हरियाणा राज्य सूचना आयोग के पिछले 20 वर्षों के लेखा जोखा का आरटीआई से खुलासा :-
-राज्य सूचना आयोग हरियाणा पर पिछले 20 वर्षों में सूचना आयुक्तों, स्टाफ के वेतन-भत्तों पर कुल 113.42 करोड़
रुपए,नई बिल्डिंग निर्माण पर कुल 48 करोड़ का खर्च ,जबकि आरटीआई एक्ट बारे जनता को जागरूक करने पर 20 वर्षों में मात्र अढ़ाई लाख रुपए खर्च किए गए ।
-आवश्यक बिल्डिंग ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट (ओ सी) व अग्नि सुरक्षा सर्टिफिकेट लिए बगैर ही चल रहा है सूचना आयोग का चार मंजिला भवन ।
चंडीगढ़ / 31 मई / अटल हिन्द /राजकुमार अग्रवाल
हरियाणा में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून लागू हुए लगभग बीस वर्ष पूरे होने पर सामने आए आंकड़ों ने राज्य में पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर द्वारा हरियाणा राज्य सूचना आयोग से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर जारी किए गए आंकड़ों में दावा किया गया है कि पिछले 20 वर्षों में आयोग पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, जबकि आम जनता को आरटीआई कानून के प्रति जागरूक करने पर बेहद सीमित राशि खर्च हुई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2005 से 2024 तक हरियाणा राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों तथा कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और प्रशासनिक खर्चों पर कुल 113.42 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
इसके विपरीत आरटीआई कानून के प्रचार-प्रसार और जन-जागरूकता अभियानों पर केवल 2,49,936 रुपये खर्च किए गए। जानकारी में यह भी सामने आया है कि पिछले 15 वर्षों के दौरान जागरूकता कार्यक्रमों पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं किया गया।
नई इमारत पर 47 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च
हरियाणा राज्य सूचना आयोग का कार्यालय दिसंबर 2024 तक चंडीगढ़ में किराये के भवनों से संचालित होता रहा। इसके बाद पंचकूला के सेक्टर-3 में निर्मित नई चार मंजिला इमारत में आयोग का कार्यालय स्थानांतरित किया गया।
आंकड़ों के अनुसार इस भवन के निर्माण और भूमि लागत सहित कुल 47.63 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें लगभग 9.30 करोड़ रुपये भूमि मूल्य तथा 38.83 करोड़ रुपये निर्माण कार्य पर खर्च हुए।
आयोग के अनुसार नई इमारत में पिछले 16 महीनों के दौरान बिजली पर 79.52 लाख रुपये का व्यय हुआ, जबकि फर्नीचर और सजावट पर 13.62 लाख रुपये खर्च किए गए।
ऑक्युपेशन और फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र पर सवाल

पीपी कपूर ने आरोप लगाया है कि पंचकूला स्थित सूचना आयोग का नया कार्यालय आवश्यक ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) और फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट प्राप्त किए बिना संचालित किया जा रहा है।
उनका कहना है कि हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 के अनुसार किसी भी भवन के उपयोग से पहले ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट अनिवार्य होता है।
कपूर का आरोप है कि लगभग 18 महीनों से भवन बिना आवश्यक प्रमाणपत्रों के संचालित हो रहा है, जिससे इसकी वैधता और सुरक्षा को लेकर प्रश्न खड़े होते हैं।
1.26 लाख से अधिक मामलों की सुनवाई
सूचना आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार पिछले 20 वर्षों में आयोग को कुल 1,13,897 द्वितीय अपीलें और 12,629 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 1,08,288 अपील मामलों और 11,186 शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है।
वर्तमान में आयोग के समक्ष 5,609 अपील मामले और 1,443 शिकायतें लंबित हैं। आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के अलावा पांच सूचना आयुक्त कार्यरत हैं, जबकि सूचना आयुक्तों के पांच पद अभी भी रिक्त बताए गए हैं।
अधिकारियों पर करोड़ों का जुर्माना, वसूली सीमित
आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में सूचना उपलब्ध न कराने या नियमों का उल्लंघन करने वाले जन सूचना अधिकारियों पर कुल 1.79 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। हालांकि इसमें से केवल 64.55 लाख रुपये की ही वसूली हो सकी।
वहीं पिछले 20 वर्षों में जुर्माना राशि जमा न कराने वाले 1,863 डिफॉल्टर जन सूचना अधिकारियों से अभी भी लगभग 2.95 करोड़ रुपये की वसूली शेष है। आयोग ने ऐसे अधिकारियों की सूची अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक कर रखी है।
“आरटीआई की भावना कमजोर पड़ रही” : पीपी कपूर
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने आरोप लगाया कि सूचना आयोग पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद राज्य में पारदर्शिता और जवाबदेही की स्थिति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है।
उनका कहना है कि अनेक मामलों में जन सूचना अधिकारी समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराते, जिससे आवेदकों को बार-बार अपील और शिकायत की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
कपूर ने कहा कि एक ओर सूचना आयुक्तों और प्रशासनिक ढांचे पर भारी खर्च किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आरटीआई कानून के प्रति जन-जागरूकता पर बेहद कम निवेश यह संकेत देता है कि व्यवस्था का मूल उद्देश्य पीछे छूटता जा रहा है।
उन्होंने सूचना आयोग की नई इमारत की वैधानिक स्थिति की जांच कराने, आवश्यक प्रमाणपत्र प्राप्त होने तक कार्रवाई करने तथा सूचना आयुक्तों के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां करने की मांग की है।
प्रमुख तथ्य एक नजर में
सूचना आयोग पर 20 वर्षों में खर्च: 113.42 करोड़ रुपये
आरटीआई जागरूकता पर खर्च: 2.49 लाख रुपये
नई इमारत की कुल लागत: 47.63 करोड़ रुपये
लंबित अपीलें: 5,609
लंबित शिकायतें: 1,443
पिछले 5 वर्षों में लगाया गया जुर्माना: 1.79 करोड़ रुपये
वसूली गई जुर्माना राशि: 64.55 लाख रुपये
बकाया जुर्माना: 2.95 करोड़ रुपये
सूचना आयुक्तों के रिक्त पद: 5


