गौ-माता भारतीय संस्कृति, सनातन और राष्ट्र जीवन की आत्मा - शंकराचार्य नरेंद्रानंद
जगद्गुरु नरेंद्रानंद बोले गौ-संरक्षण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं
देश की सांस्कृति, कृषि व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समृद्धि से जुड़ा मामला
गौ-रक्षा के लिए चल रहे जन-जागरण अभियानों को समाज का व्यापक सहयोग करें
गो-सम्मान अभियान को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया
गुरुग्राम /11 जुलाई 2026 /फतह सिंह उजाला
काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि गौ-माता भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्र जीवन की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि गौ-संरक्षण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत, कृषि व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समृद्धि से भी जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि जब तक समाज गौ-माता के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं करेगा, तब तक गौ-संरक्षण का उद्देश्य पूर्ण नहीं हो सकता। यह बात उन्होंने काशी सुमेरु पीठ में गो-सम्मान अभियान को लेकर एक महत्वपूर्ण आयोजित बैठक में कही । यह जानकारी पीठ के प्रवक्ता के द्वारा मीडिया के साथ सझा की गई ।
शंकराचार्य नरेंद्रानंद महाराज ने सभी सनातन धर्मावलंबियों से आह्वान किया कि वे गौ-सेवा और गौ-संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप दें तथा आने वाली पीढ़ियों को भी इसके महत्व से परिचित कराएं।
उन्होंने कहा कि गौ-रक्षा के लिए चल रहे जन-जागरण अभियानों को समाज का व्यापक सहयोग मिलना चाहिए, जिससे सरकारें भी प्रभावी एवं कठोर कानून बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा सकें।
पिछले दो दशक से अधिक समय से देशभर में पदयात्रा के माध्यम से गौ-रक्षा, गौ-सुरक्षा तथा गौ-हत्या पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर जनजागरण कर रहे स्वामी गोपालानंद सरस्वती के नेतृत्व में 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने काशी सुमेरु पीठाधीश्वर, जगद्गुरु शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज से भेंट कर आगामी कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की।
गौ-रक्षा एवं गो-सम्मान कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत कराया
प्रतिनिधिमंडल ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद को आगामी 27 जुलाई को आयोजित होने वाले गौ-रक्षा एवं गो-सम्मान कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत कराया तथा अभियान को सफल बनाने के लिए उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वर्षों से देशभर में पदयात्रा कर गौ-माता की रक्षा, गौवंश के संरक्षण तथा कठोर गौ-हत्या प्रतिबंधक कानून की मांग को लेकर जनजागरण किया जा रहा है।
स्वामी गोपालानंद सरस्वती ने बताया कि पिछले 25 वर्षों से निरंतर पदयात्रा के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों में गो-सम्मान अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य समाज में गौ-सेवा की भावना जागृत करना, गौवंश की रक्षा सुनिश्चित करना तथा गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए जनमत तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि 27 जुलाई का कार्यक्रम इसी जन-जागरण अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी होगा। बैठक में प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने शंकराचार्य महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया और कार्यक्रम को सफल बनाने का संकल्प व्यक्त किया।
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