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
मनोहर लाल ने दादा कुशल सिंह दहिया के अद्वितीय बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि महान विभूतियों के आदर्श हमें समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों के निर्वहन की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से अपने तथा परिवार के प्रत्येक सदस्य के जन्मदिवस पर पौधारोपण को एक परंपरा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए “एक पेड़ मां के नाम” अभियान का उल्लेख करते हुए अधिक से अधिक लोगों को इससे जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की अपील की।
मुख्यमंत्री हरियाणा के ओएसडी वीरेंद्र बढ़खालसा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है। हमारी परंपरा में दिन की शुरुआत धरती माता को प्रणाम करने से होती है, वृक्षों की पूजा की जाती है और फूल-पत्तों से देवी-देवताओं की आराधना की जाती है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे समाज अपनी सनातन सांस्कृतिक परंपराओं से दूर होता गया, प्रकृति के साथ उसका जुड़ाव भी कमजोर पड़ता गया।
इसका परिणाम आज घटते भूजल स्तर, नदियों में कम होता जल, बढ़ते वायु प्रदूषण, बिगड़ते मृदा स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों के रूप में हमारे सामने है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपनी प्रकृति-आधारित जीवनशैली और सांस्कृतिक मूल्यों की ओर पुनः लौटें। छोटे-छोटे व्यक्तिगत प्रयास भी बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।
यदि केवल 300 परिवार प्रतिदिन 20 लीटर पानी की बचत करें, तो एक महीने में लगभग 1.80 लाख लीटर जल संरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक पौधे लगाकर उनका संरक्षण करें तथा “एक पेड़ मां के नाम” और “हरित हरियाणा–स्वच्छ हरियाणा” के संकल्प को जन-आंदोलन बनाएं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक अपने परिवार, गांव और समाज तक पर्यावरण संरक्षण का यह संदेश पहुंचाए, ताकि सामूहिक प्रयासों से हरियाणा को हरित, स्वच्छ और जल-संपन्न बनाया जा सके। यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
हजारों पौधों के रोपण के साथ यह संदेश भी दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सतत जनभागीदारी से जुड़ा राष्ट्रीय दायित्व है। अभियान में शामिल सभी प्रतिभागियों ने हरित, स्वच्छ और समृद्ध हरियाणा के निर्माण के लिए पौधारोपण एवं पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया।

