कैथल में नगर परिषद की बड़ी लापरवाही: प्रॉपर्टी आईडी का ‘डाटा घोटाला’, वैध मालिकों की संपत्ति पर दूसरों का कब्जा
कैथल नगर परिषद में प्रॉपर्टी आईडी में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का खेल! वैध मालिक परेशान, अवैध कॉलोनियों में फर्जी रजिस्ट्रियां
कैथल / 06 जुलाई 2026 / अटल हिन्द ब्यूरो
कैथल। नगर परिषद कैथल के प्रॉपर्टी आईडी रिकॉर्ड में गंभीर हेरफेर की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई नागरिकों की वैध संपत्तियों (प्लॉट, मकान और दुकानों) की प्रॉपर्टी आईडी ऑनलाइन पोर्टल पर अचानक दूसरों के नाम पर दिखाई दे रही हैं। इससे असली मालिक अपनी ही संपत्ति पर मालिकाना हक साबित करने के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि फर्जीवाले इस गड़बड़ी का फायदा उठाकर अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्रियां करा रहे हैं।
सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं?
नगर परिषद के अनुसार, कैथल शहर में कुल 84,407 प्रॉपर्टी आईडी रजिस्टर्ड हैं। पारदर्शिता के लिए सरकार के स्व-प्रमाणन (Self-Verification) के निर्देश के बावजूद अब तक केवल 50,143 आईडी ही स्व-प्रमाणित हो सकी हैं। बाकी बची 34,264 से अधिक आईडी का सत्यापन लंबित है। विशेषज्ञों और पीड़ितों का मानना है कि यही लंबित आईडी रिकॉर्ड में विसंगतियों और हेराफेरी का मुख्य कारण बन रही हैं।
पीड़ितों की आपबीती
वार्ड-11 की पार्षद सुशीला शर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “पूरे शहर में लोगों की आईडी एक-दूसरे के नाम चढ़ाई जा रही हैं। मेरी अपनी प्रॉपर्टी आईडी पर भी किसी अन्य व्यक्ति की रजिस्ट्री हो रखी है। शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। यह जांच का विषय है कि किसकी मंशा काम कर रही है।
सेक्टर-21 निवासी नरेंद्र कुमार ने बताया, “पंतनगर में मेरा प्लॉट है। वर्षों से नियमित टैक्स जमा कर रहा हूं। लेकिन नगर परिषद ने फर्जी तरीके से उसकी आईडी किसी और के नाम कर दी। जब पोर्टल पर चेक किया तो मेरी आईडी ही गायब मिली।”अनिरुद्ध शर्मा ने दुकान मालिक होने की शिकायत करते हुए कहा, “टैक्स भरने गया तो पता चला कि मेरी दुकान की आईडी किसी और के नाम ट्रांसफर कर दी गई है। अपनी ही संपत्ति का टैक्स अब किस नाम से भरूं? कई दिनों से चक्कर काट रहा हूं, केवल आश्वासन मिल रहे हैं।”
प्रशासनिक लापरवाही पर जनाक्रोश
पीड़ित रोजाना नगर परिषद कार्यालय पहुंच रहे हैं, लेकिन कर्मचारी मामला टालते हुए सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं। इस सुस्त प्रशासनिक व्यवस्था के कारण स्थानीय जनता में भारी रोष है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
जब इस पूरे मामले पर नगर परिषद के सचिव मोहन लाल से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा:
“अगर किसी की प्रॉपर्टी आईडी के साथ कर्मचारियों ने छेड़छाड़ की है, तो यह गंभीर मामला है। हम इसकी पूरी जांच कराएंगे। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
अटल हिन्द की नजर: कैथल नगर परिषद का यह ‘आईडी घोटाला’ केवल एक तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का कत्ल है। क्या जांच के बाद सच में दोषियों पर कार्रवाई होगी या यह फाइल भी पुरानी फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी? अटल हिन्द इस मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाता रहेगा।

