बाल मजदूरी करवाने वालों के खिलाफ की जाए सख्त कानूनी कार्रवाई
जिले में बाल मजदूरी पर रोक सुनिश्चित करें, बच्चों के अधिकारों से नहीं हो कोई समझौता
जरूरतमंद बच्चों को समय पर मिले आर्थिक, शैक्षणिक एवं चिकित्सा सहायता : नगराधीश
बच्चों के साथ शोषण और अत्याचार करने वालों के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत की जाए कड़ी कार्रवाई
सोनीपत/4 जून/अटल हिन्द /रणबीर सिंह रोहिल्ला,
सोनीपत। जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की बैठक लेती सीटीएम सिमरन।
नगराधीश सिमरन ने कहा कि बच्चों का बचपन सुरक्षित रखना समाज और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है। किसी भी बच्चे से मजदूरी करवाना कानूनन अपराध है और बाल मजदूरी जैसी सामाजिक बुराई को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि जिला में बाल मजदूरी पर पूर्णत: रोक सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण अभियान चलाया जाए तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों एवं संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाए।
जिले में बच्चों के अधिकारों की रक्षा, बाल मजदूरी की रोकथाम तथा जरूरतमंद बच्चों को बेहतर संरक्षण एवं पुनर्वास उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से गुरूवार को जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता नगराधीश सिमरन ने की।
बैठक में बच्चों के कल्याण से संबंधित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। नगराधीश ने कहा कि बच्चों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के शोषण, उत्पीडऩ अथवा अत्याचार के मामलों में तत्काल कार्रवाई की जाए। विशेष रूप से बच्चों के विरुद्ध अपराधों के मामलों में पोक्सो एक्ट के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जरूरतमंद एवं असहाय बच्चों को सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर, अनाथ एवं बेसहारा बच्चों के लिए सरकार द्वारा विभिन्न सहायता योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ पात्र बच्चों तक पहुंचाना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बेसहारा बच्चों को प्रति माह 4 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उनके पालन-पोषण, शिक्षा एवं अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलती है।
नगराधीश ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे पात्र बच्चों की पहचान कर उन्हें योजनाओं से जोड़ा जाए। नगराधीश ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा अत्यंत आवश्यक हैं। इसलिए जरूरतमंद बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं एवं आवश्यक चिकित्सा सहायता समय पर उपलब्ध करवाई जाए।
उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे को संसाधनों के अभाव में शिक्षा या स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। बैठक के दौरान जिले में संचालित बाल देखभाल संस्थानों, बाल गृहों तथा अन्य संरक्षण केंद्रों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई।
नगराधीश ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि संस्थानों में रह रहे बच्चों को भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं मनोरंजन सहित सभी मूलभूत सुविधाएं निर्धारित मानकों के अनुसार उपलब्ध करवाई जाएं। बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। इसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें और यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे।


