पंजाब के सरकारी स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता पाठ्यक्रम शुरू, 3.4 लाख से अधिक छात्राओं को मिलेगा लाभ
चंडीगढ़ /30 मई/ अटल हिन्द ब्यूरो
किशोरियों के स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में पंजाब सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए बड़े पैमाने पर मासिक धर्म स्वच्छता पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया है।
मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर राज्य सरकार ने पंजाब के सभी 23 जिलों के सरकारी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में इस पाठ्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की घोषणा की। इसके तहत छठी से दसवीं कक्षा में अध्ययनरत 3.4 लाख से अधिक छात्राओं को लाभ मिलने की उम्मीद है। यह कार्यक्रम राज्य के 3,600 से अधिक सरकारी स्कूलों में संचालित किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किशोरियों को मासिक धर्म से जुड़ी सही जानकारी उपलब्ध कराना, मिथकों और सामाजिक झिझक को दूर करना तथा उन्हें आत्मविश्वास के साथ अपने स्वास्थ्य की देखभाल के लिए जागरूक बनाना है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मासिक धर्म किसी भी छात्रा की शिक्षा, स्कूल में भागीदारी या मानसिक आत्मविश्वास में बाधा न बने।
यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था वॉश यूनाइटेड के सहयोग से शुरू किया गया है। इसके तहत पंजाबी भाषा में तैयार किए गए विशेष शिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से छात्राओं को मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी जानकारी दी जाएगी। पाठ्यक्रम में कहानी आधारित शिक्षण, समूह चर्चा और सहभागितापूर्ण गतिविधियों को शामिल किया गया है, जिससे छात्राएं सहज वातावरण में विषय को समझ सकें।
पाठ्यक्रम में 10 वर्षीय काल्पनिक पात्र ‘रूबी’ की कहानी के माध्यम से किशोरियों को शारीरिक परिवर्तनों, स्वच्छता संबंधी आदतों और आत्मसम्मान के महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही स्कूलों में सहयोगी और संवेदनशील वातावरण विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए राज्य सरकार अब तक करीब 7,200 शिक्षकों को प्रशिक्षण दे चुकी है। इससे पहले लगभग 100 स्टेट रिसोर्स पर्सन्स को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया था, जिन्होंने विभिन्न जिलों में शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया। अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षित शिक्षक छात्राओं के लिए ऐसा सुरक्षित वातावरण तैयार करेंगे, जहां वे बिना किसी झिझक के अपने सवाल पूछ सकें।
राज्यव्यापी विस्तार से पहले इस कार्यक्रम का पायलट प्रोजेक्ट पंजाब के 100 से अधिक सरकारी स्कूलों में चलाया गया था, जिसमें 45 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। पायलट कार्यक्रम के नतीजे उत्साहजनक रहे। करीब 97 प्रतिशत शिक्षकों ने कहा कि वे नए पाठ्यक्रम के माध्यम से मासिक धर्म संबंधी शिक्षा देने में सहज महसूस करते हैं, जबकि 94 प्रतिशत शिक्षकों ने पूरे राज्य में इसके विस्तार की सिफारिश की।
शिक्षकों के अनुसार पाठ्यक्रम ने छात्राओं को माहवारी से जुड़े विषयों पर खुलकर बातचीत करने का अवसर दिया है। इससे न केवल मिथकों और गलत धारणाओं को दूर करने में मदद मिली, बल्कि छात्राओं के आत्मविश्वास और सहभागिता में भी वृद्धि देखी गई।
कार्यक्रम में भाग लेने वाली छात्राओं ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। कई छात्राओं ने कहा कि उन्हें यह समझने में मदद मिली कि मासिक धर्म एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है और इसके बारे में खुलकर बात करने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।
अधिकारियों का मानना है कि यह पहल केवल स्वास्थ्य जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि लड़कियों के लिए अधिक संवेदनशील, समावेशी और प्रगतिशील शिक्षा व्यवस्था तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का कहना है कि सरकारी स्कूलों में मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा को संस्थागत रूप देकर छात्राओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण को और मजबूती मिलेगी।
यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे व्यापक शिक्षा सुधार अभियान का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत स्कूलों के बुनियादी ढांचे, शिक्षक प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के कल्याण और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।


