पंचकूला नगर निगम घोटाला: करोड़ों के गबन में फंसे IAS राम कुमार सिंह 3 दिन की CBI रिमांड पर, संपत्ति जानकर उड़ जाएंगे होश
अटल हिन्द ब्यूरो | चंडीगढ़ | 20 जून 2026
पंचकूला नगर निगम के 145 करोड़ रुपये के एफडी घोटाले में घिरे हरियाणा कैडर के 2012 बैच के आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शुक्रवार को विशेष सीबीआई अदालत ने आईएएस राम कुमार सिंह और अधीक्षक प्रिंस शर्मा को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसी अब इस बहुस्तरीय वित्तीय धोखाधड़ी की गहरी कड़ियों को खंगालने की तैयारी में है।
वित्त नियमों को ताक पर रखकर किया सरकारी फंड का गबन
सीबीआई की शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि नगर निगम आयुक्त रहते हुए राम कुमार सिंह ने वित्त विभाग के सभी नियमों को धता बताते हुए एक नई बैंक शाखा में खाता खुलवाया। आरोप है कि उन्होंने नियम विरुद्ध तरीके से 100 करोड़ रुपये से अधिक का सरकारी फंड इस खाते में ट्रांसफर करने की मंजूरी दी। जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरी साजिश के एवज में आईएएस अधिकारी को अवैध लाभ मिला। उनके हस्ताक्षर से जारी किए गए कई चेक यह साबित करते हैं कि सरकारी धन का उपयोग तय उद्देश्यों के बजाय निजी स्वार्थ के लिए किया गया।
मोबाइल से डिलीट किए गए डिजिटल साक्ष्य
सीबीआई ने अदालत को बताया कि यह मामला केवल गबन का नहीं, बल्कि फर्जी बैंकिंग और शेल कंपनियों के जरिए पैसे को ठिकाने लगाने का एक बड़ा सिंडिकेट है। अधीक्षक प्रिंस शर्मा की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जिनका मोबाइल नंबर बैंक खातों के दस्तावेजों में पाया गया है। एजेंसी को आरोपियों के मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण बातचीत और डिजिटल रिकॉर्ड डिलीट मिले हैं, जिन्हें रिकवर करने के लिए अब कस्टडी में पूछताछ अनिवार्य हो गई है।
आईएएस की पत्नी चलाती हैं कारोबार का साम्राज्य
साल 2025 में आईएएस राम कुमार सिंह द्वारा दिए गए संपत्ति विवरण ने सभी को हैरान कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, राम कुमार सिंह करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। उनकी पत्नी का अपना एक व्यावसायिक साम्राज्य है, जिसमें शामिल हैं:
पेट्रोल पंप और बियर फैक्टरी (माइक्रो ब्रेवरी)।
रेस्टोरेंट व्यवसाय और रेंटल प्रोजेक्ट्स।
कृषि भूमि और संपत्तियों की खरीद-फरोख्त।
दस्तावेजों के मुताबिक, उनके परिवार की अधिकांश अचल संपत्तियां ‘हिंदू अविभाजित परिवार’ (HUF) के नाम पर दर्ज हैं, जिनका अनुमानित मूल्य 3.2 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अलावा उन्हें इन संपत्तियों से सालाना 19 लाख रुपये की आय भी होती है। हालांकि, अधिकारी ने पत्नी और बच्चों की व्यक्तिगत संपत्तियों का विस्तृत विवरण फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया है।
एक नजर में करियर का सफर
शुरुआत: 23 मई 1995 को टैक्सेशन इंस्पेक्टर के रूप में करियर शुरू किया।
एचसीएस: 1999 में हरियाणा सिविल सेवा में चयन हुआ।
आईएएस: 8 मई 2019 को पदोन्नति पाकर आईएएस (हरियाणा कैडर, 2012 बैच) बने।
सेवानिवृत्ति: 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
सीबीआई अब रिमांड के दौरान उन तमाम कड़ियों को जोड़ने का प्रयास करेगी जिनसे घोटाले के लाभार्थियों और इसमें शामिल अन्य सफेदपोशों की पहचान हो सके। आने वाले दिनों में जांच में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।


