कुरुक्षेत्र एलएनजेपी अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ का पेन डाउन प्रदर्शन, महिला आयोग अध्यक्ष के आरोपों का किया विरोध
कुरुक्षेत्र /08 जून / अटल हिन्द ब्यूरो/ शशि अरोड़ा
हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया द्वारा लगाए गए आरोपों के विरोध में सोमवार को कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल के नर्सिंग कर्मचारियों ने दो घंटे का सांकेतिक पेन डाउन प्रदर्शन किया। सुबह 9 बजे से 11 बजे तक चले इस विरोध प्रदर्शन में जिलेभर के नर्सिंग अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने महिला आयोग अध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी की और अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजकर मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की। हालांकि कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध केवल सांकेतिक था और आपातकालीन सेवाओं सहित गंभीर मरीजों के उपचार को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं होने दिया गया।
नर्सिंग स्टाफ की प्रतिनिधि अनीता कश्यप ने कहा कि महिला आयोग अध्यक्ष द्वारा नर्सिंग कर्मचारियों पर लगाए गए आरोपों से पूरे नर्सिंग समुदाय की छवि को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि बिना तथ्यों और जांच के किसी कर्मचारी को दोषी ठहराना उचित नहीं है। नर्सिंग कर्मचारी हमेशा मरीजों की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और उनके सम्मान को ठेस पहुंचाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
वहीं नर्सिंग सिस्टर ऑफिसर गुरमीत कौर ने कहा कि संबंधित मामले से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था और जिस वार्ड की बात की जा रही है, वहां उनकी ड्यूटी भी नहीं थी। इसके बावजूद सार्वजनिक रूप से उन्हें कटघरे में खड़ा किया गया, जिससे कर्मचारियों में रोष है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी केवल निष्पक्ष जांच और सम्मानजनक व्यवहार की मांग कर रहे हैं।
एलएनजेपी अस्पताल के सीएमओ डॉ. सुखबीर सिंह ने बताया कि महिला आयोग की अध्यक्ष अस्पताल के औचक निरीक्षण पर आई थीं। निरीक्षण के दौरान नर्सिंग स्टाफ के साथ हुई बातचीत को लेकर कर्मचारियों ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंप दिया है और प्रदर्शन समाप्त होने के बाद सभी कर्मचारी पुनः अपने कार्य पर लौट गए।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में एलएनजेपी अस्पताल में 15 वर्षीय एक किशोरी के साथ कथित दुष्कर्म के मामले की जांच के लिए हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया अस्पताल पहुंची थीं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मामले में संभावित लापरवाही को लेकर नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल प्रशासन से जवाब-तलब किया था तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी।
रेणु भाटिया ने घटना को अत्यंत गंभीर और शर्मनाक बताते हुए कहा कि चिकित्सा संस्थानों में महिलाओं और नाबालिग मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी महिला या नाबालिग की चिकित्सकीय जांच के दौरान महिला स्टाफ की उपस्थिति अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं हुआ है तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला है।
महिला आयोग अध्यक्ष ने अस्पताल प्रशासन, ड्यूटी पर मौजूद संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग करते हुए स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित बच्ची मानसिक आघात से गुजर रही है और उसे निरंतर काउंसलिंग एवं मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आरोपी को किसी प्रकार की विशेष सुविधा नहीं मिलनी चाहिए और कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच के साथ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही स्वास्थ्य विभाग से अस्पतालों में महिला मरीजों की सुरक्षा संबंधी प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने की मांग की।


