नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा, कोर्ट ने कहा- मासूम की जिंदगी तबाह करने से पहले नहीं सोचा
फतेहाबाद / 25 मई /अटल हिन्द ब्यूरो/ योगेश खनेजा
नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के मामले में फतेहाबाद की अदालत ने आरोपी को कठोर सजा सुनाते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 2 लाख रुपये जुर्माने से दंडित किया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अमित गर्ग की अदालत ने आरोपी विक्रम उर्फ रोकी को दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया।
अदालत ने आरोपी को धारा 363 आईपीसी के तहत 7 वर्ष कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना, धारा 366 आईपीसी के तहत 10 वर्ष कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना, धारा 4(2) पॉक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 6 पॉक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने आदेश दिया कि कुल 2 लाख रुपये जुर्माने में से 1 लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा करवाए जाएं, जबकि 1 लाख रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिए जाएं।
जिला न्यायवादी देवेंद्र मित्तल के अनुसार, 28 जून 2024 को थाना सदर फतेहाबाद में शिकायत दर्ज करवाई गई थी कि शिकायतकर्ता की नाबालिग पुत्री घर से लापता है और किसी युवक द्वारा उसे बहला-फुसलाकर ले जाने का संदेह है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने धारा 363 और 366 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान 31 जुलाई 2024 को नाबालिग बालिका को राजस्थान से सुरक्षित बरामद किया गया। मामले में आरोपी विक्रम उर्फ रोकी की संलिप्तता सामने आने पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। मेडिकल रिपोर्ट, पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे में धारा 376 आईपीसी और पॉक्सो एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में मजबूत गवाही और भौतिक साक्ष्य पेश किए, जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई।
फैसला सुनाते समय अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी ने नाबालिग पीड़िता की जिंदगी बर्बाद करने से पहले एक पल के लिए भी नहीं सोचा।
मामले में थाना सदर फतेहाबाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर प्रभावी पैरवी के चलते आरोपी को कठोर सजा दिलाने में सफलता मिली।


