भारत विश्व शांति का आधार : शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती
वेद-पुराण विश्व की सबसे प्राचीन और सनातन ज्ञान की परंपरा
सनातन मूल्यों से दुनिया में शांति, सद्भाव और एकता स्थापित होगी
वर्तमान समय में विश्व युद्ध जैसे हालात, निर्दोष लोगों का रक्तपात
गुरुग्राम/ 3 जून /अटल हिन्द /फतह सिंह उजाला
भारत विश्व शांति का आधार है और सनातन वैदिक संस्कृति ही श्वसुधैव कुटुंबकमर तथा श्सर्वे भवन्तु सुखिनः का संदेश पूरी दुनिया को देती है। वर्तमान समय में विश्व युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में निर्दोष लोगों का रक्तपात हो रहा है। ऐसे समय में सनातन धर्म विश्व शांति, मानव कल्याण और समस्त ब्रह्मांड की शांति का मार्ग दिखाता है।
यह बात काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने चितरा कोलियरी स्थित दुखिया बाबा मंदिर प्रांगण में आयोजित श्री श्री 1008 महाविष्णु यज्ञ के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच कही। यह जानकारी शंकराचार्य के निजी सचिव के द्वारा मीडिया से सांझा की गई ।
उन्होंने कहा कि वेद विश्व की सबसे प्राचीन और सनातन ज्ञान परंपरा है, जो प्रत्येक प्राणी में एक ही आत्मा के दर्शन करने की शिक्षा देती है। शंकराचार्य ने कहा कि यदि विश्व के लोग सनातन मूल्यों को अपनाएं तो दुनिया में शांति, सद्भाव और एकता स्थापित हो सकती है।
स्वदेशी उत्पादों के उपयोग का आह्वान किया
उन्होंने आतंकवाद और उग्रवाद को मानवता का शत्रु बताते हुए इसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्वदेशी उत्पादों के उपयोग का आह्वान करते हुए कहा कि इससे देश का धन देश में रहेगा, किसानों और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा तथा भारत आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनेगा।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से कम से कम एक वृक्ष लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। साथ ही स्वास्थ्य की दृष्टि से प्रत्येक परिवार को एक गाय पालने की सलाह दी। उन्होंने घुसपैठ, समान शिक्षा नीति, समान नागरिक संहिता, न्यायिक सुधार, धर्मांतरण और मंदिर प्रबंधन जैसे विभिन्न राष्ट्रीय एवं सामाजिक मुद्दों पर भी अपने विचार व्यक्त किए।
धर्मांतरण पर कठोर नियंत्रण होना चाहिए
उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून और समान शिक्षा व्यवस्था लागू होनी चाहिए तथा धर्मांतरण पर कठोर नियंत्रण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में समयबद्ध न्याय व्यवस्था लागू हो तथा न्यायिक जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। मंदिरों के प्रबंधन के संबंध में उन्होंने कहा कि हिंदू मंदिरों का संचालन हिंदू समाज के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाना चाहिए।
प्रेस वार्ता के अंत में शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि राष्ट्रहित, संस्कृति संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सामाजिक समरसता के लिए सभी नागरिकों को मिलकर कार्य करना चाहिए। तभी भारत विश्वगुरु के रूप में अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावी ढंग से निभा सकेगा।
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