जनगणना भारत का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास, आंकड़े बनते हैं योजनाओं व विकास का आधार : सुराणा
प्रमुख जनगणना अधिकारी व जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा ने जनगणना— 2027 अंतर्गत गतिविधियों को लेकर प्रेस वार्ता को किया संबोधित, जनगणना अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों की दी जानकारी
चूरू/30 अप्रैल/अटल हिन्द ब्यूरो
प्रमुख जनगणना अधिकारी व जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा ने गुरुवार को जिला कलक्ट्रेट सभागार (आपणी योजना) में जनगणना— 2027 अंतर्गत गतिविधियों को लेकर प्रेस वार्ता को संबोधित किया और जनगणना अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।
इस दौरान प्रमुख जनगणना अधिकारी सुराणा ने कहा कि जनगणना भारत का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास है। इसके माध्यम से प्राप्त आंकड़े अगले एक दशक के लिए हमारी योजनाओं, स्वास्थ्य सुविधाओं, स्कूलों के निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास का आधार बनते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में जनगणना का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और पुराना है। पिछले करीब 150 वर्षों से यह प्रक्रिया बिना रुके (दशक दर दशक) भारत की विकास यात्रा की गवाह रही है। हर 10 साल में होने वाली यह गणना हमें बताती है कि हम कहाँ थे और हम कहाँ जा रहे हैं। जनगणना— 2027 इस कड़ी की 15वीं जनगणना और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 08 वीं जनगणना होगी और जिले में जनगणना 2027 को लेकर गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं।
उन्होंने बताया कि जनगणना — 2027 को सुचारू बनाने के लिए इसे दो मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है। 16 मई 2026 से 14 जून 2026 तक आयोजित होने वाले प्रथम चरण में मकानसूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य किया जाएगा। इस चरण में प्रगणक घर-घर जाकर मकानों की स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं का विवरण लेंगे। पहले चरण में इस बार नागरिकों को स्वगणना की विशेष सुविधा दी गई है। स्व-गणना का चरण 01 मई, 2026 से 15 मई, 2026 तक आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जनगणना हेतु जिले में कुल 21 चार्ज बनाये गये हैं, जिनमें 10 तहसील एवं 11 नगर निकाय हैं। सभी चार्ज स्तर पर चार्ज अधिकारी की नियुक्ति कर प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसी क्रम में जिले में कुल 3695 मकानसूचीकरण ब्लॉक (एचएलबी) एवं 583 पर्यवेक्षकीय सर्किल बनाए गए हैं। सभी एचएलबी का वेब पोर्टल पर जियो—टैगिंग एवं सीमांकन किया जा चुका है।
सुराणा ने बताया कि जनगणना हेतु जिले में कुल 02 राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर एवं 72 जिला स्तरीय फील्ड ट्रेनर नियुक्त कर प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जिले में कुल 3840 प्रगणक एवं 662 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर सीएमएमएस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर मकानसूचीकरण ब्लॉक एवं पर्यवेक्षीय सर्किल का आवंटन कर दिया गया है। प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को चरणबद्ध रूप से 29 अप्रैल, 2026 से 13 मई, 2026 तक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इसी क्रम में 01 फरवरी, 2027 से 28 फरवरी, 2027 तक दूसरे चरण अंतर्गत जनसंख्या गणना होगी। यह मुख्य चरण होगा, जिसमें व्यक्तियों की व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा और रोजगार आदि का डेटा लिया जाएगा। जनगणना रेफरेंस डेट 01 मार्च, 2027 को निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि जनगणना — 2027 अंतर्गत स्वगणना के माध्यम से नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। नागरिक https://se.census.gov.in पर जाकर अपनी जानकारी स्वयं भर सकते हैं तथा एसई आईडी प्राप्त कर सकते हैं।
जिला कलक्टर ने कहा कि नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी ‘जनगणना अधिनियम 1948’ अंतर्गत गोपनीय बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है ताकि नागरिकों तक सटीक जानकारी यथाशीघ्र पहुंच सके। उन्होंने कहा कि किसी प्रकार की भ्रामक खबरें या अफवाहों पर ध्यान नहीं दें तथा सटीक और प्रामाणिक जानकारी के लिए जनगणना निदेशालय, राजस्थान एवं जिला प्रशासन के सोशल मीडिया हैंडल्स को फॉलो करें। उन्होंने बताया कि जनगणना हेतु गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 भी प्रारम्भ किया गया है, जिस पर कॉल करके नागरिक जनगणना से संबंधित समस्त प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
सुराणा ने कहा कि सटीक डेटा ही बेहतर भविष्य की गारंटी है। यदि हमारे पास सही आंकड़े होंगे, तो विकास के लिए बेहतर नीतियां बना पाएंगे। उन्होंने चूरू के प्रत्येक नागरिक से इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में सहयोग की अपील की है। इस दौरान उन्होंने जनगणना— 2027 को लेकर जागरूकता पोस्टर का विमोचन भी किया।
इस दौरान जिला जनगणना अधिकारी व एडीएम अर्पिता सोनी, उप जिला जनगणना अधिकारी व सांख्यिकी उपनिदेशक डॉ रामगोपाल सेपट सहित मीडियाकर्मी मौजूद रहे।


