आर्य समाज नरवाना में आयोजित कार्यक्रम में बोले प्रधान चन्द्रकान्त आर्य
समाज में फैली अज्ञानता, अशिक्षा,अंधश्रद्धा,भोग विलासी पश्चिमी प्रवृत्ति का विनाश करने का लें संकल्प-चन्द्रकान्त आर्य ।
कहा-बढ़ती मोबाइल प्रवृत्ति के कारण भारत में लगभग 1 करोड़ 10 लाख घंटे प्रतिवर्ष खर्च हो रहे हैं।
औसतन एक व्यक्ति प्रतिदिन 5 घंटे मोबाइल की स्क्रीन पर रहता है -चन्द्रकान्त आर्य।
कहा-बढ़ती मोबाइल प्रवृत्ति के कारण भारत में लगभग 1 करोड़ 10 लाख घंटे प्रतिवर्ष खर्च हो रहे हैं।
औसतन एक व्यक्ति प्रतिदिन 5 घंटे मोबाइल की स्क्रीन पर रहता है -चन्द्रकान्त आर्य।
नरवाना 19 अप्रैल (नरेन्द्र जेठी)
आज आर्य समाज प्रधान चन्द्रकान्त आर्य ने परशुरामजी के स्वावलंबन, स्वाभिमान, पुरुषार्थ, तप,त्याग,वैराग्य, धैर्य, संयम, साहस और शस्त्र- शास्त्र विद्या इत्यादि के गुणों को धारण करने का आह्वान करते हुए कहा कि समाज में फैली अज्ञानता, अशिक्षा,अंधश्रद्धा,भोग विलासी पश्चिमी प्रवृत्ति का विनाश करने का संकल्प लेना चाहिए।
आज आर्य समाज नरवाना संबंद्धता आर्य प्रतिनिधि सभा हरयाणा दयानन्द मठ रोहतक ने प्रधान चंद्रकांत आर्य के मार्गदर्शन में अक्षय तृतीया और भगवान् परशुराम जी महाराज की जयंती पर कार्यक्रम में सम्बोधित करते हुए प्रधान चन्द्रकान्त आर्य ने कहा कि बढ़ती मोबाइल प्रवृत्ति के कारण भारत में लगभग 1 करोड़ 10 लाख घंटे प्रतिवर्ष खर्च हो रहे हैं। औसतन एक व्यक्ति प्रतिदिन 5 घंटे मोबाइल की स्क्रीन पर रहता है। मेलाटोनिन हार्मोन नींद का हार्मोन है। इसके अभाव में भारत में 70 प्रतिशत व्यक्ति 8 घंटे से कम तथा 40 प्रतिशत विद्यार्थी 6 घंटे से कम नींद ले रहे हैं। अधिक समय मोबाइल स्क्रीन पर कार्य करने से दिमाग समय से पहले बूढ़ा हो रहा है।
डिमेंशिया, अवसाद, माइग्रेन, याददाश्त कमजोर होने के साथ भूलने की समस्या इत्यादि बढ़ रही है। युवाओं में अधिक मोबाइल के प्रयोग करने से अपराध प्रवृति बढ़ रही है। मेलाटोनिन हार्मोन के अभाव में कम नींद लेने से आंतों में अच्छे जीवाणुओं की संख्या पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। दिमाग और आंत एक दूसरे से जुड़े हुए हैं । जीवन शैली बिगडऩे से उत्पन्न अम्लीय प्रभाव के कारण आंतों में सूजन के साथ दिमाग में भी सूजन आती है। इसलिए शारीरिक ,मानसिक, बौद्धिक एवं आत्मिक उत्तम स्वास्थ्य के लिए मोबाइल का कम से कम प्रयोग करना चाहिए। सप्ताह में एक या दो दिन निषेध करें। सोने से पहले मोबाइल को कम से कम 10 फीट दूर रखें। मोबाइल के स्थान पर स्वाध्याय ,घर खेत क्यार में पारिश्रमिक कार्य एवं रिश्तेदारों के साथ समय बिताना चाहिए। यह आपसी संबंधों की सामाजिक ओर सांस्कृतिक विरासत को प्रगतिशील बनाने में सहायक होगा।
भारत में मत्तांतरण की भयंकर बीमारी लग चुकी है।इस वर्ष में 10767 कैस गैर कानूनी मत्तांतरण के रजिस्टर्ड हो चुके हैं। बच्चों को धार्मिक शिक्षा देकर ही जिहादी आतंकवाद से बचाया जा सकता है। इसलिए आम जनमानस से आह्वान किया जाता है कि वह अपने बच्चों विशेष कर लड़कियों को धार्मिक, सामाजिक सांस्कृतिक शिक्षा अवश्य ही प्रदान करें, जिससे उनके वर्तमान और भविष्य सुरक्षित हो सके। समाज के प्रबुद्ध एवं कृतज्ञ नागरिक से भी आह्वान किया गया है कि वे अपने समय का सदुपयोग धार्मिक, सामाजिक जागृति के लिए सामूहिक अभियान में शामिल होकर योगदान दें। यह जन जागरण का समय है।आओ हम इसमें अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान करें।
प्रधान चंद्रकांत आर्य ने बताया कि भारत महान पुरुषों की जन्म भूमि रहा है। पर्व एवं उत्सव हर मौसम में समाज और राष्ट्र की सांस्कृतिक धार्मिक एकता के प्रतीक है। अक्षय तृतीया वैशाख मास में फसल उपरांत नए साजो सामान खरीदने के रूप में मनाने का विधान है। त्रेता युग में इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। जिसने वैदिक सिद्धांत वीर भोग्या वसुंधरा के अनुसार वीरों को ही धरती पर राज्य करने के अधिकार को दुराचारी ,दुष्ट प्रवृत्ति के भोगी बिलासी राजाओं और राज सत्ताओं का नाश कर चरितार्थ किया था। इस अवसर पर पर्यावरण प्रेमी व राजकीय कमला मैमोरियल महाविधालय में रसायन के सह प्राध्यापक प्रो0 जयपाल सिंह आर्य ने कहा कि राष्ट्र की एकता- अखंडता और सनातन धर्म में जीवित साहसिक परंपराओं को प्रकट करने के लिए पर्वों मनाने का विशेष महत्व है। इन्हीं परंपराओं के अनुसार समय-समय पर महापुरुषों ने राष्ट्र की बलि वेदी पर अपने प्राणों की आहुति देकर के राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत को सर्वोच्चता प्रदान की है। जयपाल सिंह आर्य ने कहा इस अवसर पर रामकुमार आर्य, बलबीर सिंह एवं अन्य आर्यगण उपस्थित रहे। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के लिए यज्ञ हवन भी किया गया। सत्संग में भजन एवं गीतों के माध्यम से धर्मपाल, यशपाल एवं डॉ प्रताप सिंह आर्य ने ईश्वर स्तुति, प्रार्थना, उपासना के साथ महर्षि दयानंद के समाज एवं राष्ट्र निर्माण में योगदान का उल्लेख किया।
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