सपनों को नहीं, हालात को हराया… गांव सग्गा की बेटी मुकुल राणा एसएसबी मे बनी काँस्टेबल
गांव सग्गा की बेटी बनी देश की प्रहरी, वर्दी पहन पूरा किया बचपन का सपना
राष्ट्रीय साइकिलिस्ट मुकुल राणा ने मेहनत और संघर्ष के दम पर पाई सफलता, गांव सग्गा में हुआ भव्य स्वागत
तरावड़ी/5 जुलाई 2026/ रोहित लामसर
तरावड़ी के निकटवर्ती गांव सग्गा की बेटी मुकुल राणा ने अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) में कांस्टेबल (सिपाही) के पद पर चयनित होकर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे गांव, जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है।
मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली मुकुल की यह सफलता आज क्षेत्र की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। एसएसबी में चयन के बाद जब मुकुल राणा अपने गांव पहुंचीं तो ग्रामीणों, युवाओं और उनके साइकिलिंग कोच ने फूल-मालाओं से उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पूरे गांव में खुशी का माहौल देखने को मिला और लोगों ने उनकी उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया।

24 वर्षीय मुकुल राणा राष्ट्रीय स्तर की साइकिलिस्ट हैं और साइकिलिंग में कई बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी हैं। खेलों में शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी रखी। वर्षों की कड़ी मेहनत और अनुशासित जीवनशैली का परिणाम रहा कि उनका चयन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के प्रतिष्ठित संगठन एसएसबी में हुआ।
मुकुल के पिता ऋषिपाल एक पेट्रोल पंप पर कर्मचारी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। उन्होंने बताया कि मुकुल बचपन से ही देश सेवा का सपना देखती थी। खेलों में उसकी रुचि और मेहनत को देखते हुए परिवार ने हर संभव सहयोग दिया। बेटी को बाहर भेजते समय चिंता जरूर रहती थी, लेकिन उसकी लगन और आत्मविश्वास ने आज पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
इस अवसर पर कोच कृष्ण ने कहा कि मुकुल की सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि आज के समय में मोबाइल की बढ़ती लत युवाओं का ध्यान भटका रही है, जबकि मुकुल ने खेल और अनुशासन को अपनाकर साबित किया है कि मेहनत और समर्पण से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
साइकिलिंग कोच ओंकार ने भी मुकुल को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उसने कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर पहले ही अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था और अब एसएसबी में चयनित होकर उसने क्षेत्र का गौरव और बढ़ा दिया है।
मुकुल राणा की सफलता इस बात का प्रमाण है कि आर्थिक परिस्थितियां कभी भी सपनों की राह में बाधा नहीं बनतीं। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता निश्चित रूप से कदम चूमती है।
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