आयुष्मान भारत योजना पर संकट के संकेत: भुगतान नहीं मिला तो 5 जून से निजी अस्पताल बंद कर सकते हैं इलाज
रोहतक / 31 मई / अटल हिन्द ब्यूरो
देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल आयुष्मान भारत योजना हरियाणा में एक बड़े संकट का सामना कर सकती है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार द्वारा लंबित भुगतान जल्द जारी नहीं किया गया, तो प्रदेश के निजी अस्पताल 5 जून से आयुष्मान कार्ड धारकों का उपचार बंद करने पर मजबूर हो सकते हैं।
आईएमए के इस ऐलान ने लाखों लाभार्थियों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण निजी अस्पतालों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे योजना के तहत सेवाएं जारी रखना कठिन होता जा रहा है।
करोड़ों रुपये के बकाया भुगतान से बढ़ी परेशानी
रोहतक जिले में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े लगभग 34 निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। अस्पताल संचालकों के अनुसार इन संस्थानों का करोड़ों रुपये का भुगतान लंबे समय से सरकार के पास अटका हुआ है। कई अस्पतालों के दावे ऐसे हैं जिनका भुगतान लगभग एक वर्ष से नहीं हुआ है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि लगातार बढ़ते खर्चों के बीच भुगतान में देरी से वित्तीय संतुलन बिगड़ रहा है। कर्मचारियों के वेतन, दवाइयों की खरीद, चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और अन्य संचालन संबंधी आवश्यक खर्चों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
सरकार के साथ कई दौर की बातचीत, समाधान अब भी दूर
आईएमए के पदाधिकारियों ने बताया कि लंबित भुगतान के मुद्दे को लेकर सरकार और संबंधित विभागों के साथ कई बार चर्चा की जा चुकी है। हालांकि अब तक कोई ठोस और स्थायी समाधान सामने नहीं आया है।
संगठन का कहना है कि निजी अस्पताल लगातार योजना के लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन भुगतान में लंबे समय तक देरी से व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो अस्पतालों के लिए आयुष्मान योजना के अंतर्गत उपचार जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।
गरीब मरीजों पर पड़ सकता है सीधा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 5 जून से निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड के तहत उपचार बंद हो जाता है, तो इसका सबसे अधिक प्रभाव आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ेगा। ऐसे हजारों परिवार, जो महंगे इलाज के लिए इस योजना पर निर्भर हैं, उन्हें स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में रहने वाले कई मरीजों के लिए निजी अस्पताल ही त्वरित और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख माध्यम हैं। ऐसे में योजना के संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकती है।
समाधान की उम्मीद बरकरार
आईएमए ने सरकार से सभी लंबित भुगतानों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए आवश्यक वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
फिलहाल सभी की निगाहें सरकार और स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते भुगतान संबंधी विवाद का समाधान नहीं हुआ, तो 5 जून से आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों को प्रदेश के निजी अस्पतालों में उपचार प्राप्त करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।


