वार्ड नं. 20 से पार्षद विनोद राइका ने कहा पिछड़ी वार्डों में विकास की अनदेखी हुई
नगर परिषद नरवाना में पारदर्शिता और समान विकास पर उठते सवाल
नरवाना 1 मई (नरेन्द्र जेठी)
नरवाना नगरपरिषद के वार्ड नं. 20 से पार्षद प्रतिनिधि विनोद राइका ने कहा पिछड़ी वार्डों में विकास की अनदेखी हुई नगर परिषद नरवाना में पारदर्शिता और समान विकास पर उठते सवाल हमारा संविधान ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन की मजबूत व्यवस्था प्रदान करता है, ताकि विकास कार्य समान रूप से और पारदर्शिता के साथ हो सकें।
लेकिन दुर्भाग्यवश, जमीनी स्तर पर इन सिद्धांतों का पालन होता दिखाई नहीं दे रहा है। इसका ताजा उदाहरण नगर परिषद नरवाना की कार्यप्रणाली में देखने को मिल रहा है। पीमे स्कै म पिछले कुछ वर्षों में शहरवासियों ने अनुभव किया है कि छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी सिफारिश या अनावश्यक दबाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
चाहे वह प्रॉपर्टी आईडी, पीएमएवाई स्कीम, सफाई तथा स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, सडक़ व गली मोहल्लों की सडक़ें तथा नालियां -निर्माण और भी बहुत कुछ जो इस परिषद की शहर के प्रति जिम्मेदारियां बनती है. यह स्थिति न केवल आम जनता के लिए कष्टदायक है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। शहर के विकास के लिए सरकार द्वारा भेजे गए बजट और योजनाओं की स्पष्ट जानकारी भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जिससे पारदर्शिता की कमी साफ झलकती है।
प्रतिनिधि विनोद राइका का कहना है कि विशेष चिंता का विषय यह है कि शहर के कुछ वार्डों में विकास कार्य होते नजर आते हैं, जबकि पिछड़े वार्डों की अनदेखी की जा रही है। इससे समान विकास की अवधारणा कमजोर होती जा रही है।
इसके साथ ही, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोप भी लगातार सामने आ रहे हैं, जो स्थिति को और गंभीर बनाते हैं। नगर परिषद की बैठकों को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। लंबे अंतराल के बाद होने वाली बैठकों में पार्षद प्रतिनिधियों को उचित अवसर नहीं दिया जा रहा है।
यहां तक कि मीडिया को भी स्वतंत्र रूप से जानकारी देने या लाइव प्रसारण करने से रोका जा रहा है। यदि सब कुछ पारदर्शी और नियमों के अनुसार हो रहा है, तो फिर ऐसी पाबंदियों की आवश्यकता क्यों? हमारा मानना है कि यदि नगर परिषद द्वारा वास्तव में शहर में समान और प्रभावी विकास कार्य किए गए हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
विकास कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उसे पम्पलेट, नोटिस बोर्ड, और सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए, ताकि आम जनता को अपने क्षेत्र के कार्यों की सही जानकारी मिल सके।
उन्होने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि प्रशासन पारदर्शिता, जवाबदेही और समानता के सिद्धांतों का पालन करते हुए जनता के विश्वास को मजबूत करे। अन्यथा, लोगों के मन में अविश्वास बढऩा स्वाभाविक है। अब समय आ गया है कि हम सभी नागरिक इस विषय पर विचार करें और तय करें कि हम अपने शहर को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं।


