योग विश्व को भारतीय परम्परा की एक अनमोल देनः प्रो. सोमनाथ सचदेवा
12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर कुवि में शिक्षकों, गैर-शिक्षक कर्मचारियों, विद्यार्थियों सहित योग साधकों ने किए योगासन
कुरुक्षेत्र/21 जून/अटल हिन्द ब्यूरो /शशि अरोड़ा
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि योग विश्व को भारतीय परम्परा की एक अनमोल देन है। सरल शब्दों में योग का अर्थ है जोड़ना, शरीर को मन के साथ, मन को आत्मा के साथ और आत्मा को परमात्मा के साथ। वे रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के न्यू मल्टी पर्पज हॉल में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में योग साधकों को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा द्वारा पौधारोपण भी किया गया।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के खेल निदेशालय और यूथ रेड क्रॉस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा की अगुवाई में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. ए.आर. चौधरी, खेल निदेशक प्रो. डी.एस.राणा, अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों व छात्र-छात्राओं ने योग की विभिन्न मुद्राओं के साथ आसन किए।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का लक्ष्य “योग युक्त, नशा मुक्त हरियाणा” बनाना है। आज के समय में युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो समाज और राष्ट्र के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में योग युवाओं को नशे से दूर रखने और उन्हें शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम है।
राज्य सरकार ने भी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए “योग युक्त, नशा मुक्त हरियाणा” थीम को अपनाया है। उन्होंने कहा कि योग सभी के लिए जरूरी है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को नियमित रूप से योग से जोड़ने के लिए एक प्रभावी एवं व्यवहारिक नीति तैयार की जाएगी, ताकि वे प्रतिदिन सुबह अथवा शाम योगाभ्यास कर सकें और शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक रूप से स्वस्थ रह सकें। योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि संतुलित एवं सकारात्मक जीवनशैली का आधार है।
प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरित करना अत्यंत आवश्यक है। नियमित योगाभ्यास विद्यार्थियों में अनुशासन, एकाग्रता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विकास करेगा तथा उन्हें नशे जैसी बुराइयों से दूर रखने में भी सहायक सिद्ध होगा।
इस उद्देश्य की सफलता के लिए शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा समाज के सभी वर्गों के सहयोग की आवश्यकता है। सामूहिक प्रयासों से ही योग युक्त, स्वस्थ एवं नशा मुक्त हरियाणा के संकल्प को साकार किया जा सकता है। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए योग संस्कृति को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में निरंतर कार्य करेगा।
इस मौके पर शारीरिक शिक्षा विभाग की योग शिक्षिका डॉ. रजनी बाली ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए निर्धारित विभिन्न योग क्रियाएं करवाई तथा प्रत्येक क्रिया के महत्व को समझाया। योगाभ्यास में सभी योग साधकों को ताडासन, वृक्षासन, अर्धचक्रासन, भद्र आसन, शशांकासन, कपालभाति, वक्रासन, भुजंगासन, श्वासन, अनुलोम-विलोम सहित विभिन्न योग क्रियाएं कराई गई।
खेल विभाग के निदेशक प्रो. डी.एस. राणा ने कहा कि योग भारत की प्राचीन एवं गौरवशाली विरासत है, जिसकी विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि योग के क्षेत्र में भारत का सदैव वर्चस्व रहा है। प्राचीन काल से लेकर वर्तमान समय तक योग ने विश्व को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जीने की राह दिखाई है।
आज भी भारत योग का वैश्विक नेतृत्व कर रहा है और भविष्य में भी यह नेतृत्व कायम रहेगा। उन्होंने विद्यार्थियों एवं युवाओं से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया, ताकि वे शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से सशक्त बन सकें। अंत में यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स काउंसिल के प्रधान डॉ. अमित टाया ने सभी का आभार प्रकट किया।
इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी, प्रो. डीएस राणा, प्रो. महाबीर रंगा, प्रो. परमेश कुमार, मुख्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. आनंद कुमार, प्रो. मुकेन्द्र कादियान, डॉ. अमित टाया, कोच राजेश राजौंद, कोच राजेश मेहला, मलकीत, शैलजा, रमेश, योगेश व योग साधकों सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं मौजूद थे।


