छात्र नहीं, पंचर लगाने वाले थे”: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे Gen-Z युवाओं पर भाजपा नेता का विवादित बयान
नई दिल्ली / 03 अगस्त 2026 / अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
देश की राजधानी दिल्ली का एतिहासिक प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर हाल के दिनों में NEET परीक्षा धांधली और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर सुर्खियों में है। लेकिन इस बीच, राजनीतिक गलियारों में एक नया बखेड़ा खड़ा हो गया है। तुगलकाबाद में आयोजित भाजपा युवा मोर्चा के “Gen-Z सम्मेलन” में एक नेता के मंच से दिए गए बयान ने छात्र आंदोलनों और राजनीतिक बयानों के स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वायरल हो रहे एक 38 सेकंड के वीडियो में मंच पर खड़ा वक्ता चिल्ला-चिल्लाकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले Gen-Z (युवा पीढ़ी) के छात्रों पर अपमानजनक टिप्पणियां कर रहा है। वक्ता का कहना है कि आंदोलन में वास्तविक छात्र कम थे और “पंचर लगाने वाले तथा ताला बनाने वाले” बेरोजगार लोग ज्यादा थे।
वायरल वीडियो का सच और विवादित बोल
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही इस वीडियो क्लिप में वक्ता सीधे तौर पर जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन की साख और युवाओं की मंशा पर निशाना साधते हुए कह रहा है:
“बरगला कर, बहला-फुसलाकर वहां पर 20-50 हजार बच्चों को इकट्ठा किया गया। वहां पर बेरोजगार, पंचर लगाने वाले और ताला बनाने वाले ज्यादा थे… छात्र लोग वहां कम थे। क्या भारत की बेटी या भारत का बेटा मोदी जी और उनके परिवार के बारे में इस प्रकार की बातें कर सकता है? वे पंचर लगाने वालों की ही औलादें होंगी जो मोदी जी के बारे में ऐसी बातें कर रहे थे।”
मंच के पीछे लगे विशाल बैनर पर “Gen-Z सम्मेलन” और “युवा मोर्चा, उत्तर-पूर्वी जिला दिल्ली” लिखा साफ नजर आ रहा है। साथ ही मंच के एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी तस्वीर भी लगाई गई है।
रमेश बिधूड़ी और भाजपा पर तीखे हमले
वीडियो के सामने आते ही विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूजर्स ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोल दिया है। इस बयान को वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी से जोड़कर भी निशाना बनाया जा रहा है।
आलोचकों और आम जनता का कहना है कि:
छात्रों का अपमान: परीक्षाओं की पारदर्शिता और रोजगार की मांग कर रहे देश के नौजवानों को ‘मवाली’, ‘गटर जनरेशन’ और ‘पंचर लगाने वाला’ कहकर उनकी समस्याओं और मांगों का मजाक उड़ाया जा रहा है।
दोहरा रवैया: एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं से जुड़ने के लिए विभिन्न माध्यमों से संवाद करते हैं और ‘फ्रेंड्स’ कहकर संबोधित करते हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के नेता और पदाधिकारी आंदोलित युवाओं को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
श्रम का अनादर: ‘पंचर लगाने’ या ‘ताला बनाने’ जैसे ईमानदारी के पेशों का इस्तेमाल किसी को नीचा दिखाने और गालियों के तौर पर करना सत्ताधारी दल की मानसिकता को उजागर करता है।
राजनीतिक उबाल और बढ़ता आक्रोश
जंतर-मंतर पर NEET पर्चा लीक और शिक्षा प्रणाली में सुधारों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) तथा विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। हजारों की तादाद में छात्र और युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर डटे हुए हैं। ऐसे में, छात्रों को ‘भटका हुआ’ या ‘पंचर बनाने वाला’ बताना आग में घी डालने का काम कर रहा है।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि सरकार उनकी जायज मांगों (जैसे शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता) को सुनने के बजाय उनकी पहचान पर हमला कर रही है और आंदोलन को बदनाम करने की साजिश रच रही है।
सत्ता का अहंकार या राजनीतिक बौखलाहट?
यह पहली बार नहीं है जब किसी जन-आंदोलन या छात्र प्रदर्शन में शामिल युवाओं को इस तरह के असंसदीय और विवादित शब्दों से नवाजा गया हो। लेकिन जिस तरह से देश के बेरोजगार और पीड़ित युवाओं के लिए “पंचर बनाने वाले” जैसे जातिवादी व वर्गवादी ताने कसे जा रहे हैं, उससे लोकतंत्र की गरिमा धूमिल हो रही है।
क्या अपने अधिकारों और भविष्य के लिए आवाज उठाना इस देश के Gen-Z युवाओं की गलती है? या फिर युवाओं के बढ़ते आक्रोश से घबराकर नेता अपनी भाषा की मर्यादा पूरी तरह भूल चुके हैं? यह सवाल अब देश का हर युवा पूछ रहा है।

