अन्तरराज्यीय साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क पर फतेहाबाद पुलिस का शिकंजा, चार और आरोपी गिरफ्तार; अब तक कुल सात पुलिस की गिरफ्त में
-
बड़ी कार्रवाई: पहले गिरफ्तार किए जा चुके तीन आरोपियों के बाद चार और शातिर दबोचे गए, पुलिस खंगाल रही गिरोह की परतें।
-
शिकार: फर्जी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी और कस्टमर आईडी का झांसा देकर भारतीय सेना के जवान से की थी ₹4.46 लाख की ठगी।
-
बरामदगी: डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर पुलिस ने नकदी, मोबाइल, लैपटॉप, प्रिंटर और फर्जी दस्तावेज किए बरामद।
-
नेटवर्क: उड़ीसा, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान सहित कई राज्यों में फैला था इस साइबर ठगी गिरोह का जाल।
फतेहाबाद/9 जुलाई 2026 /अटल हिन्द ब्यूरो
पुलिस अधीक्षक श्रीमती निकिता खट्टर (IPS) के कुशल निर्देशन में साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत, थाना साइबर क्राइम फतेहाबाद पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने फर्जी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह के चार और सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
इस मामले में पहले ही तीन आरोपी पकड़े जा चुके थे, जिसके बाद अब कुल गिरफ्तार आरोपियों की संख्या सात हो गई है। पुलिस फिलहाल इस नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रेल की गहनता से जांच कर रही है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान:
रवि कुमार उर्फ रवि पुत्र किशोर लाल (निवासी: हांसी)
रवि कुमार पुत्र मोहनलाल (निवासी: अशोक नगर, फतेहाबाद)
रिपन पुत्र मोहनलाल (निवासी: बरसीन, हाल अशोक नगर, फतेहाबाद)
नितेश कुमार पुत्र घनश्याम दास (निवासी: भोडिया खेड़ा, हाल भट्ठा कॉलोनी, फतेहाबाद)
सेना के जवान को बनाया था निशाना
प्रेस वार्ता के दौरान एएसपी श्रीमती दिव्यांशी सिंगला (IPS) ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि शिकायतकर्ता बलजिंद्र सिंह (भारतीय सेना में लांस नायक, निवासी: गांव हिजरावां कलां) को आरोपियों ने एक प्रतिष्ठित लाइफ इंश्योरेंस कंपनी का प्रतिनिधि बनकर कॉल किया था।
आरोपियों ने उन्हें फर्जी कस्टमर आईडी और विशेष लाभ (Special Benefits) दिलाने का लालच देकर झांसे में लिया। इसके बाद अलग-अलग किश्तों में कुल ₹4,46,882 अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। राशि प्राप्त होते ही आरोपियों ने संपर्क तोड़ दिया। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित जवान ने राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी।
“तकनीकी जांच से खुलीं गिरोह की परतें”
एएसपी ने बताया कि साइबर थाना पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, यूपीआई ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का गहन तकनीकी विश्लेषण किया। इसी आधार पर पहले 3 आरोपी पकड़े गए थे। इसके बाद 8 जुलाई 2026 को रिमांड पर लिए गए आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर दो और सदस्यों (रिपन और नितेश) को गिरफ्तार किया गया। इस गिरोह के तार उड़ीसा, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से जुड़े हैं।
नकदी सहित साइबर उपकरण और फर्जी मोहरें बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल होने वाला भारी मात्रा में सामान और नकदी बरामद की है:
गैजेट्स: 3 रेडमी व नार्जो मोबाइल, 1 नोकिया कीपैड फोन, 1 डेल (Dell) लैपटॉप और 1 कैनन (Canon) प्रिंटर।
दस्तावेज व मोहरें: 3 सिम कार्ड, 1 एटीएम कार्ड, VI कंपनी के फर्जी टावर लगाने से संबंधित दस्तावेज और तीन फर्जी मोहरें (Approved, VI Pvt. Ltd. Company एवं Om Prakash Managing Director)।
कैश रिकवरी: आरोपियों से कुल ₹65,000 की नकदी बरामद की गई है (रवि कुमार उर्फ रवि से ₹10,000, रवि कुमार से ₹15,000, रिपन से ₹20,000 और नितेश से ₹20,000)।
पूरे नेटवर्क का होगा पर्दाफाश: एएसपी की आमजन से अपील
एएसपी दिव्यांशी सिंगला ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच अभी जारी है। ठगी गई शेष राशि की रिकवरी और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मास्टरमाइंड्स को पकड़ने के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
उन्होंने आम जनता से अपील करते हुए कहा:
“किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा फोन या सोशल मीडिया पर निवेश, बीमा, केवाईसी (KYC), लॉटरी या किसी भी वित्तीय लाभ का लालच दिए जाने पर बिना वेरिफिकेशन के कोई पैसा ट्रांसफर न करें। यदि कोई संदेह हो, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज कराएं।”

