कैथल: मानसून की दस्तक के साथ खुली ‘सफाई अभियान’ की पोल, लाखों के खर्च के बाद भी नहरें बनीं झाड़ियों का बसेरा
कैथल | 06 जुलाई 2026 | अटल हिन्द ब्यूरो
कैथल में मानसून के आगमन के साथ ही प्रशासन और नहरी विभाग के बाढ़ प्रबंधन के दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। कागजों में लाखों रुपये खर्च कर नहरों की सफाई का दावा करने वाले जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ‘कपिल मुनि माइनर’ की वर्तमान स्थिति इन दावों की कलई खोलने के लिए पर्याप्त है।
जमीनी हकीकत: कागजों में सफाई, मौके पर गाद और झाड़ियां नहरी विभाग के दावों से इतर, जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। कपिल मुनि माइनर में गाद, घास-फूस और घनी झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है। पुलियों के नीचे जमा कचरे ने पानी के प्राकृतिक बहाव को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है। मानसून की पहली बारिश के बाद नहरों की यह स्थिति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सफाई कार्य या तो केवल खानापूर्ति के लिए किए गए या फिर काम को बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया।
बढ़ रहा है बाढ़ और जलभराव का खतरा स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि नहरों की सफाई के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये का बंटाधार किया गया है, जबकि हकीकत में स्थिति जस की तस बनी हुई है। नहरों में जमा यह कचरा तेज बारिश के दौरान जल निकासी में बड़ी बाधा बनेगा, जिससे आसपास के रिहायशी इलाकों और खेतों में जलभराव व बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न
यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि विभागीय भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करती है। अब जनता निम्नलिखित सवालों के जवाब मांग रही है:
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कुंभकर्ण की नींद में विभाग: करोड़ों की बजट घोषणाओं के बावजूद नहरी विभाग बाढ़ प्रबंधन के प्रति इतना लापरवाह क्यों है?
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लाखों का हिसाब कहां?: जब जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं दिखा, तो आखिर किन कार्यों पर लाखों रुपये खर्च किए गए?
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अधिकारों का मौन: क्या प्रशासनिक आदेशों का पालन कराने वाली कोई संस्था नहीं है?
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जिम्मेदारी कौन लेगा?: यदि मानसून के दौरान जलभराव से जन-धन की हानि होती है, तो क्या इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई की जाएगी?
यह रिपोर्ट नहरी विभाग के उन दावों की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है, जिन्हें सुनकर आमजन अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। समय रहते यदि सफाई कार्य पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में कैथलवासियों को बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है।

