हेट स्पीच और नफरत भरे गानों का बड़ा अड्डा बने यूट्यूब, स्पॉटिफाई और मेटा; करोड़ों लोग सुन रहे हिंसा भड़काने वाले गीत
नई दिल्ली / 01 जुलाई 2026 / अटल हिन्द ब्यूरो / राजकुमार अग्रवाल
भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों और ईसाइयों को निशाना बनाने वाले हेट स्पीच यानी नफरत भरे भाषणों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ‘इंडिया हेट लैब’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 के बाद से नफरत फैलाने वाली घटनाओं में 97% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इसी बीच ‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गेनाइज्ड हेट’ (CSOH) की एक नई रिपोर्ट ने एक खतरनाक चलन की ओर इशारा किया है, जो है- ‘नफरत का संगीत’ या जिसे ‘हिंदुत्व पॉप’ (H-Pop) कहा जा रहा है। ये गाने सीधे तौर पर हिंदुत्व की विचारधारा के नाम पर मुसलमानों और ईसाइयों को अपमानित करते हैं, उन्हें अमानवीय बताते हैं और बहुसंख्यक समाज में डर और नफरत का माहौल पैदा कर रहे हैं।
यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे यूट्यूब, स्पॉटिफाई, एप्पल म्यूजिक और मेटा (इंस्टाग्राम) जैसे बड़े टेक प्लेटफॉर्म्स इन नफरत भरे गानों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन गए हैं। इस अध्ययन में कुल 523 ऐसे गानों की पहचान की गई है, जो इन प्लेटफॉर्म्स की अपनी नीतियों का उल्लंघन करते हैं। इनमें से 210 गाने अकेले यूट्यूब पर हैं, जिन्हें 19.8 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया है। वहीं, मेटा की म्यूजिक लाइब्रेरी में मौजूद गानों का इस्तेमाल 59 लाख से अधिक इंस्टाग्राम रील्स में किया गया है। चौंकने वाली बात यह है कि हर दो में से एक गाना सीधे तौर पर हिंसा के लिए उकसाता है।
रिपोर्ट में पाया गया कि ये प्लेटफॉर्म्स न केवल इन गानों को जगह दे रहे हैं, बल्कि इनके जरिए कमाई का जरिया भी बना रहे हैं। हेट म्यूजिक वाले यूट्यूब वीडियो पर 103 बड़े ब्रांड्स के विज्ञापन चले हैं, जिनमें गूगल, अमेज़न प्राइम और डेल जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में जब 225 ऐसे आपत्तिजनक गानों की शिकायत इन कंपनियों से की गई, तो मई 2026 तक इनमें से सिर्फ 18 गाने ही हटाए गए, यानी कार्रवाई की दर मात्र 8% रही।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई गायक या चैनल नफरत फैलाता है, तो प्लेटफॉर्म्स या तो मूकदर्शक बने रहते हैं या फिर कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति करते हैं। अगर किसी का अकाउंट बंद भी कर दिया जाए, तो वह तुरंत नया चैनल बनाकर फिर से वही नफरत फैलाने लगता है। जैसे, गायक संदीप आचार्य के अकाउंट को कम से कम तीन बार सस्पेंड किया गया, लेकिन उनके 26 में से 21 आपत्तिजनक गाने अब भी दूसरे चैनलों के माध्यम से यूट्यूब पर उपलब्ध हैं।
अंत में, रिपोर्ट इन टेक कंपनियों को चेतावनी देती है कि उनकी यह लापरवाही ऑफलाइन दुनिया में हिंसा और कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रही है। इन प्लेटफॉर्म्स को अपनी कंटेंट पॉलिसी को सख्ती से लागू करने और शिकायत निवारण तंत्र (reporting mechanism) को बेहतर बनाने की तत्काल आवश्यकता है ताकि नफरत के इस बाजार पर लगाम लगाई जा सके।

