जर्मनी के गार्टनरप्लात्ज़ थिएटर से हिंदुओं की मांग: ‘लक्मे’ ओपेरा का मंचन बंद करें, यह हिंदू संस्कृति का अपमान है
दिल्ली /01 जुलाई 2026 /अटल हिन्द ब्यूरो
अमेरिका में रहने वाले प्रमुख हिंदू नेता राजन ज़ेड ने जर्मनी के म्यूनिख स्थित ‘गार्टनरप्लात्ज़ थिएटर’ से मांग की है कि वे साल 2027 में होने वाले ‘लक्मे’ (Lakmé) ओपेरा के शो रद्द कर दें। यह ओपेरा मार्च और अप्रैल 2027 में मंचित होने वाला है।
राजन ज़ेड का कहना है कि यह ओपेरा हिंदू धर्म और उसकी परंपराओं का मजाक उड़ाता है। उन्होंने कहा कि गार्टनरप्लात्ज़ जैसे प्रतिष्ठित थिएटर को दूसरों की संस्कृति को गलत तरीके से पेश नहीं करना चाहिए। ज़ेड के मुताबिक, यह ओपेरा 19वीं सदी की पुरानी और संकुचित सोच को दर्शाता है, जो एक समृद्ध सभ्यता का अपमान है।
उन्होंने थिएटर के अधिकारियों से इस गलत चयन के लिए माफी मांगने की बात भी कही है। ज़ेड ने कहा कि थिएटर को ऐसी प्रस्तुति चुनने से पहले जिम्मेदारी दिखानी चाहिए थी, जो पश्चिमी नजरिए से पूर्वी संस्कृति का मजाक उड़ाती है। उनके अनुसार, यह ओपेरा उपनिवेशवादी सोच, नस्लीय रूढ़ियों (stereotypes) और हिंदू देवी-देवताओं व परंपराओं को गलत तरीके से दिखाने के लिए जानी जाती है, जो आज के समय में बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।
राजन ज़ेड ने थिएटर के आर्टिस्टिक डायरेक्टर जोसेफ ई. कोप्लिंगर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर इनका अल्ब्रेक्ट को सुझाव दिया है कि वे अपनी चयन प्रक्रिया में सुधार करें और अपने कर्मचारियों को ‘सांस्कृतिक संवेदनशीलता’ (cultural sensitivity) का प्रशिक्षण दें ताकि भविष्य में ऐसी गलती न हो।
बता दें कि ‘लक्मे’ ओपेरा 1883 में पेरिस में पहली बार पेश किया गया था। राजन ज़ेड का मानना है कि 21वीं सदी में इस तरह के पुराने और आपत्तिजनक ओपेरा को हमेशा के लिए बंद कर देना चाहिए। यह ओपेरा लियो डेलाइब्स द्वारा संगीतबद्ध है और इसकी कहानी 19वीं सदी के भारत पर आधारित है।

