कुरुक्षेत्र: लाडवा पुलिस पर लगे गंभीर यौन उत्पीड़न व कैंसर के आरोप निकले झूठे, मारपीट की पुष्टि पर पुलिसकर्मियों पर होगी कार्रवाई
कुरुक्षेत्र / 06 जुलाई 2026 /अटल हिन्द ब्यूरो /शशि अरोड़ा
कुरुक्षेत्र पुलिस ने लाडवा थाने में एक युवक द्वारा पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए गए संगीन आरोपों के मामले में बड़ा खुलासा किया है। एसआईटी (SIT) की 15 दिनों की गहन वैज्ञानिक जांच के बाद पुलिस अधीक्षक (एसपी) चंद्र मोहन ने स्पष्ट किया कि युवक द्वारा लगाए गए कुकर्म और कैंसर से पीड़ित होने के दावे पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत पाए गए हैं। हालांकि, हिरासत के दौरान पुलिस द्वारा की गई मारपीट की पुष्टि हुई है, जिसके लिए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मामले की पृष्ठभूमि
बीते 17-18 जून की रात लाडवा थाना क्षेत्र में एक निजी बैंक कर्मी युवक शराब के नशे में पुलिस नाके पर पहुंचा था। पुलिस के अनुसार, चेहरे पर कपड़ा बांधने और पूछताछ के दौरान बहसबाजी करने पर उसे 172 बीएनएसएस के तहत हिरासत में लिया गया। इसके बाद युवक ने दो एएसआई (संजीव कुमार और राजेंद्र कुमार) और एक होमगार्ड (सुमित) पर उसे कमरे में ले जाकर मारपीट करने, कपड़े उतारने और कुकर्म करने के गंभीर आरोप लगाए थे। साथ ही, उसने दावा किया था कि वह ‘बोन कैंसर’ का मरीज है और उसकी कीमोथेरेपी चल रही है।
एसआईटी जांच के चौंकाने वाले निष्कर्ष
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि डीएसपी निर्मल सिंह के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने हर पहलू की बारीकी से जांच की है, जिसके परिणाम निम्नलिखित हैं:
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यौन उत्पीड़न के आरोप बेबुनियाद: एसआईटी द्वारा युवक के कपड़ों और स्वैब की डीएनए जांच करवाई गई, जिसमें कुकर्म की कोई पुष्टि नहीं हुई। इसके अतिरिक्त, आरोपी पुलिसकर्मियों का ‘लाई डिटेक्टर टेस्ट’ करवाया गया, जिसमें भी इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।
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कैंसर का दावा निकला झूठ: पीजीआई (PGI) चंडीगढ़ से कराए गए सत्यापन में यह साफ हो गया कि युवक कैंसर से पीड़ित नहीं है और न ही उसकी कोई कीमोथेरेपी हुई है।
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मेडिकल रिपोर्ट: डॉक्टरों के अनुसार, युवक को ‘क्रॉनिक एनल फिशर’ (Chronic Anal Fissure) की समस्या है, जिसके कारण ब्लीडिंग हुई थी, न कि किसी कुकर्म के कारण।
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जांच में असहयोग: पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए जब युवक से मेडिकल बोर्ड के सामने जांच कराने और लाई डिटेक्टर टेस्ट देने को कहा गया, तो उसने दोनों से ही इनकार कर दिया।
पुलिसकर्मियों पर होगी कार्रवाई
जांच में सीसीटीवी फुटेज से यह पुष्टि हुई है कि हिरासत के दौरान एक 10 मिनट की अवधि में पुलिसकर्मियों ने युवक के साथ मारपीट की थी। एसपी ने कहा कि शराब के नशे में बहसबाजी से उत्तेजित होकर पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट करना कानूनन गलत है। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
साजिश का संदेह
पुलिस अधीक्षक ने इस बात पर भी जोर दिया कि जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि युवक को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उकसाया गया था ताकि पुलिस की छवि को धूमिल किया जा सके। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी भी बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस विभाग ने इस त्वरित और वैज्ञानिक जांच के जरिए यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा बलों को बदनाम करने के लिए फैलाए गए ये गंभीर आरोप पूरी तरह से असत्य थे।
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