अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में बड़े बदलाव की तैयारी: विवादों के बीच पहली बार होगी CEO की नियुक्ति, महिला उम्मीदवारों को भी मौका
लखनऊ/10 जुलाई 2026 /अटल हिन्द ब्यूरो
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस वक्त की सबसे बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। ट्रस्ट में पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति होने जा रही है। खास बात यह है कि इस शीर्ष पद की जिम्मेदारी किसी महिला को भी सौंपी जा सकती है। ट्रस्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि इस पद के लिए महिला और पुरुष दोनों समान रूप से पात्र हैं।
एक तरफ जहां यह फैसला मंदिर के प्रबंधन को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ राम मंदिर दान में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं भी शुरू हो गई हैं।
व्यवस्था पर तंज: “छोटे चोरों को जेल, बड़ों को संरक्षण?”
इस प्रशासनिक फेरबदल के बीच व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आलोचकों का कहना है कि देश में कानून का दोहरा मापदंड देखने को मिल रहा है। जहां एक गरीब या लाचार व्यक्ति अपने परिवार का पेट पालने या छोटी-मोटी जरूरतों के लिए चोरी करता है, तो पुलिस और अदालतें उसे तुरंत सलाखों के पीछे भेज देती हैं। ऐसे मामलों में अक्सर जमानत या पैरोल मिलना भी मुश्किल हो जाता है और वे अपनी आधी जिंदगी घृणा के साए में जेल में ही काट देते हैं।
इसके विपरीत, राम मंदिर के दान और चंदे में कथित तौर पर करोड़ों की हेराफेरी के जो आरोप लग रहे हैं, उन पर जांच एजेंसियों की चुप्पी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आलोचकों का आरोप है कि रसूखदार लोगों पर हाथ डालने से पुलिस और प्रशासन कतराते हैं। मंदिर अब आम जनता के विश्राम स्थल के बजाय एक बड़े कॉर्पोरेट या व्यापारिक प्रतिष्ठान की तरह नजर आने लगा है, जहां अरबों रुपए की कमाई के बीच जवाबदेही की कमी दिखती है।
30 दिनों के भीतर होगा नए CEO के नाम का एलान
तमाम राजनीतिक बहसों के बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रशासनिक सुधार की प्रक्रिया तेज कर दी है। नए सीईओ के चयन के लिए एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसने अपनी कार्यवाही शुरू कर दी है। अगले एक महीने (30 दिन) के भीतर नए नाम पर मुहर लगने की उम्मीद है।
चयन समिति में शामिल प्रमुख नाम:
जस्टिस प्रमोद कोहली (सेवानिवृत्त)
लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त)
सुरेश हवारे
समिति के सदस्यों के मुताबिक, चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और इसमें किसी भी प्रकार की राजनीतिक पैरवी या विशुद्ध कॉर्पोरेट तरीका नहीं अपनाया जाएगा।
CEO पद के लिए तय किए गए कड़े मापदंड
ट्रस्ट के अनुसार, इस जिम्मेदारी के लिए उम्मीदवार का चयन निम्नलिखित कड़े मानकों के आधार पर होगा:
अटूट आस्था और निष्ठा: उम्मीदवार की भगवान श्रीराम के प्रति गहरी आस्था होनी चाहिए। ईमानदारी और सत्यनिष्ठा को सबसे प्रमुख योग्यता माना गया है।
प्रशासनिक अनुभव: अयोध्या आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए बेहतरीन मैनेजमेंट स्किल्स अनिवार्य हैं।
बैकग्राउंड की छूट: उम्मीदवार किसी खास बैकग्राउंड से हो, यह जरूरी नहीं है। हालांकि, बेहतर संगठन क्षमता को देखते हुए सशस्त्र बलों (Armed Forces), पुलिस या अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त या वरिष्ठ अधिकारियों के नामों पर विशेष विचार किया जा सकता है।
उम्र और वेतन: फिलहाल उम्र या मानदेय (सैलरी) की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है, क्योंकि ट्रस्ट को एक बेहद अनुभवी और वरिष्ठ चेहरे की तलाश है।

क्या होंगी मुख्य जिम्मेदारियां?
नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के कंधे पर दो सबसे बड़ी चुनौतियां होंगी:
1. वित्तीय प्रबंधन (Financial Oversight): मंदिर में आने वाले भारी चढ़ावे, दान और अरबों रुपये के फंड का स्थापित नियमों के अनुसार पारदर्शी प्रबंधन करना।
2. सुरक्षा और समन्वय: अयोध्या आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए स्थानीय जिला प्रशासन और सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के साथ निरंतर तालमेल बिठाना।
जब समिति के सदस्यों से पूछा गया कि क्या इस नई नियुक्ति के लिए ट्रस्ट के मौजूदा नियमों में कोई संशोधन करना पड़ेगा, तो उन्होंने साफ किया कि फिलहाल इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। भविष्य में यदि जरूरत महसूस हुई, तो उचित निर्णय लिया जाएगा।

