बड़ा सवाल और खुला चैलेंज
नायब सिंह सैनी की महाविकास रैली से पहले क्या जाटोली कॉलेज के हालत सुधरेगी ?
महाविकास रैली के लिए सत्ता समर्थकों के द्वारा किया जा रहा प्रचार
जाटोली कॉलेज की दुर्दशा सीएम रैली के नाम पर कहीं भारी न पड़ जाए
विधायक एसडीएम और सीएम दरबार तक पहुंच चुकी दुर्दशा की कहानी
ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में सीएम के द्वारा दी गई थी 10 दिन की मोहलत
फतह सिंह उजाला
जटोली। महाविकास का नारा बहुत अच्छा और सुनने में कर्ण प्रिय लग रहा है , लगना भी चाहिए । विधायक विमला चौधरी के मुताबिक उनके कार्यकाल में आगामी 22 मार्च को पहली बार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पटौदी में नई अनाज मंडी जाटोली परिसर में महा विकास रैली को संबोधित करने पहुंच रहे है।रैली का नाम महा विकास रैली रखा गया ! इसका खुलासा और रहस्य से पर्दा केवल आयोजक ही उठाने में सक्षम हो सकता है।
लाख टके का सवाल यह है की पटौदी को जिला बनाने की जा रही मांग के बीच जाटोली कॉलेज की दुर्दशा निश्चित रूप से बहुत बड़ा चैलेंज बन चुका है। इस बात की संभावित शर्त भी लगाई जा सकती है कि पूरे हरियाणा प्रदेश में कौन सा सरकारी शिक्षण संस्थान बद से बदकर हालत में ट्रिपल इंजन की सरकार में दिखाई दे रहा है । इसमें केवल और केवल पटौदी विधानसभा क्षेत्र के गवर्नमेंट कॉलेज जटौली का नाम सबसे पहले आना निश्चित है। जाटोली कॉलेज के साथ बने हुए एसटीपी का गंदा पानी अब एसटीपी परिसर से अधिक गवर्नमेंट कॉलेज जटौली परिसर में भरा हुआ दिखाई दे रहा है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कई बार मीडिया के माध्यम से सरकार , सिस्टम और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया जा चुका है। लेकिन लगता है राजनीतिक नेतृत्व बेहद कमजोर हो चुका है । जिसकी वजह से पटौदी विधानसभा क्षेत्र के सबसे पुराने गवर्नमेंट कॉलेज जटौली की दुर्दशा के सुधार के लिए कोई सुनवाई नहीं हो रही। जनता की चुनी हुई विधायक पटौदी के एसडीएम तथा मुख्यमंत्री दरबार तक गवर्नमेंट कॉलेज जटौली की दुर्दशा का मामला पहुंच चुका है। ग्रीवेंस कमेटी की मीटिंग में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के द्वारा समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभाग और अधिकारियों को कई महीने पहले 10 दिन की मोहलत दी गई। लेकिन परिणाम आज सभी के सामने है। सरकार के आदेशों पर सरकारी सिस्टम पूरी तरह से हावी दिखाई दे रहा है। क्योंकि अभी तक जाटोली कॉलेज में कोई सुधार नहीं हुआ है। कई महीने पहले विधायक विमला चौधरी के द्वारा भी अधिकारियों की बैठक ली गई और खरी-खोटी भी सुनाई गई । लेकिन इसके बाद संभवत बैठक किया जाना जरूरी नहीं ही नहीं समझा गया।
गवर्नमेंट कॉलेज जटौली के स्टूडेंटस के मुताबिक कॉलेज की मुख्य बिल्डिंग से लेकर खेल का मैदान जी का जंजाल बना हुआ है। गर्मी के मौसम में अब गंदे पानी की बदबू सहन करना आसान नहीं रह गया। जहरीले जानवर, बीमारी फैलने वाले कीड़े – मकोड़े हमेशा छात्रों के लिए समस्या बने रहते हैं । खेल के मैदान में लगे अथवा लगाए गए अनगिनत हरे भरे पेड़ गंदे पानी के कारण समय से पहले ही अपनी जीवन यात्रा पूरी कर चुके या फिर दम तोड़ चुके हैं। पर्याप्त हरियाली अथवा पेड़ों के बिना भी वातावरण दूषित हो रहा है। छात्र वर्ग का यहां तक कहना है कि कॉलेज की जो दुर्दशा आज बनी हुई है , उसे देखते हुए यहां पर धीरे-धीरे छात्र संख्या घटती जा रही है। या दूसरे शब्दों में गवर्नमेंट कॉलेज जटौली से छात्रों अथवा युवा वर्ग का लगाव या मोह खत्म होता जा रहा है। आज के समय में कॉलेज शिक्षण संस्थान से ज्यादा समस्याओं का संस्थान महसूस किया जा सकता है।
युवा छात्र वर्ग मूलभूत अधिकारों से वंचित

गवर्नमेंट कॉलेज जटौली की बदहाली और दुर्दशा पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष एवं पटौदी (President of the Haryana State Women’s Congress and contesting from Pataudi)से चुनाव लड़ी श्रीमती पर्ल चौधरी(Mrs. Pearl Chaudhary) ने कड़े शब्दों में कहा कि युवा छात्र वर्ग को मूलभूत अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल यह युवा वर्ग अथवा बच्चों सहित नागरिक का मूलभूत अधिकार है। सीधे और सरल शब्दों में भाजपा की थ्री टायर नहीं 4 टायर सरकार पटौदी में कहना ज्यादा बेहतर रहेगा। फिर ऐसा क्या और कौन सा कारण है की एक शिक्षण संस्था की बदहाली का पटौदी क्षेत्र की जनता के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि सरकार के अधिकारी यहां तक की मुख्यमंत्री भी समाधान करवाने में कथित रूप से बेबस दिखाई दे रहे हैं । कांग्रेस नेत्री और सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट ने साफ-साफ कहा कि जाटोली गवर्नमेंट कॉलेज की बदहाली पर जल्द से जल्द नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को संज्ञान लेकर संबंधित विभाग और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
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