आत्मनिर्भर राष्ट्र का आधार कृषि और पशुपालन क्षेत्र हैं-चन्द्रकान्त आर्य
नरवाना 26 अप्रैल (नरेन्द्र जेठी)
आत्मनिर्भर राष्ट्र का आधार कृषि और पशुपालन क्षेत्र हैं। यह बात आज आर्य समाज नरवाना संबंद्धता आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा दयानन्द मठ रोहतक ने प्रधान चंद्रकांत आर्य के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए प्रधान चन्द्रकान्त आर्य ने कही । उन्होने किसान भाइयों से आह्वान किया गया कि वे फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर प्राकृतिक खाद बनाकर भूमि के उर्वरा शक्ति एवं जलवायु संरक्षण में सहयोग दें। आग लगने से भूमि के अंदर लाभदायक कीट पतंगे एवं जीवाणु नष्ट हो जाएंगे और नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा अन्य पोषक तत्व वास्तिकृत होकर उड़ जाएंगे।
जमीन कठोर होगी, पानी सोखने की क्षमता प्रभावित होने से खर्च और जल का दुरुपयोग भी बढ़ेगा। प्रकृति हमारी मां है, जिसकी गोद में जड़ चेतन लाखों प्रकार की वनस्पतियां, जीव- जंतु की प्रजातियां पलवित और पुष्पित हो रहे हैं। इन सब का प्रकृति के संरक्षण संवर्धन और हरियाली तथा भूमि की उर्वरा शक्ति, एवं पर्यावरण संरक्षण में सर्वोच्च एवं सर्वोत्तम योगदान है। इसका संरक्षण संवर्धन करना हम सब का नैतिक उत्तरदायित्व है।
आर्य समाज प्रधान अपने संदेश में कहा कि महर्षि दयानंद ने 1857 की क्रांति से लेकर मृत्यु पर्यंत राष्ट्र के मान -सम्मान, गौरव और गरिमा को पुन जागृत किया। महर्षि दयानंद के शिष्य स्वामी श्रद्धानंद, पंडित लेख राम, पंडित गुरु दत्त विद्यार्थी, लाला लाजपत राय, स्वामी स्वतंत्रानंद जी, स्वामी ओम आनंद, पंडित रुचि राम आर्य, आचार्य बलदेव इत्यादि ने देश की सामाजिक ,सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक एकता के लिए अविस्मरणीय कार्य किया। भारतीय संस्कृति में प्रकृति और संस्कृति का गहरा जुड़ाव है। यहां सादगी, सरलता एवं संपन्नता ही जीवन का आधार है। प्राकृतिक संसाधनों का सहज एवं सरल उपयोग करने का विधान रहा है।आज से 25 साल पहले प्रत्येक गांव आत्मनिर्भर था।
गांव में केवल चीनी या नमक ही बाजार से लाया जाता था। आज हवा बदल चुकी है। प्रत्येक के परिवार ही नहीं आदमी तक बाजार द्वारा नियंत्रित और प्रभावित किया जा चुका है। बदलते परिवेश में सब पराधीन हो चुके हैं। नकारी, बेकरी, मक्कारी एवं गद्दारी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। मनुष्य मशीन बन कर रह गया है मनुष्य अहंकार , ईर्ष्या ,द्वेश की दुर्भावना से संवेदना शून्य और क्रूरता से इतना अंधा हो चुका की अच्छे बुरे का भेद करना ही भूल गया है। प्रकृति के साथ भयंकर खिलवाड़ की जा रही है। अनेकों जगह देखने में आया है कि बेवजह पेड़ पौधों को बेवजह बेरहमी से काटा जा रहा है।
परिणाम स्वरुप भारतीय भूक्षैत्र का तापमान 45 डिग्री से पार हो गया है। नरवाना की लाइफ लाइन भी खतरे में है। इसको बचाना सब नरवाना वासियों का नैतिक कर्तव्य है। इस अवसर पर पर्यावरण शुद्धि के लिए सर्वप्रथम यज्ञ हवन भी किया गया। धर्मपाल एवं यशपाल आर्य ने भजन एवं गीतों के माध्यम से महर्षि दयानंद के सामाजिक चेतना जागृति अभियान के साथ ईश्वर स्तुति, प्रार्थना, उपासना और आराधना का भी उल्लेख किया गया। इस अवसर पर पर्यावरण प्रेमी प्रो0 जयपाल सिंह आर्य के अलावा बलजीत, बलबीर सिंह आर्य, प्रेम, कर्ण एवं अन्य आर्यन उपस्थित रहे।


