अंगदानी अर्शदीप सिंह बना प्रेरणा स्रोत,
पुनीत महाजन चंडीगढ़ स्मृति में गांव कांगड़, नूरपुर, जिला रूपनगर में रक्तदान व अंगदान शिविर आयोजित
नूरपुर बेदी (रूपनगर), 1 मार्च:
गांव कांगड़, निकट नूरपुर बेदी (जिला रूपनगर) में कमांड अस्पताल (पश्चिमी कमान), चंडीमंदिर –
भारतीय सेना द्वारा उत्तरी भारत की अंगदान संस्था रोटो के सहयोग से अंगदानी स्वर्गीय अर्शदीप सिंह (पुत्र सूबेदार नरेश कुमार, भारतीय सेना) की पावन स्मृति में रक्तदान एवं अंगदान जागरूकता शिविर का आयोजन समूह गांववासी तथा अर्शदीप वेलफेयर सभा दोबारा किया गया जिसमें क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, युवाओं और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर इस पुनीत कार्य का समर्थन किया।
ज्ञात हो कि फरवरी 2025 में एक दुखद सड़क दुर्घटना के बाद अर्शदीप सिंह को चिकित्सकों द्वारा ब्रेन डेड घोषित किया गया था। अत्यंत कठिन समय में उनके परिवार ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए 16 फरवरी 2025 को अंगदान का महान निर्णय लिया, जिसके माध्यम से छह जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिला। अर्शदीप सिंह का यह बलिदान आज समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है और लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक कर रहा है।
शिविर के दौरान रक्तदान के साथ-साथ अंगदान जागरूकता पर विशेष जोर दिया गया। उपस्थित लोगों को अंगदान की प्रक्रिया, उसके महत्व तथा उससे बचाई जा सकने वाली जिंदगियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि एक अंगदाता कई लोगों को जीवनदान दे सकता है और अंगदान मानवता की सर्वोच्च सेवा है।
इस अवसर पर परवीन कुमार रत्तन, एकाउंट्स ऑफिसर इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट चंडीगढ़ (लिवर प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ता) तथा उनकी पत्नी श्रीमती रूपा अरोड़ा, अध्यापिका सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर 37- बी, चंडीगढ़ और जीवित लिवर दाता, ने अपने जीवन के प्रेरणादायक अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए। उन्होंने बताया कि अंगदान किसी व्यक्ति को जीवन का दूसरा अवसर देता है और दाता तथा दाता परिवार समाज के सच्चे नायक होते हैं। उन्होंने कहा कि “हम स्वयं जीवंत प्रमाण हैं कि अंगदान जीवन बचाता है।” उन्होंने लोगों से अपील की कि अधिक से अधिक लोग अंगदान के प्रति जागरूक बनें और इस पुनीत कार्य से जुड़ें।
इस अवसर पर प्रवीण कमार रतन ने रोटरी क्लब द्वारा प्रकाशित अंगदान जागरूकता पुस्तक दाता परिवार को भेंट कर सम्मानित किया गया तथा भविष्य की पीढ़ियों में अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि जहां रक्तदान से तुरंत किसी की जान बचाई जा सकती है, वहीं अंगदान से कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है। उन्होंने लोगों से नियमित रक्तदान करने तथा अंगदान का संकल्प लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में सूबेदार नरेश कुमार एवं उनके साहसी दाता परिवार को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया तथा भारतीय सेना और सभी अंगदाताओं एवं दाता परिवारों के योगदान की सराहना की गई।
शिविर के दौरान यह संदेश दिया गया कि
“रक्तदान करें — आज जीवन बचाएं,
अंगदान का संकल्प लें — हमेशा जीवन बचाएं।”
एक दाता अनेक जीवन बचा सकता है और एक दाता परिवार पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन सकता है।


