चंडीगढ़, 19 जून 2026 (अटल हिन्द ब्यूरो)।
हरियाणा के सरकारी कॉलेजों में वर्षों से अनुबंध के आधार पर सेवाएं दे रहे लेक्चररों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि कंप्यूटर साइंस, कॉमर्स और मैनेजमेंट विषयों से जुड़े अनुबंधित लेक्चररों के नियमितीकरण मामलों पर 6 महीने के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए।
कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कर्मचारियों को नियमितीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर लंबे समय तक अनिश्चितता में नहीं रखा जा सकता। यदि तय समय सीमा में फैसला नहीं लिया गया तो संबंधित अधिकारियों पर 50 हजार रुपये तक का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया जा सकता है।
याचिकाकर्ता लेक्चररों ने अदालत में दलील दी थी कि वे वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनके नियमितीकरण पर सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा रहा, जिससे उनके भविष्य और सेवा लाभों को लेकर असमंजस बना हुआ है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पात्र कर्मचारियों के मामलों का समयबद्ध निपटारा प्रशासन की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी लंबित दावों और अभ्यावेदनों की जांच कर 6 महीने के भीतर कारण सहित अंतिम निर्णय लिया जाए।
आदेश के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग को अब सभी पात्र लेक्चररों के रिकॉर्ड की समीक्षा करनी होगी और नियमों व नीति के तहत उनके दावों का परीक्षण कर समय सीमा के भीतर निर्णय लेना होगा। कोर्ट को अनुपालन रिपोर्ट भी सौंपनी होगी।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अनुबंधित लेक्चररों में राहत और खुशी का माहौल है। उनका कहना है कि वर्षों से लंबित मुद्दे पर पहली बार स्पष्ट समय सीमा तय की गई है, जिससे उनके भविष्य को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं।

