कैथल के रिहायशी इलाके सनसिटी में DTP की कार्रवाई के बाद बढ़ी बहस:
कैथल के हुड्डा सेक्टर-18, 20 और 21 में मल्टीस्टोरी फ्लैट सिस्टम पर “डबल रोल” के आरोप, भूकंपीय जोखिम और प्रॉपर्टी दरों में गिरावट के संकेत
कैथल/22 अप्रैल /अटल हिन्द ब्यूरो :
शहर के सनसिटी क्षेत्र में गत दिवस 21 अप्रैल को जिला टाउन प्लानर (DTP) द्वारा अवैध अतिक्रमण और अतिरिक्त निर्माण पर की गई कार्रवाई के बाद कैथल में शहरी विकास नीतियों को लेकर विवाद और गहरा गया है। एक ओर प्रशासन अवैध निर्माणों पर सख्ती दिखा रहा है, वहीं दूसरी ओर सेक्टर-18, 20 और 21 में मल्टीस्टोरी फ्लैट सिस्टम को लेकर मिल रही अनुमतियों ने “डबल रोल” के आरोपों को हवा दी है।
नीतिगत विरोधाभास पर सवाल
स्थानीय निवासियों और आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों का कहना है कि S+4 (स्टिल्ट+4) और G+3 निर्माण को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों और राज्य स्तर पर जारी अनिश्चितता के बावजूद इन सेक्टरों में फ्लैट सिस्टम को बढ़ावा देना समझ से परे है। उनका मानना है कि इससे न केवल नीति की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, बल्कि आम खरीदार भी भ्रमित हो रहा है।
DTP की कार्रवाई: आंशिक समाधान ?
सनसिटी में हालिया अभियान के दौरान स्वीकृत नक्शों से अधिक निर्माण, अवैध बालकनी विस्तार और स्टिल्ट पार्किंग में किए गए अतिक्रमण हटाए गए। हालांकि, नागरिकों का कहना है कि यदि एक ओर अवैध निर्माण हटाए जा रहे हैं और दूसरी ओर अधिक घनत्व वाले नए प्रोजेक्ट्स को अनुमति दी जा रही है, तो यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता दबाव
तेजी से बढ़ते बहुमंजिला निर्माण के कारण:
सीवरेज नेटवर्क क्षमता से अधिक लोड झेल रहा है
पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है और भूजल दोहन बढ़ रहा है।
10–12 मीटर चौड़ी सड़कों पर ट्रैफिक जाम आम हो गया है
बिजली ट्रांसफॉर्मर पर ओवरलोड की स्थिति
आपातकालीन सेवाओं की पहुंच में बाधा
जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
भूकंपीय (Seismic) जोखिम: एक गंभीर चेतावनी
विशेषज्ञों के अनुसार हरियाणा के कई हिस्से सीस्मिक जोन III और IV में आते हैं, जहां मध्यम से उच्च स्तर के भूकंप का जोखिम रहता है। S+4 संरचनाओं में स्टिल्ट फ्लोर के कारण “सॉफ्ट स्टोरी” प्रभाव पैदा होता है, जो भूकंप के दौरान सबसे कमजोर हिस्सा बन जाता है।
यदि निर्माण में IS कोड्स (जैसे IS 1893, IS 13920) का पालन नहीं किया गया हो, तो:
इमारतों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
ऊपरी मंजिलों पर रहने वालों के लिए जोखिम अधिक होता है
रेस्क्यू ऑपरेशन भी कठिन हो सकता है।
इंजीनियरों का कहना है कि बिना अनिवार्य स्ट्रक्चरल ऑडिट और क्वालिटी मॉनिटरिंग के इस तरह के निर्माण भविष्य में बड़े हादसों को जन्म दे सकते हैं।
पर्यावरण और शहरी संतुलन पर असर
हरित क्षेत्र में लगातार कमी
हीट आइलैंड इफेक्ट से तापमान में वृद्धि
वायु प्रदूषण और धूल का स्तर बढ़ना
कचरा प्रबंधन प्रणाली पर दबाव
ये सभी संकेत अनियोजित शहरीकरण की ओर इशारा करते हैं।
प्रॉपर्टी बाजार पर असर: 20% तक गिरावट के संकेत
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार:
बढ़ती सप्लाई और कानूनी अनिश्चितता
प्रशासनिक कार्रवाई और तोड़फोड़
सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बढ़ती चिंता
इन कारणों से फ्लैट्स की मांग में गिरावट आई है। खासकर सेक्टर-18, 20 और 21 में फ्लैट्स की कीमतों में लगभग 15% से 20% तक गिरावट के संकेत मिल रहे हैं। खरीदार अब केवल वैध, सुरक्षित और बेहतर लोकेशन वाली प्रॉपर्टी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
जनता की प्रमुख मांगें
हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप स्पष्ट और एकसमान नीति
सभी सेक्टरों में नियमों का समान रूप से पालन
इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के बाद ही नई मंजूरी
अनिवार्य स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट और फायर सेफ्टी जांच
सनसिटी में हुई कार्रवाई और सेक्टर-18, 20 व 21 को लेकर उठे सवालों ने कैथल में शहरी विकास की दिशा, सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर बहस खड़ी कर दी है। आने वाले समय में सरकार और प्रशासन की नीतिगत स्पष्टता ही इस विवाद का समाधान तय करेगी।


