जगन गुर्जर की कहानी
धौलपुर (राजस्थान) 2 जुलाई 2026/अटल हिंद ब्यूरो
जगन कसाना (जगन गुर्जर)**… राजस्थान के धौलपुर और चंबल के बीहड़ों में यह नाम एक समय खौफ और चर्चा का दूसरा नाम हुआ करता था। चंबल के इतिहास में वैसे तो कई डकैत हुए, लेकिन जगन गुर्जर की कहानी थोड़ी अलग है। इसमें अपराध भी है, पुलिस के साथ चूहे-बिल्ली का खेल भी है, बार-बार सरेंडर करना भी है, और सबसे दिलचस्प बात—इस कहानी में उसका पूरा परिवार भी किसी न किसी रूप में शामिल रहा।
आइए, आम बोलचाल की भाषा में समझते हैं धौलपुर के इस ‘कुख्यात’ जगन गुर्जर और उसके परिवार की पूरी कहानी।
## कौन है जगन गुर्जर? (शुरुआती सफर)
धौलपुर जिले के बाड़ी इलाके के भवूतीपुरा गांव का रहने वाला जगन कसाना (गुर्जर) कोई पैदाइशी अपराधी नहीं था। लेकिन चंबल के उस इलाके की आबोहवा और आपसी रंजिशों ने उसे बंदूक उठाने पर मजबूर कर दिया।
* **अपराध की दुनिया में एंट्री:** 90 के दशक के आखिरी सालों में जगन ने जुर्म की दुनिया में कदम रखा। शुरुआत छोटी-मोटी वारदातों से हुई, लेकिन जल्द ही उसने अपना एक गैंग बना लिया।
* **इलाके में खौफ:** धौलपुर, करौली, भरतपुर और मध्य प्रदेश के मुरैना तक जगन गुर्जर के नाम की तूती बोलने लगी। फिरौती, अपहरण, डकैती और हत्या के दर्जनों मामले उसके सिर मढ़ दिए गए। सरकार ने उस पर लाखों रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया था।
## जगन गुर्जर और उसका परिवार: एक ‘पारिवारिक’ नेटवर्क
जगन गुर्जर की कहानी इसलिए भी अनोखी है क्योंकि उसके इस काले कारोबार में उसका परिवार हमेशा सुर्खियों में रहा। कहा जाता है कि जगन के गैंग को अंदरूनी और बाहरी सपोर्ट उसके अपने ही लोगों से मिलता था।
### 1. दो पत्नियां: कोमेश और ममता
जगन गुर्जर ने दो शादियां कीं, और उसकी दोनों पत्नियां सिर्फ घर संभालने तक सीमित नहीं रहीं:
* **कोमेश गुर्जर:** जगन की पहली पत्नी कोमेश गुर्जर का नाम राजनीति और अपराध दोनों में आया। जगन के खौफ और प्रभाव के दम पर कोमेश ने धौलपुर में पंचायत समिति का चुनाव भी जीता और प्रधान बनी। पुलिस रिकॉर्ड में भी उसके खिलाफ कुछ मामले दर्ज हुए।
* **ममता गुर्जर:** जगन की दूसरी पत्नी ममता भी कम चर्चा में नहीं रही। कई बार पुलिस ने ममता को जगन को पनाह देने और उसकी मदद करने के आरोप में हिरासत में लिया।
2. भाई और रिश्तेदार
जगन के भाई (जैसे लाल सिंह और अन्य) और करीबी रिश्तेदार भी उसके गैंग के सक्रिय सदस्य रहे या फिर पर्दे के पीछे से उसकी मदद करते रहे। चंबल के बीहड़ों में जब पुलिस जगन को ढूंढती थी, तो उसका यह पारिवारिक नेटवर्क उसे सुरक्षित ठिकाने और रसद (खाना-पानी) पहुंचाने का काम करता था।
## सरेंडर और फिर अपराध: एक अनोखा रिकॉर्ड
जगन गुर्जर की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि वह पुलिस के हत्थे चढ़ने के बजाय **’सरेंडर’** करने में माहिर था। उसने एक या दो बार नहीं, बल्कि कई बार भारी ड्रामे के साथ पुलिस या नेताओं के सामने आत्मसमर्पण किया।
* **मशहूर सरेंडर (2001 और 2009):** साल 2009 में जगन गुर्जर ने सचिन पायलट और तत्कालीन गहलोत सरकार के मंत्रियों के सामने बड़े नाटकीय अंदाज में सरेंडर किया था। तब लगा था कि वह सुधर जाएगा।
* **जेल से बाहर और फिर वही रास्ता:** जेल से छूटने के बाद जगन कुछ समय शांत रहता, लेकिन फिर किसी न किसी से दुश्मनी मोल ले लेता या कोई धमकी भरा वीडियो जारी कर देता।
## हाल के सालों का विवाद और ढलता रसूख
जैसे-जैसे वक्त बदला, पुलिस की सख्ती बढ़ी और चंबल के बीहड़ खाली होने लगे, जगन का रसूख भी कम होने लगा।
* **नेताओं को धमकी और वीडियो वायरल:** पिछले कुछ सालों में जगन गुर्जर जेल से बाहर आने के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करके नेताओं (जैसे कांग्रेस नेता रमेश मीणा) को खुली चुनौती देने के लिए चर्चा में आया।
* **पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई:** राजस्थान पुलिस ने जगन और उसके भाइयों के खिलाफ ‘ऑपरेशन क्लीन’ चलाया। उसके मकानों पर बुलडोजर चले, संपत्तियां कुर्क हुईं और उसके पूरे नेटवर्क को तोड़ दिया गया।
> **आज की स्थिति:** कभी बीहड़ों का राजा कहलाने वाला जगन गुर्जर अब बूढ़ा हो चला है और उसका अधिकांश समय कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने या जेल की सलाखों के पीछे ही बीतता है। उसका वह पुराना खौफ अब लगभग खत्म हो चुका है।
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जगन कसाना उर्फ जगन गुर्जर की कहानी चंबल के उस दौर की याद दिलाती है जहां बंदूक की नोक पर सियासत और धौंस जमाई जाती थी। लेकिन उसका और उसके परिवार का अंजाम यही सिखाता है कि अपराध की उम्र चाहे जितनी भी लंबी लगे, कानून के हाथ देर-सवेर व
हां तक पहुंच ही जाते हैं।

