गांव चांदपुरा के ग्रामीणों ने बिजली घर के बाहर धरना देकर प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी
जाखल /6 जून /अटल हिन्द ब्यूरो/योगेश खनेजा
जाखल क्षेत्र में बिजली को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तीन गांवों की प्रतिष्ठा और हक की लड़ाई बन चुका है। पिछले कई दिनों से लगातार चल रहे धरनों ने पूरे क्षेत्र का माहौल गर्मा दिया है।
एक तरफ गांव चांदपुरा के किसान और ग्रामीण अपने टिब्बा फीडर को म्योंद कलां के नए 33 केवी बिजली घर से जोड़ने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ म्योंद कलां और म्योंद खुर्द के ग्रामीण इस फैसले का विरोध करते हुए बिजली घर के बाहर मोर्चा संभाले हुए हैं।
स्थिति यह है कि तीनों गांवों के लोग अपने-अपने हक की बात कर रहे हैं, जबकि बिजली विभाग के अधिकारी इस विवाद का तकनीकी और प्रशासनिक समाधान निकालने में जुटे हुए हैं। लगातार तीसरे दिन भी धरना जारी रहने से मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
चांदपुरा की मांग – नया बिजली घर बना तो हमें भी मिले राहत
गांव चांदपुरा के किसानों का कहना है कि वर्षों से वे बिजली संकट झेल रहे हैं। बार-बार कट, कम वोल्टेज और खराब सप्लाई के कारण खेती और घरेलू उपभोक्ता दोनों परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब म्योंद कलां में करोड़ों रुपये की लागत से नया बिजली घर बनाया गया तो उन्हें उम्मीद जगी थी कि अब उनके गांव की बिजली व्यवस्था सुधरेगी।
लेकिन फीडर जोड़ने का कार्य लगातार अटकने से लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। धरने पर बैठे ग्रामीणों और सरपंच अमरीक सिंह का कहना है कि यदि नया बिजली घर बनने के बावजूद उन्हें पुरानी समस्याएं ही झेलनी पड़ें तो फिर इस परियोजना का लाभ क्या है। इसी मांग को लेकर ग्रामीण बिजली घर के बाहर धरना देकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
म्योंद कलां और म्योंद खुर्द की चिंता – पहले क्षमता बढ़ाओ, फिर जोड़ो फीडर
दूसरी ओर म्योंद कलां और म्योंद खुर्द के ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें चांदपुरा को बिजली देने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वर्तमान सब-स्टेशन की क्षमता पहले ही सीमित है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि बिना अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाए टिब्बा फीडर का अतिरिक्त भार इस बिजली घर पर डाल दिया गया तो आने वाले दिनों में दोनों गांवों को भारी बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा। कम वोल्टेज, बार-बार ट्रिपिंग और लंबे कटों की समस्या खड़ी हो सकती है।
धरने का नेतृत्व कर रहे ग्रामीणों का साफ कहना है कि विभाग पहले बड़ा ट्रांसफार्मर लगाए या अतिरिक्त क्षमता बढ़ाए, उसके बाद किसी भी फीडर को जोड़ा जाए। जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक वे फीडर जोड़ने की अनुमति नहीं देंगे।
दोनों पक्ष अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं
दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे विवाद में दोनों पक्ष खुद को सही ठहरा रहे हैं। चांदपुरा के लोग बेहतर बिजली सप्लाई को अपना अधिकार बता रहे हैं, जबकि म्योंद कलां और म्योंद खुर्द के लोग अपने गांवों की मौजूदा बिजली व्यवस्था खराब होने की आशंका जता रहे हैं।
यही कारण है कि मामला अब केवल तकनीकी नहीं बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का मुद्दा बन गया है।
बिजली विभाग के लिए बनी चुनौती
लगातार धरनों के चलते बिजली विभाग के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक तरफ चांदपुरा के ग्रामीण जल्द फीडर जोड़ने की मांग कर रहे हैं तो दूसरी तरफ म्योंद क्षेत्र के ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं।
विभागीय अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसा समाधान निकालना है जिससे किसी भी गांव को नुकसान न हो और भविष्य में बिजली व्यवस्था भी प्रभावित न हो। सूत्रों के अनुसार विभाग तकनीकी रिपोर्ट तैयार कर रहा है और अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाने सहित अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
एफआईआर के बाद पुलिस भी सतर्क
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब हाई वोल्टेज लाइन से कथित रूप से बिना अनुमति तार हटाने के आरोप में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आ गया।
धरना स्थलों और बिजली घर के आसपास पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी प्रकार का टकराव न हो और कानून व्यवस्था बनी रहे।
अब नजर प्रशासन पर
तीन गांवों के बीच खड़े इस बिजली विवाद का समाधान अब पूरी तरह प्रशासन और बिजली निगम की कार्यशैली पर निर्भर करता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते तकनीकी समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
फिलहाल म्योंद कलां के बिजली घर के बाहर धरने जारी हैं, ग्रामीण अपने-अपने पक्ष पर अड़े हुए हैं और विभाग के अधिकारी बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में लगे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन का फैसला तय करेगा कि यह विवाद शांत होता है या फिर क्षेत्र की सबसे बड़ी जनसमस्या बनकर और उभरता है।


