जिले में एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति का गठन
उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति विभिन्न प्रकार के कचरे के प्रभावी प्रबंधन की करेगी निगरानी
ठोस, प्लास्टिक, जैव-चिकित्सा, औद्योगिक एवं निर्माण कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर रहेगा विशेष फोकस
विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर सुनिश्चित किया जाएगा प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन
पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
रणबीर सिंह रोहिल्ला/सोनीपत।
जिले में विभिन्न प्रकार के अपशिष्टों के प्रभावी प्रबंधन एवं पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उपायुक्त की अध्यक्षता में एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति ठोस कचरा, प्लास्टिक कचरा, जैव-चिकित्सा कचरा, औद्योगिक कचरा, निर्माण एवं विध्वंस कचरा सहित अन्य अपशिष्ट श्रेणियों के वैज्ञानिक एवं नियमानुसार प्रबंधन को सुनिश्चित करेगी।
उपायुक्त नेहा सिंह ने बताया कि यह समिति विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर जिले में अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में कार्य करेगी। समिति के गठन का उद्देश्य पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 तथा विभिन्न अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत निर्धारित प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि समिति में नगर निगम आयुक्त, पुलिस विभाग के प्रतिनिधि, जिला नगर आयुक्त, औद्योगिक कचरा प्रबंधन के लिए जिला उद्योग केंद्र तथा एमएसएमई के संयुक्त निदेशक, जैव चिकित्सा कचरा प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य विभाग से सीएमओ, निर्माण एवं विध्वंस कचरा प्रबंधन के लिए लोक निर्माण विभाग व एचएसवीपी के अधीक्षक अभियंता, एचएसआईआईडीसी के इंजीनियरिंग इंचार्ज, एचएसएएमबी के कार्यकारी अभियंता, एचएसएएमबी गन्नौर अंतरराष्ट्रीय फल व सब्जी मंडी के कार्यकारी अभियंता, कृषि एवं बागवानी कचरा प्रबंधन के लिए
कृषि विभाग के उप-निदेशक व जिला बागवानी अधिकारी, पशु गोबर कचरा प्रबंधन के लिए पशुपालन विभाग के उपनिदेशक, प्लास्टिक पैकेजिंग और आपूर्ति श्रृंखला निरीक्षण के लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, नगर परिषदों एवं नगरपालिकाओं के ईओ/सचिवों तथा फल, सब्जी कचरा प्रबंधन के लिए मार्केट कमेटी सोनीपत, गोहाना, खरखौदा, गन्नौर के सचिवों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त औद्योगिक संगठनों, मार्केट एसोसिएशन, आवासीय कल्याण संघ (आरडब्ल्यूए), औद्योगिक संघों, बाजार संघों तथा अधिकृत कचरा प्रसंस्करणकर्ताओं एवं रिसाइक्लर्स के प्रतिनिधियों को भी समिति में आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा, जिससे व्यापक स्तर पर सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने बताया कि समिति जिले में विभिन्न प्रकार के कचरे के सेपरेशन, संग्रहण, परिवहन एवं वैज्ञानिक निस्तारण को सुनिश्चित करेगी। साथ ही गैर-नगरपालिका कचरे को नगर निगम के ठोस कचरे में अवैध रूप से मिलाने की गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जाएगी। समिति प्रदूषण नियंत्रण के सिद्धांत “प्रदूषक भुगतान करे” के तहत कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों एवं व्यक्तियों की जिम्मेदारी तय करेगी।
उन्होंने बताया कि अवैध डंपिंग, अनियमित कचरा प्रबंधन एवं पर्यावरण मानकों के उल्लंघन के मामलों में संबंधित प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। बड़े स्तर पर नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थानों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 एवं अन्य संबंधित नियमों के अंतर्गत प्रवर्तन कार्रवाई भी की जाएगी।
उपायुक्त ने बताया कि समिति को यह भी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 तथा अन्य संबंधित नियमों का पूर्ण पालन किया जाए। इसके माध्यम से शहरी स्थानीय निकायों पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय भार को कम करने तथा गैर-नगरपालिका कचरे के अनुचित निस्तारण को रोकने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यह समिति प्रत्येक माह कम से कम एक बैठक आयोजित करेगी, जिसमें विभिन्न अपशिष्ट श्रेणियों के प्रबंधन, अनुपालन की स्थिति, प्रवर्तन कार्यवाही एवं विभागीय समन्वय की समीक्षा की जाएगी।
बैठक में लिए गए निर्णयों एवं अनुपालन रिपोर्ट को निदेशालय को भी भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों, संस्थानों एवं आमजन का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। प्रशासन द्वारा अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि जिले में स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को और अधिक मजबूत किया जा सके।


