दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज में बीते एक सप्ताह के अंदर छात्रसंघ के चारों प्रमुख पदाधिकारियों समेत करीब 30 छात्रों को निलंबित कर दिया गया है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अपमानजनक भाषा, अनुशासनहीनता, वार्षिक उत्सव (8-9 अप्रैल) के दौरान हुई कथित झड़पों और सोशल मीडिया पर संस्थान की छवि खराब करने के आरोपों पर की गई है।
छात्र पक्ष इसे पूरी तरह मनमाना और बदले की कार्रवाई बता रहा है। उनका आरोप है कि यह फरवरी में प्रिंसिपल रमा शर्मा के बेटे की कॉलेज परिसर में हुई शादी के विरोध और बाद में की गई RTI से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कॉलेज की विभिन्न अनियमितताओं की जानकारी मांगी थी।
क्या कहता है प्रशासन?
कॉलेज की ओर से जारी नोटिसों में कहा गया है कि निलंबित छात्रों को अनुशासन भंग करने, स्टाफ के खिलाफ अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करने और कॉलेज को बदनाम करने के सबूत मिले हैं। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष पार्थ श्रीवास्तव को 20 अप्रैल को पहला नोटिस मिला। उन पर आरोप है कि उन्हें कई बार माता-पिता के साथ समिति के सामने पेश होने का मौका दिया गया, लेकिन उन्होंने पश्चाताप नहीं किया और आरोपों को स्वीकार नहीं किया।
कॉलेज की ओर से जारी नोटिसों में कहा गया है कि निलंबित छात्रों को अनुशासन भंग करने, स्टाफ के खिलाफ अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करने और कॉलेज को बदनाम करने के सबूत मिले हैं। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष पार्थ श्रीवास्तव को 20 अप्रैल को पहला नोटिस मिला। उन पर आरोप है कि उन्हें कई बार माता-पिता के साथ समिति के सामने पेश होने का मौका दिया गया, लेकिन उन्होंने पश्चाताप नहीं किया और आरोपों को स्वीकार नहीं किया।
इसके बाद 20, 22, 23 और 25 अप्रैल को अलग-अलग नोटिस जारी कर बाकी छात्रों और यूनियन पदाधिकारियों (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव व संयुक्त सचिव) को सस्पेंड किया गया। निलंबन की अवधि स्पष्ट नहीं बताई गई, लेकिन इस दौरान परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन को छोड़कर छात्रों को कॉलेज परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
छात्रों और यूनियन का पक्ष:
पार्थ श्रीवास्तव ने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रिंसिपल के बेटे की कैंपस शादी का विरोध करने और RTI दाखिल करने के बाद यह कार्रवाई हुई। छात्रों का कहना है कि सार्वजनिक संस्थान को निजी बैंक्वेट हॉल की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
पार्थ श्रीवास्तव ने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रिंसिपल के बेटे की कैंपस शादी का विरोध करने और RTI दाखिल करने के बाद यह कार्रवाई हुई। छात्रों का कहना है कि सार्वजनिक संस्थान को निजी बैंक्वेट हॉल की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
हंसराज कॉलेज छात्रसंघ ने प्रशासन के इस कदम की कड़ी निंदा की है और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) के अध्यक्ष आर्यन मान ने इसे “छात्र लोकतंत्र पर हमला और प्रशासनिक शक्ति का घोर दुरुपयोग” बताया।

आर्यन मान ने कहा, “ये वही चुने हुए प्रतिनिधि हैं जो छात्रों के अधिकारों के लिए धरने पर बैठते हैं। उनका अपराध क्या है? सच बोलना? प्रशासनिक विफलताओं को उजागर करना? चुने हुए छात्र नेताओं की आवाज दबाना शासन नहीं, डर का माहौल बनाना है। परिसर असहमति, संवाद और जवाबदेही के लिए होते हैं, तानाशाही के लिए नहीं।”डूसू ने निलंबन को तत्काल और बिना शर्त रद्द करने की मांग की है।
इस पूरे विवाद की जड़ फरवरी 2026 में प्रिंसिपल रमा शर्मा के बेटे की कॉलेज परिसर (आवासित क्षेत्र) में हुई शादी को लेकर हुई थी। छात्रों ने इसे सार्वजनिक संसाधनों का निजी उपयोग बताया था। प्रशासन ने तब सफाई दी थी कि प्रिंसिपल को आवंटित आवास में निजी समारोह करने का अधिकार है।
अब वार्षिक उत्सव के दौरान हुई कथित हिंसा के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं, जबकि छात्र इसे असहमति को कुचलने की कोशिश बता रहे हैं।
यह मामला फिलहाल दिल्ली उच्च न्यायालय में भी पहुंच चुका है। छात्रों ने याचिका दायर कर निलंबन पर रोक लगाने की मांग की है।
कॉलेज जैसे शैक्षणिक माहौल में अनुशासन जरूरी है, लेकिन साथ ही असहमति और सवाल उठाने का अधिकार भी छात्रों का लोकतांत्रिक हक है। क्या यह कार्रवाई वाकई अनुशासन बहाल करने के लिए है या सत्ता का दुरुपयोग? दोनों पक्षों की दलीलों को सुनना और निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि युवा आवाजें दब न जाएं और शिक्षा का माहौल भी सुरक्षित रहे।
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