कैथल नगर परिषद प्रॉपर्टी टैक्स घोटाला: विस्तृत समाचार विवरण
घोटाले का मुख्य खुलासा और जांच कमेटी की कार्रवाई
कैथल 3 अगस्त 2026 अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
कैथल नगर परिषद में प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड के साथ खिलवाड़ कर भारी-भरकम बकाए को नाममात्र दर्शाते हुए एनडीसी जारी करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। नगर परिषद की जांच कमेटी द्वारा की गई गहन पड़ताल में दो ऐसे गंभीर मामले पकड़े गए हैं, जिन्होंने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया है। जांच कमेटी के इंचार्ज और नगर परिषद सचिव मोहन लाल ने इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए बताया कि सिस्टम से मिलीभगत कर सरकारी राजस्व को भारी चूना लगाया गया है।
पहला मामला: वृंदावन गार्डन (17 लाख के बकाए पर सिर्फ 1 लाख का खेल)
ढांड रोड स्थित निजी पैलेस ‘वृंदावन गार्डन’ का साल 2011-12 से लेकर 2017 तक का लगभग 17 लाख रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया था। लेकिन सिस्टम के भीतर बैठे लोगों से मिलीभगत करके इस भारी-भरकम बकाए को महज एक लाख रुपये के करीब दर्शाकर एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) जारी कर दी गई। जैसे ही यह शिकायत सामने आई, नगर परिषद ने तुरंत रिकॉर्ड दुरुस्त करते हुए पैलेस के असली बकाए (लगभग 17 लाख रुपये) को पोर्टल पर दोबारा अपडेट कर दिया है। इसके बाद संबंधित पक्ष को नियमानुसार तीन नोटिस जारी किए गए और अब बकाए की रिकवरी के लिए अदालत में आधिकारिक तौर पर केस दायर कर दिया गया है।
दूसरा मामला: गोल्ड मैरी स्कूल (साढ़े चार लाख का टैक्स किया नाममात्र)
इसी तर्ज पर शहर के निजी संस्थान ‘गोल्ड मैरी स्कूल’ के मामले में भी ऐसा ही बड़ा गोलमाल सामने आया है। इस स्कूल का लगभग 4 से 4.5 लाख रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया था, जिसे शातिर तरीके से बेहद कम करके पोर्टल पर अपडेट कर दिया गया था। नगर परिषद ने इस गड़बड़ी को भी तुरंत सुधारते हुए स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर दिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई आरंभ कर दी है।
जांच का दायरा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
नगर परिषद सचिव मोहन लाल ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की सुनियोजित गड़बड़ियों के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं—चाहे वह टैक्स भरने वाला निजी पक्ष हो या विभाग के भीतर सांठगांठ करने वाला कर्मचारी—इन सभी पहलुओं पर गहराई से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद पूरी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर कोर्ट में दीवानी और आपराधिक (क्रिमिनल) मुकदमे दर्ज कर कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
घोटाले की जड़ें: कब शुरू हुआ और क्या है नुकसान का अनुमान?
यह घोटाला साल 2011-12 से जुड़े मामलों को उजागर करता है, जिससे साफ होता है कि यह धांधली कोई नई नहीं बल्कि वर्षों से चल रही है। जानकारों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सिर्फ शुरुआती जांच में ही दो मामलों में लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है, तो पिछले वर्षों के पूरे रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच होने पर नुकसान का आंकड़ा करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है।
ऑडिट व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल
सवाल यह उठता है कि यदि नगरपालिका के रिकॉर्ड का नियमित ऑडिट होता है, तो फिर ऑडिटर ने यह गंभीर मामला क्यों दबाया या नजरअंदाज क्यों किया? कागजातों और पोर्टल पर निगरानी रखने वाले सभी स्तर के लोगों के नाम सामने आने चाहिए, जिसमें चपरासी से लेकर डीसी स्तर तक के अधिकारियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि असली चेहरों से नकाब उतर सके।
भ्रष्टाचार और जनता का हक
जनता का स्पष्ट मानना है कि जनता से वसूला गया एक-एक पैसा वापस मिलना चाहिए, वरना ऐसी भ्रष्ट नगरपालिका का कोई औचित्य नहीं रह जाता जो नागरिकों को सुविधाएं देने के बजाय उनका शोषण करे। कैथल में कई बार नगरपालिका कर्मचारियों की ऐसी कार्यशैली सामने आती है जहां वे उपभोक्ताओं के हस्ताक्षर खुद ही कर लेते हैं और पावती यह कहकर वापस कर देते हैं कि उपभोक्ता ने लेने से मना कर दिया है। टैक्स भरने और नक्शा पास होने के बावजूद दस्तावेज न मिलने के ऐसे अनगिनत मामले कैथल नगरपालिका की लचर कार्यशैली की पहचान बन चुके हैं।
पिछली अनियमितताएं और राजनीतिक विवाद
कैथल क्षेत्र में पहले भी एनडीसी और लाल डोरे की संपत्तियों पर फर्जीवाड़े, अवैध कॉलोनियों से सरकारी खजाने को 100 करोड़ से अधिक के नुकसान और प्रधानमंत्री आवास योजना में रिश्वतखोरी के मामले तूल पकड़ चुके हैं। इसके अलावा, भाजपा चेयरपर्सन सुरभि गर्ग द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल के दुरुपयोग और डेवलपमेंट चार्ज कम दिखाए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए थे, हालांकि कार्यकारी अधिकारी (ईओ) संदीप सोलंकी ने इन आरोपों को निराधार बताया था।

