गुरु पर अटूट विश्वास ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति
चंडीगढ़ /08 जुलाई 2026 /अटल हिन्द ब्यूरो
मनुष्य के जीवन में अनेक प्रकार की परिस्थितियाँ आती-जाती रहती हैं। सुख-दुःख, लाभ-हानि, सफलता-असफलता तथा जीवन की अप्रत्याशित घटनाएँ मानव जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हैं, किन्तु इन परिस्थितियों के कारण कभी भी सतगुरु एवं परमात्मा के प्रति हमारे विश्वास में कमी नहीं आनी चाहिए। सच्चा गुरु-सिख वही है जो हर परिस्थिति में सतगुरु की रज़ा को स्वीकार करते हुए अटूट श्रद्धा और विश्वास बनाए रखता है। ये विचार कर्नल एच0 एस0 गुलेरिया जी मेम्बर इंचार्ज, प्रचार-प्रसार विभाग दिल्ली ने श्रद्धालुओं को सन्त निरंकारी सत्संग भवन सैक्टर-30 चंडीगढ़ हुए सत्संग में कहे।
उन्होंने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु की शिक्षा को केवल सुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे अपने जीवन में पूर्ण विश्वास के साथ अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संशय और द्वंद्व मनुष्य को भीतर से कमजोर कर देते हैं, जबकि गुरु पर पूर्ण विश्वास उसे हर कठिनाई का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है। जिस प्रकार अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों ने भ्रम और मोह से बाहर निकालकर धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी, उसी प्रकार सद्गुरु का ज्ञान भी मनुष्य को जीवन के हर संघर्ष में सही दिशा प्रदान करता है।
कर्नल गुलेरिया जी ने कहा कि कई बार जीवन में ऐसा समय भी आता है जब मनुष्य स्वयं को निराशा के अंधकार में घिरा हुआ अनुभव करता है। उसे प्रतीत होता है कि सभी रास्ते बंद हो गए हैं और आगे बढ़ने का कोई मार्ग शेष नहीं है। ऐसे समय में यदि मनुष्य अपने सतगुरु की कृपा और सामर्थ्य पर अटूट विश्वास बनाए रखे, तो वही विश्वास उसे निराशा से निकालकर नई आशा और नए उत्साह का संचार करता है। उन्होंने कहा कि सतगुरु अपने भक्त को कभी अकेला नहीं छोड़ते। यदि परिस्थितियाँ प्रतिकूल भी हों, तो भी यह विश्वास रखना चाहिए कि सतगुरु जो कुछ कर रहे हैं, वह हमारे सर्वाेत्तम हित में ही है।
अपने प्रवचन के दौरान उन्होंने एक प्रेरणादायक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि सतगुरु अपने भक्तों के मन की प्रत्येक भावना से परिचित होते हैं। कई बार भक्त अपनी सीमित बुद्धि से परिस्थितियों को समझ नहीं पाता, किन्तु सतगुरु उचित समय पर अपनी कृपा से यह अनुभव करा देते हैं कि उनकी रहमत सदैव भक्त के साथ है। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति का आधार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समर्पण, विनम्रता और विश्वास है।
उन्होंने संत कुंवर राम जी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि गुरु-प्रेम मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। यदि मनुष्य को अपने रूप, गुण, पद, प्रतिष्ठा अथवा सेवा का अहंकार हो जाए और वही उसे सतगुरु से दूर कर दे, तो ऐसे गुणों का कोई महत्व नहीं रह जाता। इसलिए प्रत्येक श्रद्धालु को अपने जीवन में विनम्रता, सेवा-भाव और गुरु-प्रेम को सर्वाेच्च स्थान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि निरंकारी मिशन सदैव मानवता, प्रेम, सेवा, भाईचारे और विश्व बंधुत्व का संदेश देता आया है। मिशन की शिक्षा हमें यह प्रेरणा देती है कि हम जाति, धर्म, भाषा एवं क्षेत्र की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर समस्त मानव जाति को एक परिवार मानें तथा प्रेम, सहयोग और सद्भाव के साथ जीवन व्यतीत करें।
उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे सतगुरु द्वारा प्रदान किए गए ब्रह्मज्ञान के प्रकाश में अपने जीवन को आलोकित करें तथा अपने व्यवहार, आचरण और विचारों से समाज में प्रेम, शांति और सद्भाव का वातावरण स्थापित करने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि आज के समय में आध्यात्मिकता ही वह शक्ति है जो मनुष्य को तनाव, भय और असुरक्षा से मुक्त कर सच्चे सुख एवं शांति का अनुभव कराती है। समागम के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ सत्संग का श्रवण किया तथा सतगुरु के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त की। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक अरदास की गई तथा समस्त श्रद्धालुओं ने मानवता, सेवा, प्रेम, सद्भाव और सतगुरु के प्रति अडिग विश्वास बनाए रखने का संकल्प लिया।
इससे पूर्व यहां के ज़ोनल इन्चार्ज श्री ओ0 पी0 निरंकारी व स्थानीय संयोजक श्री नवनीत पाठक जी ने सभी श्रोताओं की ओर से कर्नल गुलेरिया जी के देहली से पधारने पर धन्यवाद व स्वागत किया ।
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