सिरसा में हाई वोल्टेज ड्रामा: 5 गुना मुआवजे की मांग को लेकर HT टावर पर चढ़े 8 किसान, काम ठप
अटल हिन्द ब्यूरो/सिरसा | 08 जुलाई 2026
हरियाणा के सिरसा जिले के वैदवाला गांव में हाई वोल्टेज (HT) बिजली टावर लगाने और तार बिछाने का काम आज उस समय भारी हंगामे में बदल गया, जब कम मुआवजे से नाराज 8 किसान अचानक गगनचुंबी बिजली टावर पर चढ़ गए। किसानों के इस कदम से प्रशासन और बिजली निगम में हड़कंप मच गया है। टावर पर चढ़े किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें कलेक्टर रेट से पांच गुना अधिक मुआवजा नहीं मिलता, वे नीचे नहीं उतरेंगे। इस विरोध के चलते फिलहाल बिजली की तारें बिछाने का काम पूरी तरह रुक गया है।
23 जून से जारी था धरना, आज टावर पर चढ़े किसान
वैदवाला गांव के ग्रामीण अपनी जमीन के उचित मुआवजे को लेकर पिछले 23 जून से लगातार शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें भी हुईं, लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई। बातचीत बेनतीजा रहने के बाद आज आक्रोशित होकर आठ किसान बिजली के टावर पर चढ़ गए।
घटना की सूचना मिलते ही बिजली निगम के आला अधिकारी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। किसानों को नीचे उतारने के प्रयास किए गए, लेकिन देखते ही देखते मौके पर भारी संख्या में ग्रामीण और विभिन्न किसान संगठनों के नेता भी इकट्ठा हो गए और उन्होंने नीचे ही धरना शुरू कर दिया।
“शहर के पास की जमीन, फिर भी मिल रहा सबसे कम मुआवजा”
टावर पर चढ़े किसान नेताओं—भूपेन्द्र वैदवाला, मैक्स साहुवाला और हरजिन्द्र संधू— ने ऊपर से ही अपना रुख साफ करते हुए कहा:
“जब तक सरकार और प्रशासन किसानों को उचित मुआवजा नहीं देता, यह धरना और प्रदर्शन जारी रहेगा। वैदवाला को छोड़कर अन्य सभी गांवों में कलेक्टर रेट से पांच गुना तक मुआवजा दिया जा रहा है। वैदवाला गांव सिरसा शहर से बिल्कुल सटा हुआ है, इसके बावजूद यहाँ सबसे कम मुआवजा राशि दी जा रही है। यह सरासर अन्याय है। अगर प्रशासन हमारी मांग मान लेता है, तो हम तुरंत नीचे आ जाएंगे।”
सिरसा को ‘ब्लैक आउट’ से बचाने का है प्रोजेक्ट
दरअसल, सिरसा शहर की बिजली व्यवस्था को मजबूत करने और इसे संभावित ब्लैक आउट से बचाने के लिए सरकार ने पावर हाउस को एक नई वैकल्पिक लाइन से जोड़ने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। पहले सिरसा पावर हाउस में सिर्फ एक ही मुख्य लाइन आती थी, जिससे तकनीकी खराबी आने पर पूरे शहर की बत्ती गुल होने का खतरा रहता था।
इसी खतरे को टालने के लिए ग्रामीण इलाकों से होकर नई लाइन लाने का यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया, जिसका लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। खेतों में टावर पहले ही खड़े किए जा चुके हैं और अब सिर्फ तार बिछाने का काम बाकी है, जो वैदवाला सहित आधा दर्जन गांवों से होकर गुजर रहा है।
बिजली निगम का पक्ष: ‘कोर्ट में केस हार चुके हैं किसान’
दूसरी तरफ, बिजली निगम के एसडीओ (निर्माण) कुलदीप ने बताया कि यह प्रोजेक्ट शहर की बिजली सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा:
“किसानों की सहमति से ही जमीन पर टावर लगाए गए थे और उस समय किसी ने विरोध नहीं किया था। सरकार के नियमों के अनुसार सभी को मुआवजा राशि जारी की जा चुकी है। वैदवाला गांव के ही तीन किसानों ने इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वे कोर्ट में केस हार गए। अब कुछ लोग जानबूझकर मुआवजा राशि नहीं ले रहे हैं और काम में बाधा डाल रहे हैं। फिलहाल किसानों से बातचीत का दौर जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही कोई बीच का रास्ता निकाल लिया जाएगा।”
फिलहाल मौके पर तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस व प्रशासन किसानों को समझाने की कोशिशों में जुटा है।

