क्या बैंकिंग सिस्टम के अंदर से हुआ सबसे बड़ा घोटाला? 645 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस ने मचाया हड़कंप/breaking-ed-investigation-india
चंडीगढ़ 645 करोड़ घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, बैंकिंग सिस्टम में मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा
चंडीगढ़/ 13 मई /अटल हिन्द ब्यूरो/राजकुमार अग्रवाल /एजेंसी आईडब्ल्युएनए
ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने चंडीगढ़ जोन में एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा करते हुए बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े दो पूर्व कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है।
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यह मामला हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ व पंचकूला स्थित कुछ निजी स्कूलों के बैंक खातों से जुड़े करीब 645 करोड़ रुपये के कथित गबन और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित बताया जा रहा है। जांच एजेंसी ने इस पूरे प्रकरण को सार्वजनिक धन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का गंभीर मामला माना है।
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार यह कार्रवाई IDFC First Bank से जुड़े दो पूर्व कर्मचारियों रिभव ऋषि और अभय कुमार की गिरफ्तारी के बाद सामने आई है। दोनों को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया है। ईडी का दावा है कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि बैंक खातों से करोड़ों रुपये की राशि संदिग्ध तरीके से निकाली गई और उसे अलग-अलग चैनलों के माध्यम से घुमाकर निजी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया।
कैसे हुआ कथित 645 करोड़ का गबन
ईडी की जांच रिपोर्ट के अनुसार यह पूरा घोटाला बैंकिंग सिस्टम के भीतर मौजूद कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया। आरोप है कि रिभव ऋषि ने अपने निजी सहायक और ड्राइवर के नाम पर दो शेल कंपनियां—कैपको फिनटेक सर्विसेज और आरएस ट्रेडर—तैयार कीं। इन कंपनियों को केवल कागजों पर सक्रिय दिखाया गया, जबकि असल में इनका इस्तेमाल पैसे के लेन-देन और मनी ट्रेल को छिपाने के लिए किया गया।
वहीं दूसरे आरोपी अभय कुमार पर आरोप है कि उसने अपनी पत्नी और साले के नाम पर स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स नाम की एक फर्जी कंपनी बनाई। ईडी के अनुसार इन कंपनियों के जरिए सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों के खातों से बड़ी मात्रा में धनराशि ट्रांसफर की गई और बाद में उसे कई लेयर में घुमाकर असली स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई।
सरकारी खातों से कैसे निकला पैसा/banking-fraud-news-chandigarh
जांच एजेंसी के मुताबिक यह धनराशि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ व पंचकूला के कुछ निजी स्कूलों के खातों से संबंधित थी। शुरुआती जांच में यह संकेत मिला है कि बैंकिंग सिस्टम में मौजूद आंतरिक पहुंच और प्रक्रिया की कमजोरियों का फायदा उठाकर यह ट्रांजैक्शन किए गए।
ईडी अब यह जांच कर रही है कि यह पैसा किन खातों से निकला, किन माध्यमों से आगे बढ़ा और अंततः किन-किन व्यक्तियों या संपत्तियों तक पहुंचा। एजेंसी का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआती चरण की जानकारी है और वास्तविक मनी ट्रेल अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है।
शेल कंपनियों का नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग
ईडी अधिकारियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में शेल कंपनियों की भूमिका बेहद अहम रही। शेल कंपनियां ऐसी फर्में होती हैं जिनका वास्तविक व्यवसाय नहीं होता, लेकिन कागजों पर इन्हें सक्रिय दिखाकर वित्तीय लेन-देन किया जाता है।
इस मामले में आरोप है कि इन कंपनियों के जरिए पैसा एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किया गया, ताकि असली स्रोत को छुपाया जा सके। इसके बाद इस रकम को अलग-अलग निवेश और लेन-देन के माध्यम से वैध धन के रूप में दिखाने की कोशिश की गई। यही प्रक्रिया मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आती है, जिसकी जांच PMLA के तहत की जा रही है।
गिरफ्तारी और कोर्ट की कार्रवाई
ईडी ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों को 21 मई तक 10 दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया है। इस दौरान एजेंसी उनसे गहन पूछताछ कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क, अन्य संलिप्त लोगों और धन के अंतिम उपयोग का पता लगाया जा सके।
जांच एजेंसी का कहना है कि यह संभव है कि इस घोटाले में केवल बैंक कर्मचारी ही नहीं बल्कि कुछ बाहरी वित्तीय सलाहकार, कंपनी ऑपरेटर और अन्य बिचौलिए भी शामिल हों। इसलिए जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
किन बिंदुओं पर चल रही है जांच
ईडी की जांच फिलहाल तीन प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित है—पहला, सरकारी और प्रशासनिक खातों से पैसे की निकासी कैसे हुई; दूसरा, इस धन को किन-किन कंपनियों और खातों में ट्रांसफर किया गया; और तीसरा, इस पैसे से किन संपत्तियों या निवेशों को खरीदा गया।
एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या इस पूरे घोटाले में सिस्टम के भीतर किसी और स्तर पर मिलीभगत थी। बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजैक्शन और आंतरिक लॉग्स की भी गहन जांच की जा रही है।
वित्तीय सिस्टम पर बड़ा सवाल
इस मामले ने बैंकिंग और सरकारी वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रारंभिक आरोप सही साबित होते हैं, तो यह देश के बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जाएगा, जिसमें सार्वजनिक धन को बैंकिंग तंत्र के भीतर से ही कथित रूप से निकाला गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में तकनीकी निगरानी, ऑडिट सिस्टम और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि सिस्टम कमजोर हो, तो शेल कंपनियों और फर्जी ट्रांजैक्शन के जरिए बड़े घोटाले संभव हो जाते हैं।
आगे क्या होगा
फिलहाल ईडी दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और उनके डिजिटल डेटा, बैंक रिकॉर्ड और संपर्कों की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
जांच एजेंसी का लक्ष्य पूरे मनी ट्रेल को जोड़कर यह स्पष्ट करना है कि 645 करोड़ रुपये की यह राशि आखिरकार कहां-कहां गई और इसका अंतिम लाभ किसे मिला। यह मामला अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसके दायरे और गहराई को देखते हुए यह आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है।

